—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*दमोह में अस्थि यात्रा के दौरान बवाल कलेक्ट परिसर छावनी में तब्दील रहा*
**बैरिकेड टूटे, पुलिस-प्रदर्शनकारी आमने-सामने; पत्रकारों से मारपीट के बाद मामला गरमाया**


दमोह। पन्ना जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र निवासी महेन्द्र सिंह लोधी की कथित आत्महत्या के विरोध में बुधवार को दमोह जिला मुख्यालय पर बड़ा और तनावपूर्ण प्रदर्शन देखने को मिला। लोधी समाज और ओबीसी महासभा के बैनर तले निकाली गई अस्थि यात्रा कलेक्ट्रेट पहुंचते ही उग्र हो गई। प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़े गए, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए तथा पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना भी सामने आई।
घटनाक्रम ने न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि आंदोलन की दिशा और उद्देश्य को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं
मृतक महेन्द्र सिंह लोधी के परिजनों का आरोप है कि पूर्व में रनेह क्षेत्र में उनके साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की घटनाएं हुई थीं। उनका कहना है कि लगातार दबाव और अपमान से आहत होकर उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
परिजनों ने संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और आर्थिक सहायता की मांग की है। मामले को लेकर समाज में आक्रोश व्याप्त है।
न्याय की मांग को लेकर समाज के लोगों ने मृतक की अस्थियां लेकर अस्थि यात्रा निकाली। यात्रा में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और युवा शामिल हुए। शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए यह यात्रा कलेक्ट्रेट पहुंची।
कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। नर्स नीलिमा यादव के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पहले से कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग की थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ के एक हिस्से ने अचानक बैरिकेड हटाकर परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की।
इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो धक्का-मुक्की में बदल गई। हंगामे के बीच कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। अतिरिक्त बल बुलाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया।
हालांकि कुछ समय बाद मृतक के परिजन और प्रतिनिधि मंडल के सदस्य शांतिपूर्वक धरने पर बैठ गए और प्रशासन से वार्ता की मांग करने लगे।
तनावपूर्ण हालात को देखते हुए कलेक्टर कक्ष की ओर जाने वाले गेट बंद कर दिए गए। सुरक्षा कारणों से प्रदर्शनकारियों को अंदर प्रवेश नहीं दिया गया।
कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों को भी प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने से रोका गया। इससे मीडिया कर्मियों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना था कि वे केवल अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे थे।
मौके पर मौजूद पत्रकारों के अनुसार, भीड़ में शामिल कुछ व्यक्तियों ने कवरेज को लेकर आपत्ति जताई। बहस के दौरान स्थिति बिगड़ी और दो पत्रकारों के साथ अभद्रता व हाथापाई की घटना हुई।
घटना के बाद पत्रकारों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
पत्रकारों की शिकायत पर दमोह सिटी कोतवाली में नामजद व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जाएगी और कानून-व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या आंदोलन पूरी तरह न्याय की मांग तक सीमित था या कुछ तत्वों ने इसे राजनीतिक स्वर देने की कोशिश की।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि भीड़ और आयोजकों के बीच समन्वय की कमी रही, जिससे स्थिति अनियंत्रित हुई।
घटना से नाराज पत्रकारों ने 13 फरवरी को नोहटा में आयोजित नोहलेश्वर महोत्सव में शामिल होने आ रहे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम की कवरेज का सामूहिक बहिष्कार करने की घोषणा की है।
फिलहाल शहर में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस सतर्क है और प्रशासन मामले की मॉनिटरिंग कर रहा है।
एक ओर पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है, वहीं पत्रकारों के साथ हुई घटना ने लोकतांत्रिक अधिकारों और मीडिया सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आने वाले दिनों में जांच की दिशा और प्रशासनिक कार्रवाई ही तय करेगी कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।










