—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*केन–बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी किसानों ने कलेक्टर को सौंपा आवेदन*
*“दमोह का विकास आदिवासियों के विनाश की कीमत पर हो रहा है”* 
हिंडोरिया से सुजात खान की रिपोर्ट
दमोह:जन संगठन एकता परिषद के नेतृत्व में बुधवार को केन–बेतवा लिंक परियोजना, पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन एवं जिला प्रशासन से प्रभावित आदिवासी किसानों ने दमोह कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर के नाम आवेदन पत्र सौंपा। कलेक्टर की अनुपस्थिति में यह आवेदन अपर कलेक्टर श्री गिरी गोस्वामी को दिया गया।
इस अवसर पर एकता परिषद के पूर्व राज्य समन्वयक सुजात खान ने बताया कि राज्य शासन द्वारा छतरपुर जिले में केन–बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत एक बड़े बांध का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी डूब क्षेत्र में पन्ना टाइगर रिजर्व की कुछ भूमि आ रही है। इस भूमि की भरपाई के लिए दमोह जिले के मड़ियादो क्षेत्र के जंगलों में आज़ादी के पूर्व से बसे आदिवासी गांवों की राजस्व भूमि को पीटीआर को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि अमझिर, भड़पुरा, घोघरा, घूरखेड़ा, ढूला, उदयपुरा, मनकपुरा, बछामा, कारीबरा, कलकुआं सहित अनेक गांवों के आदिवासी वर्षों से जिस भूमि पर काबिज हैं, उसी भूमि से उन्हें बेदखल करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में 19 दिसंबर 2025 को अपर कलेक्टर दमोह द्वारा एक पत्र भी जारी किया गया है, जिसमें उक्त भूमि को आदिवासियों से लेकर पन्ना टाइगर रिजर्व को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
सुजात खान ने कहा कि इन जमीनों पर रहने वाले आदिवासी वर्षों से अपने भू-स्वामी हक के पट्टे के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। उलटे समय-समय पर उन्हें हटाने के आदेश जारी किए जाते रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में चाहे नौरादेही अभ्यारण्य, पन्ना टाइगर रिजर्व का बफर जोन, केन–बेतवा लिंक परियोजना या फिर पर्यावरण संरक्षण के नाम पर नर्सरी निर्माण की बात हो—हर स्थिति में सबसे अधिक नुकसान आदिवासियों को ही उठाना पड़ रहा है।
सुजात खान ने कहा कि यह रवैया न केवल वंचित विरोधी है, बल्कि अमानवीय और अत्यंत चिंताजनक भी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “दमोह का विकास आदिवासियों के विनाश की कीमत पर किया जा रहा है।”
आदिवासी किसानों द्वारा सौंपे गए आवेदन पत्र में भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई को तत्काल रोकने, वर्षों से काबिज राजस्व भूमि पर भू-स्वामी अधिकार का पट्टा प्रदान करने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो एक व्यापक आंदोलन किया जाएगा। यह मुद्दा 22 दिसंबर 2025 को कलेक्टर के समक्ष हुई जिला समन्वय बैठक में भी उठाया जा चुका है।
इस दौरान बछामा पंचायत के उपसरपंच राधेलाल आदिवासी, सुंदर आदिवासी, प्यारेलाल आदिवासी, किसुन आदिवासी, सरजू आदिवासी, हाकम सिंह आदिवासी, लल्लू आदिवासी, पंचम आदिवासी, मोहन सिंह सहित कई ग्रामों के जिम्मेदार आदिवासी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।








