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शासकीय जनजातीय सीनियर बालक छात्रावास, सिंघपुर में अब बच्चों का माहौल बदला — पढ़ाई, अनुशासन और व्यवस्था में दिखा सुधार

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

छात्रों के भय को मिटाकर विश्वास जगाया — राहुल अग्रवाल ने बदली छात्रावास की तस्वीर

शासकीय जनजातीय सीनियर बालक छात्रावास, सिंघपुर में अब बच्चों का माहौल बदला — पढ़ाई, अनुशासन और व्यवस्था में दिखा सुधार


दमोह जिले के जबेरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शासकीय जनजातीय सीनियर बालक छात्रावास, सिंगपुर में इन दिनों माहौल पूरी तरह बदल चुका है।

जहां कभी छात्रावास में अफवाहों और डर का माहौल था, वहीं अब बच्चों में उत्साह, अनुशासन और पढ़ाई के प्रति नई ऊर्जा दिखाई दे रही है।

इस परिवर्तन का श्रेय छात्रावास के अधीक्षक राहुल अग्रवाल को दिया जा रहा है, जिन्होंने अपने समर्पण और संवेदनशीलता से छात्रावास में विश्वास और सकारात्मकता का वातावरण स्थापित किया है।

अफवाहों से था भय का माहौल

कुछ वर्षों पूर्व छात्रावास में अजीबो-गरीब अफवाहों के चलते छात्र वहाँ रुकने से डरते थे।

ग्रामीणों के अनुसार, बच्चों में एक अकारण भय व्याप्त था जिसके कारण वे छात्रावास छोड़कर घरों को लौट जाते थे।

इस स्थिति ने शिक्षा की निरंतरता को प्रभावित किया था और छात्रावास लगभग खाली होने की स्थिति में पहुँच गया था।

अधीक्षक ने घर-घर जाकर किया संवाद

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए अधीक्षक राहुल अग्रवाल ने समस्या का समाधान प्रशासनिक आदेशों से नहीं, बल्कि संवाद और विश्वास के माध्यम से निकालने का निश्चय किया।

उन्होंने स्वयं ग्रामीणों के घर-घर जाकर अभिभावकों से भेंट की और उन्हें आश्वस्त किया कि छात्रावास पूरी तरह सुरक्षित है।

छात्रावास अधीक्षक राहुल अग्रवाल ने कहा —

मैं स्वयं छात्रावास में निवास करता हूँ। जब मैं यहां रह सकता हूं, तो हमारे बच्चे क्यों नहीं रह सकते?
ये सभी हमारे अपने बच्चे हैं, हम इनकी देखभाल अपने बच्चों की तरह करते हैं।

उनके इस स्नेहपूर्ण और भरोसेमंद व्यवहार ने अभिभावकों का विश्वास जीत लिया।

अब छात्र खुश और अनुशासित माहौल में पढ़ रहे हैं

आज वही छात्र जो पहले छात्रावास में रुकने से कतराते थे, अब वहीं रहकर खुशी और आत्मविश्वास से पढ़ाई कर रहे हैं।

छात्रावास का वातावरण अब सुरक्षित, अनुशासित और अध्ययन के अनुकूल बन चुका है।

बालकों के अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि जब से राहुल अग्रवाल अधीक्षक के रूप में आए हैं, तब से

भोजन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है,

अध्ययन का माहौल सुदृढ़ हुआ है,

साफ-सफाई और अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने की सराहना

गांव के ग्रामीणों ने बताया कि अब छात्रावास का माहौल पूरी तरह बदल गया है।

बच्चे न केवल पढ़ाई में रुचि ले रहे हैं बल्कि सांस्कृतिक और खेलकूद गतिविधियों में भी सक्रिय हो रहे हैं।

राहुल अग्रवाल के प्रयासों से न केवल बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि ग्रामीणों का शिक्षा तंत्र पर भरोसा भी मजबूत हुआ है।

एक अभिभावक ने कहा —

पहले बच्चे डर के कारण रात को घर लौट आते थे, लेकिन अब वे खुद कहते हैं कि छात्रावास में रहना अच्छा लगता है।
अधीक्षक साहब बच्चों का बहुत ध्यान रखते हैं।

सकारात्मक नेतृत्व की मिसाल

अधीक्षक राहुल अग्रवाल का यह कार्य इस बात का उदाहरण है कि जब कोई अधिकारी अपने पद को केवल दायित्व नहीं बल्कि सेवा का अवसर समझता है, तब परिवर्तन स्वतः संभव होता है।
उन्होंने भय को विश्वास में बदला, अफवाहों को सच्चाई से हराया और बच्चों के भविष्य को नई दिशा दी।

सिंगपुर का यह छात्रावास आज न केवल अनुशासन और अध्ययन का केंद्र बना है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सच्ची निष्ठा और मानवीय संवेदना से किसी भी व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है।

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