—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
**वार्डन पर बच्चियों के निवाले में डाका डालने के गंभीर आरोप*
*आवासीय बालिका विद्यालय कुम्हारी की छात्राओं का थाने में अनशन, शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप*
दमोह।
दमोह जिले के जनपद शिक्षा केंद्र पटेरा अंतर्गत संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, कुम्हारी से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। विद्यालय में पदस्थ वार्डन पर छात्राओं के भोजन एवं मूलभूत सुविधाओं में अनियमितता बरतने के आरोप लगाते हुए आवासीय बालिकाओं ने सामूहिक रूप से पुलिस थाना पहुंचकर शांतिपूर्ण अनशन किया, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्यालय में वार्डन के पद पर पदस्थ सीता स्वामी तिवारी, जो मूलतः शिक्षिका हैं, पर आरोप है कि उन्होंने बीते लगभग दो वर्षों से छात्राओं को मिलने वाले भोजन एवं संसाधनों में कटौती की और शासन के नियमों की खुलेआम अनदेखी की।
सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में पूर्व में भी शिकायतें हुई थीं, लेकिन वे प्रभावी रूप से उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंच सकीं।
मंगलवार 26 जनवरी 2026 को मामला उस समय गंभीर हो गया जब छात्रावास में अध्ययनरत सभी बालिकाएं एकजुट होकर पुलिस थाना कुम्हारी पहुंचीं और वहां अनशन पर बैठ गईं।
बालिकाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें नियमित रूप से भरपेट भोजन नहीं दिया जाता, और शिकायत करने पर डराया-धमकाया जाता है। नन्ही छात्राओं के इस साहसिक कदम ने प्रशासन और समाज दोनों को झकझोर कर रख दिया
घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश देखने को मिला। लोगों ने सवाल उठाया कि जब शासन बालिकाओं की शिक्षा, पोषण और सुरक्षा के लिए विशेष योजनाएं चला रहा है, तब जमीनी स्तर पर ऐसी लापरवाही कैसे हो रही है।
विभाग हरकत में, वार्डन हटाई गई
मामले की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग सक्रिय हुआ। डी पी सी मुकेश द्विवेदी ने बताया कि —
सूचना मिलते ही मैं तत्काल दमोह से कुम्हारी रवाना हुआ। प्रारंभिक जांच के बाद सीता स्वामी तिवारी को वार्डन पद से हटाकर जिला शिक्षा केंद्र, दमोह में अटैच कर दिया गया है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार विभागीय स्तर पर आंशिक फेरबदल भी किया गया है। बताया जा रहा है कि
सीता स्वामी तिवारी को राजाबंदी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय भेजा गया है,
जबकि वहां पदस्थ कल्पना पटेल को राजाबंदी से कुम्हारी स्थानांतरित किया गया है।
हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।
इस संबंध में जब छात्रावास की पूर्व वार्डन सीता स्वामी तिवारी से चर्चा की गई तो उन्होंने आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा—
विभाग के ही कुछ लोग बच्चियों को बहला-फुसलाकर इस प्रकार के आरोप लगवा रहे हैं। मैं विगत दो वर्षों से पदस्थ हूं, आज तक कोई आरोप नहीं आया। छात्रावास में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनसे सच और झूठ स्पष्ट हो जाएगा। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, मैं उन्हें स्वीकार करूंगी।
यह प्रकरण अब पूरे जिले में जनचर्चा का विषय बन चुका है। लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल सभी की निगाहें विभागीय जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।







