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*शासकीय अनुसूचित जनजातीय बालक छात्रावास नोहटा में हुआ व्यापक विकास*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*जिला संयोजक अदिति शांडिल्य की भूमिका और अथक प्रयास से*

*शासकीय अनुसूचित जनजातीय बालक छात्रावास नोहटा में हुआ व्यापक विकास*

*अधीक्षक अमोल सिंह ठाकुर की सतत मेहनत से बदली छात्रावास की तस्वीर, जिला संयोजक अदिति शांडिल्य के मार्गदर्शन में बच्चों को मिला सुरक्षित, अनुशासित व प्रेरणादायी वातावरण*

दमोह/नोहटा शासकीय अनुसूचित जनजातीय बालक छात्रावास नोहटा में बीते तीन वर्षों के दौरान उल्लेखनीय एवं सर्वांगीण विकास देखने को मिला है। इस सकारात्मक परिवर्तन का श्रेय छात्रावास के अधीक्षक अमोल सिंह ठाकुर की कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासनप्रियता एवं बच्चों के प्रति संवेदनशील सोच को जाता है, वहीं जिला संयोजक अदिति शांडिल्य का निरंतर मार्गदर्शन और प्रशासनिक सहयोग भी इस विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

इन दोनों के समन्वित प्रयासों से छात्रावास आज एक आदर्श आवासीय शैक्षणिक केंद्र के रूप में स्थापित हो सका है।

अधीक्षक अमोल सिंह ठाकुर के कार्यकाल में छात्रावास की व्यवस्थाएं केवल मूलभूत सुविधाओं तक सीमित न रहकर बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं नैतिक विकास पर केंद्रित रहीं। पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को खेल, मनोरंजन एवं रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से क्रिकेट, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, कैरम जैसी खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। नियमित खेल गतिविधियों से बच्चों में अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का विकास हो रहा है। बच्चों में सकारात्मक सोच और शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए छात्रावास की दीवारों पर प्रेरणादायक सुविचार, शैक्षणिक स्लोगन, महापुरुषों के विचार एवं नैतिक संदेश लिखवाए गए हैं।

इन दीवार लेखनों के माध्यम से बच्चों को प्रतिदिन सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है, जिससे उनका मनोबल सशक्त हुआ है। स्वास्थ्य एवं स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए छात्रावास में स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

साथ ही शासन द्वारा निर्धारित मेनू के अनुसार संतुलित एवं पौष्टिक भोजन नियमित रूप से बच्चों को उपलब्ध कराया जा रहा है। भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और समयबद्धता पर अधीक्षक द्वारा सतत निगरानी रखी जा रही है।

*जिला संयोजक अदिति शांडिल्य द्वारा समय-समय पर छात्रावास का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाती रही है।*

उनके मार्गदर्शन में बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं अनुशासन से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। उनका मानना है कि छात्रावास केवल आवास की व्यवस्था नहीं, बल्कि आदिवासी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है।

उनके सकारात्मक दृष्टिकोण और सक्रिय भूमिका से छात्रावास की कार्यप्रणाली और अधिक सुदृढ़ हुई है। इन सभी प्रयासों का असर बच्चों के व्यवहार और जीवनशैली में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। छात्रावास में निवासरत बच्चे स्वयं को सुरक्षित, संतुष्ट और प्रसन्न महसूस कर रहे हैं।

बच्चे अधीक्षक अमोल सिंह ठाकुर को स्नेहपूर्वक “मां साहब” कहकर संबोधित करते हैं, जो उनके और बच्चों के बीच बने आत्मीय संबंध का प्रतीक है। स्थानीय नागरिकों एवं अभिभावकों द्वारा भी छात्रावास में हुए इन सकारात्मक सुधारों की सराहना की जा रही है।

उनका कहना है कि वर्तमान में यह छात्रावास केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि अनुसूचित जनजातीय बच्चों के सर्वांगीण विकास और उज्ज्वल भविष्य को दिशा देने वाला एक सशक्त मंच बन चुका है।

निस्संदेह अधीक्षक अमोल सिंह ठाकुर के समर्पित प्रयासों और जिला संयोजक अदिति शांडिल्य के सतत मार्गदर्शन से यह छात्रावास आने वाले समय में और अधिक प्रगति करेगा तथा अनुसूचित जनजातीय वर्ग के बच्चों को शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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