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—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह— 🔴 दमोह में सनसनीखेज मामला: चार दिन से लापता शिवम विश्वकर्मा का शव जिला अस्पताल में मिला — परिजनों ने पुलिस व प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप, हजारों लोगों का प्रदर्शन

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

🔴 दमोह में सनसनीखेज मामला: चार दिन से लापता शिवम विश्वकर्मा का शव जिला अस्पताल में मिला — परिजनों ने पुलिस व प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप, हजारों लोगों का प्रदर्शन


दमोह (मध्य प्रदेश):

दमोह जिले के ग्राम बनवार रोड निवासी शिवम विश्वकर्मा (उम्र 22 वर्ष) के लापता होने और फिर उसके शव के जिला अस्पताल में मिलने की घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। इस मामले ने न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि लोगों के बीच भारी आक्रोश भी फैला दिया है।

जानकारी के अनुसार, शिवम विश्वकर्मा 9 अक्टूबर को अपनी टू व्हीलर गाड़ी सुधरवाने दमोह आया था और शाम के समय उसके एक दोस्त का फोन आया कि शिवम ने शराब पी ली है उसके बाद शिवम के दोस्त का मोबाइल स्विच ऑफ हो गया l और रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया था।

परिजनों ने तत्काल बनवार चौकी में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, जिला एसपी कार्यालय में भी आवेदन दिया साथ ही सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें वायरल कर खोजबीन की अपील की।

चार दिनों तक पुलिस की खोजबीन के बावजूद कोई सुराग नहीं मिला।

चार दिन बाद अचानक खबर आई कि शिवम का शव जिला अस्पताल दमोह में पाया गया।

इससे पूरे परिवार में मातम छा गया। परिजनों का आरोप है कि

> “पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने समय पर सूचना नहीं दी। शव को किसने और कैसे अस्पताल पहुंचाया — इसका अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।”

परिजनों ने शिवम के चार दोस्तों पर भी आरोप लगाया है l

परिजनों का यह भी कहना है कि शिवम की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है और मामला सिर्फ गुमशुदगी का नहीं, बल्कि किसी साजिश या अपराध का हो सकता हैं l

मृतक के परिवारजन और ग्रामीणों ने जिला अस्पताल प्रबंधन और शिवम के चार दोस्तों की संदेह भूमिका एवं पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

परिजनों का कहना है कि

> “अगर पुलिस ने पहले से जांच में गंभीरता दिखाई होती, तो शायद शिवम की जान बच सकती थी।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शव मिलने के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही बरती और परिवार को उचित जानकारी या सहयोग नहीं दिया गया।

घटना से आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने अंबेडकर चौराहा, दमोह पर हजारों की संख्या में धरना प्रदर्शन किया।
मौके पर भीड़ इतनी अधिक थी कि यातायात तक बाधित हो गया।
लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और “शिवम को न्याय दिलाओ” की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस और भीड़ के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
कुछ महिलाओं ने गुस्से में पुलिसकर्मियों पर चप्पलें तक चला दीं।
हालात को काबू में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा।

परिजनों ने जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया।
अंततः अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें मांग की गई कि—

> “मामले की निष्पक्ष जांच की जाए,

जो भी अधिकारी या कर्मचारी इसमें लिप्त या लापरवाह हैं,
उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।”

इस पूरे प्रकरण के बाद कई गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं:

1. शिवम का शव आखिर अस्पताल तक कैसे पहुँचा?

2. क्या उसकी हत्या की गई या कोई दुर्घटना हुई?

3. पुलिस और अस्पताल प्रशासन को शव की जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई?

4. गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने क्या प्रयास किए?

फिलहाल पुलिस प्रशासन का कहना है कि

> “मामले की जांच चल रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का खुलासा किया जा सकेगा।”

लेकिन जनता में प्रशासन के प्रति गहरा अविश्वास और नाराज़गी देखी जा रही है।

ग्राम बनवार रोड और आसपास के इलाकों में शोक की लहर है।
शिवम विश्वकर्मा के घर में मातम पसरा हुआ है, परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन है।

गांव के लोग अब एक ही आवाज में कह रहे हैं —

“शिवम को न्याय मिलना चाहिए, दोषियों को सजा हो।”

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