—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*जंगल में बिछाया था मौत का जाल मड़ियादो में शिकारी पिता-पुत्र गिरफ्तार*
*एक क्विंटल मांस, जीवित कछुआ और बिहार से लाए गए ‘सुअर बम’ बरामद*
* बड़ी कार्रवाई: हटा वन विभाग ने घेराबंदी कर दो शिकारियों को दबोचा।
*क्रूरता की हद जंगली सुअर का शिकार कर बनाया था 100 किलो मांस*
*अंतर्राज्यीय कनेक्शन बिहार से चूड़ी बेचने वालों के जरिए मंगाए जाते थे घातक विस्फोटक*
*तस्करी का खुलासा जीवित कछुआ मिलने से वन्यजीव तस्करी के बड़े नेटवर्क का संदेह*
मड़ियादो/हटा मध्य प्रदेश के दमोह जिले के अंतर्गत हटा वन परिक्षेत्र में वन विभाग ने वन्यजीवों के शिकार के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। विभाग ने जंगल में मौत का जाल बिछाने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पिता और पुत्र को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से न केवल भारी मात्रा में जंगली जानवर का मांस मिला है, बल्कि जीवित वन्यजीव और घातक विस्फोटक भी बरामद हुए हैं।
घटना की शुरुआत तब हुई जब हटा वन परिक्षेत्र के बीटगार्ड हरीश तंतुवाय वन्यप्राणी गणना के दौरान मड़ियादो के जंगलों में गश्त कर रहे थे। उन्होंने दो व्यक्तियों को संदिग्ध अवस्था में कुछ भारी सामान ले जाते देखा। संदेह होने पर उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी परिक्षेत्र अधिकारी ऋषि तिवारी को दी। सूचना मिलते ही टीम ने मौके पर दबिश दी और घेराबंदी कर दोनों संदिग्धों को पकड़ लिया।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान दिलकिशन पारदी और उसके पुत्र भूपेंद्र पारदी के रूप में हुई है। ये दोनों भीलौनी टपरिया (थाना मड़ियादो) के निवासी हैं। पूछताछ में यह बात सामने आई है कि ये लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय थे।
आरोपियों की तलाशी लेने पर वन विभाग की टीम दंग रह गई। उनके पास से निम्नलिखित सामग्री जब्त की गई लगभग एक क्विंटल (100 किलो) जंगली सुअर का ताजा मांस। एक दुर्लभ प्रजाति का जीवित कछुआ, जिसे तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था।
भारी मात्रा में ‘देसी सुअर बम’। ये बम शिकार के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, जिन्हें जानवर के चबाते ही वे मुँह में फट जाते हैं। शिकार में प्रयुक्त होने वाले जाल, फंदे और अन्य धारदार हथियार।
**बिहार से जुड़े हैं तस्करी के तार**
आरोपियों ने पूछताछ में एक सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि शिकार के लिए इस्तेमाल होने वाले ये ‘देसी बम’ वे बिहार राज्य से मंगवाते थे। ये बम उनके उन रिश्तेदारों के माध्यम से यहाँ लाए जाते थे जो बिहार में चूड़ी बेचने का काम करते हैं। इन बमों का उपयोग न केवल जंगली जानवरों के लिए, बल्कि क्षेत्र में गोवंश को नुकसान पहुँचाने के लिए भी किया जा रहा था।
एसडीओ फॉरेस्ट एम.डी. माणिकपुरी ने बताया कि आरोपियों के विरुद्ध वन्य प्राणी अधिनियम 1972 की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, मौके से विस्फोटक बरामद होने के कारण पुलिस विभाग को अलग से पत्र लिखा गया है ताकि विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जा सके।
इस सफल ऑपरेशन में ऋषि तिवारी (परिक्षेत्र अधिकारी), जेपी दुबे (सहायक परिक्षेत्र अधिकारी), हरीश तंतुवाय (बीटगार्ड), कोमल सिंह राजपूत और यशवंत पांडे का विशेष योगदान रहा।














































