—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*बाल विवाह रोकने कैंडल जलाकर ली शपथ, दमोह में 100 दिन का विशेष अभियान शुरू*
दमोह। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में दमोह में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। दमोह बालिका छात्रावास में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम के दौरान छात्राओं और शहर की प्रतिष्ठित महिलाओं ने कैंडल जलाकर बाल विवाह रोकने की सामूहिक शपथ ली। इसी अवसर पर जिले में 100 दिनों के विशेष अभियान का शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य है— दमोह को बाल विवाह मुक्त जिला बनाना।
संयुक्त अभियान—संकल्प संस्था और महिला एवं बाल विकास विभाग की अनूठी पहल
यह अभियान संकल्प समाज सेवी संस्था तथा महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के संयुक्त सहयोग से शुरू किया गया है। दोनों संस्थाओं द्वारा बाल विवाह जैसे संवेदनशील मुद्दे पर लंबे समय से कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि संस्था ने बीते एक वर्ष में लगभग 115 बाल विवाह होने से रोके, जो इस क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
अब अगले 100 दिनों में जिलेभर में जनजागरूकता, स्कूल-कॉलेजों में संवाद कार्यक्रम, सामुदायिक बैठकें, रैलियाँ और काउंसलिंग गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी।
कार्यक्रम की शुरुआत—कैंडल जलाकर बदली सोच की लौ
बालिका छात्रावास के परिसर में कार्यक्रम की शुरुआत सैकड़ों बालिकाओं, शिक्षकों, समाजसेवियों और प्रतिष्ठित महिलाओं द्वारा कैंडल जलाने से हुई। कैंडल जलाने का उद्देश्य—
बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता
बालिकाओं को स्वावलंबन के लिए प्रेरणा
समाज में सकारात्मक सोच का प्रसारण
को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करना था।
शपथ के दौरान सभी ने यह संकल्प लिया कि वे—
न तो बाल विवाह करेंगे,
न होने देंगे,
और न ही ऐसे किसी आयोजन का समर्थन करेंगे।
बालिकाओं को सशक्त बनाने पर जोर
कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने बालिकाओं को उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ी महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ दीं।
विशेष रूप से—
किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन
एनीमिया, पोषण और मासिक धर्म स्वच्छता
शिक्षा और करियर के अवसर
आत्मविश्वास और आत्मरक्षा
पर विस्तृत चर्चा की गई।
अतिथियों ने यह भी कहा कि बाल विवाह रोकना केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की सामाजिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्यजन
कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व दिया। इनमें प्रमुख रूप से—
डॉ. चटर्जी मैडम
डॉ. मोनिका पालीवाल
डॉ. प्रिया श्रीवास्तव
शिक्षाविद अरुणा उज्जैनकर
रजनी ठाकुर
रश्मि वर्मा राठौर मैडम
बाल कल्याण समिति (CWC) सदस्य खुशबू तिवारी
यूनिसेफ प्रतिनिधि वीरेंद्र जैन
मनीष सोनी
इन अतिथियों ने बाल विवाह के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला और बालिकाओं को सपनों के साथ आगे बढ़ने हेतु प्रेरित किया।
आयोजक एवं सहयोगी
इस प्रभावशाली आयोजन का नेतृत्व और समन्वय किया—
देवेंद्र दुबे
मनोज रजक
दिशा पटैल
होस्टल इंचार्ज राजलक्ष्मी पाराशर
कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ समाजसेवी खुशबू तिवारी द्वारा किया गया, जिन्होंने बाल विवाह रोकने के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
अभियान का उद्देश्य—दमोह को बनाना ‘बाल विवाह मुक्त जिला’
इस 100 दिवसीय अभियान में—
✔ पंचायत स्तर पर जागरूकता
✔ स्कूलों और छात्रावासों में संवाद
✔ अभिभावकों को परामर्श
✔ समुदाय में रैलियाँ और वर्कशॉप
✔ किशोर-किशोरियों के लिए प्रशिक्षण
जैसी गतिविधियाँ की जाएँगी।
आयोजकों का कहना है कि यदि समाज एकजुट होकर प्रतिबद्धता के साथ काम करे, तो आने वाले समय में दमोह को मध्यप्रदेश का पहला बाल विवाह मुक्त जिला बनाने का लक्ष्य आसानी से पूरा किया जा सकता है।









