—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*फर्जी पत्रकार बन सोशल मीडिया पर जातिगत संघर्ष के नाम पर राजनीति चमकाने का प्रयास हुआ असफल*
दमोह नगर के कलेक्ट्रेट कार्यालय में बुधवार को आत्महत्या मामले में पीड़ित परिवार के लिए न्याय मांगने पहुंचे लोगों में शामिल असामाजिक तत्वों की करतूत सभी के सामने आने लगी है।
हालात यह है कि आमजन भी इन सभी को नकारते हुए खुलकर इनका विरोध जता रहे है। जिले के आमजनों को दमोह के पत्रकार जगत की ओर से इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी के साथ इन असामाजिक तत्वों के झूठ और फर्जी नैरेटिव से अवगत कराया जा रहा है।
1. पत्रकार वह नहीं हम है…
सबसे पहले यह समझ ले कि जो कथित लोग अपनी सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल पर खुद के साथ पत्रकार लिख रहे है वह पत्रकार नहीं है, क्योंकि वह पत्रकारिता के मापदंड पूरा नहीं करते।
ऐसे व्यक्ति फेसबुक यूट्यूब पर लाइव वीडियो चलाकर राजनीतिक लोगों से वित्त पोषित होकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकते है और एजेंडे को चलाते है। जबकि पत्रकारिता और खबरों के लिए कुछ अनिवार्य तत्व होते है, जिनका पालन हमें करना होता है उन्हें उसका कोई ज्ञान ही नहीं है। ये स्वयंभू पत्रकार है।।
2. तथाकथित लोग पूरे दिन से चाहते थे विवाद…
कलेक्ट्रेट परिसर के घटनाक्रम में जहां पहले असामाजिक तत्वों ने ही भीड़ को उकसाते हुए उन्हें बैरिकेटिंग तोड़कर अन्दर जाने के लिए बोला ताकि हालात बिगड़े लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इस दौरान ये तथाकथित पत्रकार लगातार सोशल मीडिया पर लाइव चलाकर तैयार थे, ताकि अप्रिय स्थिति का राजनीतिक फायदा उठाया जा सके। परिसर में भी इनके द्वारा लगातार मीडियाकर्मियों पर छींटाकसी करते हुए उकसाया जा रहा था और यह किसी भी हालत में पत्रकारों को पीड़ित परिवार के सदस्यों से चर्चा करने से रोकना चाहते थे। इस दौरान इनके द्वारा पत्रकारों को बार बार अभद्र तरीके से दूर हटने को कहा गया, जिसके बाद विवाद के हालात बने..
3. पत्थरबाजी की बात को छिपा रहे..
विवाद के दौरान इन सभी लोगों ने हाथापाई के साथ विवाद किया और अपने लाइव में अपने हिसाब से कमेंट्री करते हुए नेरेटिव गढ़ने का प्रयास करते रहे।
जब इन्होंने अभद्र बात बोली तब इनके द्वारा अपना लाइव वीडियो म्यूट किया गया। जब पत्रकार भी विरोध स्वरूप सामने आए तो इनके द्वारा बड़ी चालाकी से अपने अन्य लोगों से पत्थरबाजी कराई गई ताकि वहां मौजूद पत्रकारों के साथ प्रदर्शनकारी भी घायल हो जाएं और यह मामले को नया तूल दे सकें।
इससे समझा जा सकता है कि इन असामाजिक तत्वों ने अपने लोगों की सुरक्षा से भी समझौता अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए कर लिया। एक लाइव में एक तथाकथित खुद कह रहा है कि वह गिर गया है लेकिन यह उसे मारपीट का शिकार बता रहे है। ऐसे में इनका झूठ खुद ही सामने आ जाता है।
4. वर्ग संघर्ष के नाम पर झूठी बातें…
इस घटनाक्रम के बाद इन लोगों के द्वारा एक वर्ग विशेष के नाम लिखकर यह नैरेटिव बनाने का प्रयास किया गया कि उनके द्वारा इस प्रदर्शन को खराब किया गया।
