—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*दमोह न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला*
*हत्या के दोषी को आजीवन कारावास*
*मृत्युकालीन कथन बना निर्णय का आधार*

दमोह। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत गठित विशेष न्यायालय, दमोह के माननीय विशेष न्यायाधीश श्री उदय सिंह मरावी ने हत्या के एक अत्यंत गंभीर एवं अमानवीय प्रकरण में आरोपी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है।
न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि समाज में इस प्रकार के जघन्य अपराधों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं बरती जा सकती।
न्यायालय द्वारा आरोपी ओमकार काछी पटैल पिता हरप्रसाद काछी पटैल, निवासी वार्ड क्रमांक-15, पथरिया, थाना पथरिया, जिला दमोह को भारतीय दंड संहिता एवं एससी/एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दोषसिद्ध किया गया।
धारा 302 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत आजीवन कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड,
धारा 449 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड,
धारा 3(2)(V) अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत आजीवन कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड
से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान रखा गया है।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक निदेशक अभियोजन श्री धर्मेंद्र सिंह तारन के निर्देशन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी श्री सतीश कपस्या ने सशक्त एवं तथ्यपरक पैरवी की। न्यायालय में अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान एवं दस्तावेजों ने मामले को मजबूती प्रदान की। इस दौरान सहायक विनय नामदेव एवं आरक्षक भूपेंद्र पांडे द्वारा आवश्यक सहयोग प्रदान किया गया।
प्रकरण की विवेचना तत्कालीन एसडीओपी एवं विवेचक प्रवीण भूरिया एवं श्री पूर्णानंद मिश्रा द्वारा की गई, जिन्होंने साक्ष्य संकलन, गवाहों के बयान एवं तकनीकी तथ्यों को विधिवत न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
अभियोजन के अनुसार घटना 28 फरवरी 2017 की है। रात्रि लगभग 8:30 बजे, पीड़िता अपने घर के अंदर सो रही थी। इसी दौरान उसके घर के दरवाजे पर जोर से खटखटाने की आवाज आई। पूछने पर बाहर से आरोपी ओमकार पटैल ने अपनी पहचान बताई। पूर्व परिचय एवं विश्वास के कारण पीड़िता द्वारा दरवाजा खोल दिया गया।
दरवाजा खुलते ही आरोपी जबरन घर के भीतर प्रवेश कर गया और बिस्तर पर बैठकर पीड़िता से मिलने तथा आपत्तिजनक बातें करने लगा। पीड़िता द्वारा विरोध किए जाने पर आरोपी ने उसकी जाति को जानते हुए, बुरी नीयत से छेड़छाड़ की तथा जान से मारने की नीयत से पीड़िता के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। इसके पश्चात आरोपी मौके से फरार हो गया था
घटना के बाद गंभीर रूप से झुलसी पीड़िता को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पथरिया ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के पश्चात उसे जिला अस्पताल दमोह रेफर किया गया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने पीड़िता को टू-केयर अस्पताल जबलपुर भेजा।
वहाँ सहायक उपनिरीक्षक पूर्णानंद मिश्रा द्वारा नायब तहसीलदार रांझी, जबलपुर की उपस्थिति में पीड़िता का मरणासन्न कथन विधिवत लेखबद्ध कराया गया, जिसमें पीड़िता ने स्पष्ट रूप से आरोपी ओमकार पटैल द्वारा मिट्टी का तेल डालकर आग लगाने की घटना का उल्लेख किया।
इलाज के दौरान पीड़िता को पुनः जिला अस्पताल दमोह में भर्ती किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई थी
मेमो जांच एवं मृत्युकालीन कथन के आधार पर सहायक उपनिरीक्षक पूर्णानंद मिश्रा द्वारा आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 117/2017 धारा 354, 307, 450 भारतीय दंड संहिता एवं धारा 3(1)(ब)(i), 3(2)(v) एससी/एसटी एक्ट के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। विवेचना उपरांत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों, चिकित्सकीय प्रमाणों तथा मृतिका के मृत्युकालीन कथन को विश्वसनीय मानते हुए अभियोजन के तर्कों को स्वीकार किया। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपी का कृत्य न केवल हत्या है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को चोट पहुँचाने वाला घोर अपराध भी है।
इन्हीं आधारों पर न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाते हुए यह संदेश दिया कि कानून के समक्ष कोई भी अपराधी बख्शा नहीं जाएगा।







