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जिला जेल दमोह में राघव चरित्रामृत श्रीरामकथा का शुभारंभ – भक्ति, अनुशासन और मर्यादा का मिला अद्भुत संगम

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

जिला जेल दमोह में राघव चरित्रामृत श्रीरामकथा का शुभारंभ – भक्ति, अनुशासन और मर्यादा का मिला अद्भुत संगम

दमोह।
जिला जेल में आज बुधवार को आध्यात्मिक और धार्मिक वातावरण के बीच राघव चरित्रामृत श्रीरामकथा का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर जेल मंदिर से निकली भव्य कलश यात्रा के साथ कथा का शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा में श्रद्धालु महिलाएं, कथा मंडली एवं जेल प्रशासन के सदस्य शामिल हुए। जिला जेल प्रांगण में पहुंची, तब वहां का वातावरण “जय श्रीराम” के जयघोषों से गूंज उठा।

कथा का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित छोटेलाल प्रजापति, जेल अधीक्षक, उप जेल अधीक्षक, स्टाफ सदस्य एवं बड़ी संख्या में उपस्थित बंदीगणों की उपस्थिति में हुआ। कथा व्यास पंडित राघव प्रिया सृष्टि भट्ट (वृंदावन) ने श्रीरामचरित्र के दिव्य प्रसंगों का रसपूर्ण वर्णन करते हुए भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा, विनम्रता, और धर्म पालन की महत्ता पर प्रकाश डाला।

🌺 कथा स्थल पर भक्तिमय माहौल

कथा के प्रथम दिवस से ही जेल परिसर में अध्यात्म और भक्ति का वातावरण छा गया। पंडित राघव प्रिया सृष्टि भट्ट के मुखारविंद से प्रवाहित हो रहे रामकथा अमृत को सुनते हुए बंदीगणों के चेहरों पर अद्भुत शांति और भावनात्मक परिवर्तन के संकेत झलकने लगे। अनेक बंदीगणों ने कहा कि कथा श्रवण से उन्हें आत्मिक सुकून और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हुई।

जेल प्रशासन द्वारा कथा स्थल को सुंदर पुष्प सज्जा और विद्युत श्रृंगार से सजाया गया था। बंदीगणों ने स्वयं स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखते हुए कथा में सक्रिय भागीदारी निभाई। कथा के दौरान “राम नाम सत्य है”, “जय श्रीराम” और “सियाराम जय जय राम” जैसे भक्ति गीतों से वातावरण गूंजता रहा।

🌼 सदाचार और सेवा का संदेश

कथावाचक पंडित राघव प्रिया सृष्टि भट्ट ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें यह सिखाता है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, धर्म और मर्यादा का पालन ही सच्चे जीवन का उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि श्रीराम का आदर्श चरित्र केवल एक कथा नहीं बल्कि मानव जीवन के लिए दिशा-सूचक है।
कथा के माध्यम से सभी को यह प्रेरणा दी गई कि जीवन में सुधार, क्षमा, और सत्य की राह पर चलना ही परम साधना है।

🙏 सभी ने किया रामकथा अमृत का रसपान

कथा के दौरान जेल के अधिकारी, कर्मचारी और बंदीगण एकाग्र भाव से कथा का श्रवण करते रहे। कई बंदीगणों ने इसे अपने जीवन का यादगार आध्यात्मिक अनुभव बताया। जेल अधीक्षक ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल मानसिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में भी सहायक होते हैं।

🌸 समापन पर जयघोष से गूंजा जेल परिसर

कथा के समापन पर सभी उपस्थित जनों ने “जय श्रीराम” और “जय सिया राम” के नारे लगाए। भक्ति और भावनाओं के इस अद्भुत संगम में जेल परिसर का वातावरण पूरी तरह पवित्र और ऊर्जावान बन गया।

कथा का यह आयोजन 5 दिन तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन भिन्न-भिन्न प्रसंगों का वाचन होगा। जेल प्रशासन और स्टाफ ने सभी को आगामी दिनों में भी कथा श्रवण हेतु आमंत्रित किया।
जिला जेल दमोह में आयोजित श्रीरामकथा के प्रथम दिवस पर कथा व्यास पंडित राघव प्रिया सृष्टि भट्ट द्वारा कथा का रसपान कराते हुए — साथ में उपस्थित जेल स्टाफ एवं बंदीगण।

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