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*झलौन वन विभाग के सुरक्षित परिसर से सागौन की सिल्लियां चोरी, विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*झलौन वन विभाग के सुरक्षित परिसर से सागौन की सिल्लियां चोरी, विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल*

तेंदूखेड़ा (दमोह): मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ सुरक्षित माने जाने वाले वन विभाग के कार्यालय परिसर से ही कीमती सागौन की लकड़ी चोरी हो गई है।

झलौन वन परिक्षेत्र में हुई इस घटना ने विभागीय सुरक्षा और निगरानी तंत्र की पोल खोलकर रख दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपवन मंडल तेंदूखेड़ा के अंतर्गत आने वाले झलौन वन परिक्षेत्र कार्यालय के प्रांगण में सागौन की कीमती सिल्लियां रखी गई थीं।

इन सिल्लियों पर बाकायदा क्रमांक अंकित थे। बताया जा रहा है कि बीते तीन दिनों के भीतर अज्ञात चोरों ने क्रमांक 1 और क्रमांक 7 की दो सिल्लियों पर हाथ साफ कर दिया।

चोरी गई इन सिल्लियों की बाजार कीमत हजारों रुपये आंकी जा रही है।

हैरानी की बात यह है कि जिस परिसर से यह चोरी हुई है, वह कोई सुनसान इलाका नहीं है।

यहाँ रेंजर, डिप्टी रेंजर और कई अन्य वन कर्मचारी निवास करते हैं। रात के समय मुख्य गेट पर ताला भी लगाया जाता है और यह परिसर एक ‘वन डिपो’ के रूप में भी उपयोग किया जाता है।

इतने कड़े पहरे और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद चोरों का लकड़ी ले जाना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने कड़ी नाराजगी जताई है। क्षेत्र के निवासी संतोष सिंह, नीरज लोधी, मयंक और सोनू राय सहित अन्य लोगों ने कहा, “यदि विभाग अपने कार्यालय परिसर में रखी संपत्ति की रक्षा नहीं कर पा रहा, तो वह जंगलों में फैली करोड़ों की वन संपदा को शिकारियों और माफियाओं से कैसे बचाएगा?”

मामले के तूल पकड़ते ही उच्चाधिकारियों ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं:

डिप्टी रेंजर शंकर सिंह ठाकुर ने बताया कि वे वर्तमान में फील्ड पर हैं, लेकिन रेंजर के माध्यम से उन्हें चोरी की सूचना मिल चुकी है। बीट गार्डों को बुलाकर स्टॉक का मिलान किया जाएगा ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

तेंदूखेड़ा उपवनमंडल अधिकारी प्रतीक दुबे और दमोह वनमंडल अधिकारी ईश्वर जलांडे ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि इस मामले में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उससे न केवल लकड़ी की कीमत की वसूली की जाएगी, बल्कि उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

फिलहाल, विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि क्या यह किसी बाहरी गिरोह का काम है या इसमें विभाग के ही किसी भेदी का हाथ है।

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