जबकि हकीकत यह है कि इनकी मारपीट और अभद्रता का शिकार वहां मौजूद हर वर्ग का पत्रकार हुआ है। विवाद के दौरान ऐसे असामाजिक तत्वों का विरोध वहां मौजूद हर वर्ग, हर जाति के पत्रकारों ने किया है। जिसमें दलित, ओबीसी, सामान्य सभी वर्गों के लोग शामिल थे। इनकी मारपीट का शिकार हमारे एक अनुसूचित जाति के पत्रकार साथी भी हुए है जिनके द्वारा आरोपियों पर मामला भी दर्ज कराया गया है। इसके अलावा ओबीसी के साथ खुद लोधी जाति के पत्रकारों ने भी इनकी हरकत का विरोध जताया है।
इसलिए इसे स्वर्ण समाज से जोड़ा जाना पूर्णतः मक्कारी की श्रेणी में आता है।
5. पत्रकारों ने ही लड़ी न्याय की लड़ाई…
इस पूरे घटनाक्रम में कुछ राजनीतिक और जातिवादी लोग इसे न्याय की लड़ाई की हार बता रहे है।
ऐसे लोगों को हम दमोह के पत्रकार गर्व से यह कहते है कि पूरे मामले में न्याय के लिए हम ही आगे रहे। पूर्व में वायरल वीडियो को खबरों के माध्यम से हमने ही जनजन तक और प्रशासन तक पहुंचाया जिसपर कार्यवाही हुई। आत्महत्या की घटना पन्ना जिले में होने के चलते हमारे कार्यक्षेत्र से बाहर थी।
लेकिन जैसे ही परिवार के लोग जिले में आए हमने खबरों के माध्यम से घटनाक्रम को दिखाना शुरू किया।
विवाद और मारपीट की घटना के पूर्व बनाई गई और प्रसारित खबरों पर हमने स्पष्ट रूप से पीड़ित परिवार के लिए आवाज उठाते हुए स्थितियों को दिखाना शुरू किया था और प्रशासन से सवाल भी किए थे।
जबकि एक तथाकथित जातिवादी पत्रकार ने अपनी विरोध के डाली गई पोस्ट में खुद ही यह लिखकर की “उनका मूवमेंट असफल हो गया” यह सिद्ध कर दिया कि वह न्याय के लिए नहीं बल्कि अपना एजेंडा पूरा करने के लिए मूवमेंट चला रहे थे।
6. व्यवस्थाओं का सम्मान…
इस पूरे घटनाक्रम में व्यवस्थाओं का सम्मान दमोह के पत्रकार जगत ने ही दिखाया है। घटना पर उचित मंच पर नाराजगी और उचित तरीके से विरोध दर्ज कराया गया है.. पत्रकारिता के मापदंडों का पालन सुनिश्चित करते हुए सोशल मीडिया पर वाणी और लेखनी का संयम रखा है, शासन प्रशासन को धमकाने का प्रयास भी फर्जी पत्रकारों और राजनीतिक महत्वाकांक्षी लोगों की तरह हमने नहीं किया। इसके अलावा शासन प्रशासन के जिम्मेदार व्यक्तियों के लिए अनुचित शब्दों के उपयोग से परहेज रखते हुए, संवैधानिक और कानूनी मर्यादाओं को भी हमने इस दौरान त्यागा नहीं है…
क्योंकि हम पत्रकार है ना कि किसी एजेंडे या किसी पार्टी के लिए सोशल मीडिया पर कार्य करने वाले असामाजिक तत्व, जो हमसे सिर्फ इसलिए डरे हुए है कि असली मीडिया उनका एजेंडा पूरा नहीं होने देती।
और अंततः हम तुम्हारे जैसे कायर नहीं है, बस देश के प्रति जिम्मेदारी समझते है..
इस सबके बीच हमारे आम नागरिकों को बिंदुओं से अवगत कराते हुए अराजक तत्वों को यह स्पष्ट करा देते है कि हम तुम्हारे जैसे कायर नहीं है जो खुद को बचाने के लिए मासूम भीड़ का सहारा लेते है ना या सड़कछाप पोस्ट या वीडियो डालकर खुद को डिफेंड करने का प्रयास करें। हम जिम्मेदार है इसलिए देश और समाज के लिए अपनी जिम्मेदारी समझते है
और व्यवस्थाओं को बनाए रखते हुए अराजकता से दूर रहना चाहते है। बरना हम हर स्थान और हर मौके पर जाकर खड़े होते है और किसी सड़कछाप की हिम्मत नहीं है कि हमारे पत्रकारों का अहित कर सके.. यदि ऐसा सोचा भी तो फिर स्थितियां हम खुद तय कर लेंगे…?







