—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय झापन में गंभीर आरोप, वार्डन पर बच्चियों से मारपीट व प्रताड़ना के आरोप*
दमोह। जनपद शिक्षा केंद्र दमोह अंतर्गत संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय झापन एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। विद्यालय की वार्डन सविता प्रधान पर छात्रावास मुख्यालय पर नियमित रूप से उपस्थित न रहने, बच्चियों के साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में भी वार्डन सविता प्रधान पर बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार को लेकर शिकायतें हो चुकी हैं। बताया जा रहा है कि विगत दिनों एक बालिका के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई, जिससे उसका हाथ टूट गया। गंभीर बात यह बताई जा रही है कि उक्त बच्ची का उपचार शासकीय अस्पताल के बजाय एक निजी डॉक्टर से कराया गया, जिससे मामले को दबाने का प्रयास किया गया।
सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि बच्ची के परिजनों को संतुष्ट कर मामले को आपसी समझाइश के जरिए मैनेज कर लिया गया। छात्रावास में वार्डन का इतना भय बताया जा रहा है कि बच्चियां खुलकर अपनी बात रखने से भी डरती हैं।
पत्रकारों से भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार
स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, जब-जब मीडिया कर्मी छात्रावास पहुंचे, तब वार्डन का व्यवहार अमर्यादित और असहयोगात्मक रहा। इससे यह सवाल भी खड़े हो रहे हैं कि आखिर इतने गंभीर आरोपों के बावजूद संबंधित वार्डन के विरुद्ध ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
राजनीतिक संरक्षण या विभागीय अनदेखी?
क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि वार्डन को राजनीतिक संरक्षण या विभागीय स्तर पर संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। इसे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान माना जा रहा है।
डीपीसी से संपर्क का प्रयास असफल
मामले को लेकर जब जिला परियोजना समन्वयक (DPC) से उनका पक्ष जानने हेतु संपर्क किया गया, तो फोन रिसीव नहीं किया गया। विभागीय चुप्पी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
जांच की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच, बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय जैसी योजनाएं बालिकाओं के संरक्षण और शिक्षा के लिए बनाई गई हैं, ऐसे में इस प्रकार के आरोप अत्यंत चिंताजनक हैं।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या बच्चियों को न्याय मिल पाता है या नहीं
**वार्डन सविता प्रधान की मनमानी अब नहीं चलेगी**







