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*जिला जेल दमोह में श्रीराम विवाह उत्सव का हुआ भव्य आयोजन* *कथा व्यास राघव प्रिया सृष्टि भट्ट के श्रीमुख से श्रीराम विवाह प्रसंग का हुआ भावपूर्ण वर्णन, बंदीगण हुए भावविभोर*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*जिला जेल दमोह में श्रीराम विवाह उत्सव का हुआ भव्य आयोजन*

*कथा व्यास राघव प्रिया सृष्टि भट्ट के श्रीमुख से श्रीराम विवाह प्रसंग का हुआ भावपूर्ण वर्णन, बंदीगण हुए भावविभोर*

दमोह। जिला जेल दमोह परिसर में चल रही श्रीराम चरणामृत कथा के अंतर्गत आज कथा का चतुर्थ दिवस अत्यंत ही भक्ति भाव और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस दिन का मुख्य प्रसंग था — भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह उत्सव।

कथा व्यास राघव प्रिया सृष्टि भट्ट जी ने अपने मधुर एवं ओजस्वी वाणी में श्रीराम विवाह का ऐसा वर्णन किया कि पूरा जेल परिसर भक्ति रस से सराबोर हो गया। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे समस्त बंदीगण, जेल स्टाफ और अधिकारीगण भावविभोर होते गए।

मुख्य यजमान के रूप में जेल अधीक्षक श्री छोटेलाल प्रजापति जी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने परिवार सहित कथा में श्रद्धापूर्वक भाग लिया और श्रीराम कथा के माध्यम से धर्म, मर्यादा एवं भक्ति का संदेश दिया। श्री प्रजापति ने कहा कि श्रीराम का जीवन त्याग, सत्य, प्रेम और आदर्श का प्रतीक है; ऐसी कथाओं से हर व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता आती है।

इस अवसर पर जेल स्टाफ पुष्पेंद्र ठाकुर, त्रिलोक कुर्मी, सचिन सहित समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी भी अपनी उपस्थिति से कथा में सहभागी बने। सभी ने भक्ति भाव से कथा श्रवण किया और श्रीराम विवाह के पवित्र प्रसंग का आत्म चिंतन किया।

कथा का सबसे आकर्षक और भावनात्मक क्षण वह रहा जब छोटे-छोटे बच्चों ने श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता और जनकपुर की झांकी के रूप में मंच पर प्रवेश किया। जैसे ही बच्चों के स्वरूप प्रकट हुए, समस्त उपस्थितजन भावविह्वल हो उठे और पूरा परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा।

कथा व्यास राघव प्रिया सृष्टि भट्ट जी ने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि श्रीराम विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो आदर्श संस्कारों का मिलन है — मर्यादा और स्नेह का, धर्म और कर्तव्य का। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि जब आचरण शुद्ध हो, तो जीवन स्वयं ही दिव्यता से भर उठता है।

पूरे आयोजन के दौरान भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा। बंदीगणों ने कथा के माध्यम से आत्मचिंतन किया और जीवन को सुधारने का संकल्प लिया। जेल परिसर को रंगीन फूलों और धार्मिक झांकियों से सजाया गया था, जिससे वातावरण अत्यंत पवित्र और उत्सवमय हो गया था।

अंत में सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ। सभी बंदीगण, स्टाफ सदस्य एवं अधिकारीगण ने कथा व्यास जी के चरणों में आशीर्वाद प्राप्त किया और श्रीराम विवाह के इस पावन अवसर पर अपने हृदय में भक्ति, शांति और प्रेम का भाव जागृत किया।

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