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*दमोह में खुला एएसआई का उप-मंडल कार्यालय, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को मिलेगी नई गति*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज दमोह—

*दमोह में खुला एएसआई का उप-मंडल कार्यालय, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को मिलेगी नई गति*

दमोह | 12 मार्च 2026
जिले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का उप-मंडल कार्यालय शुरू होने से अब दमोह की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा मिलेगी। अब तक पुरातत्व से जुड़े कार्यों और फाइलों के लिए अधिकारियों को जबलपुर जाना पड़ता था, जिससे काफी समय लगता था। लेकिन अब जिले में ही कार्यालय उपलब्ध होने से प्रक्रियाएं अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएंगी।

यह बात प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, जबलपुर मंडल के अंतर्गत दमोह में उप-मंडल कार्यालय के उद्घाटन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि दमोह जिला विरासत और पुरातत्व की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिले में नोहटा का शिव मंदिर, कोडल का प्राचीन शिव मंदिर, बांदकपुर धाम और कुंडलपुर धाम जैसे कई ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल मौजूद हैं। ऐसे में एएसआई के उप-मंडल कार्यालय के खुलने से इन धरोहरों के संरक्षण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाएगी।

राज्यमंत्री श्री लोधी ने बताया कि जिले के ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। नोहटा क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए डिवाइडर और सौंदर्यीकरण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही रानी दमयंती के किले का लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार कराया जाएगा, जहां लाइट एंड साउंड शो की भी व्यवस्था प्रस्तावित है।

विधायक जयंत मलैया ने कहा कि एएसआई के लिए पुराने गिरजाघर भवन का उपयोग किया जा रहा है, जो एक अच्छा और उपयोगी निर्णय है। उन्होंने इसके लिए कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर की सराहना करते हुए कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र पांचवीं से आठवीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध है। एएसआई कार्यालय शुरू होने से इन धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ ऐसे स्थानों का भी पता लगाया जा सकेगा जो अभी तक व्यापक रूप से सामने नहीं आ पाए हैं। उन्होंने कहा कि इससे न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को बल मिलेगा बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और आने वाले समय में दमोह एक महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सकता है।

भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे ने कहा कि एएसआई का कार्यालय खुलने से जिले की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण कार्य को गति मिलेगी और दमोह को इसका सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी पहल से दमोह जैसे ऐतिहासिक जिले को यह महत्वपूर्ण सौगात मिली है। उन्होंने बताया कि जिले के गांव-गांव में अनेक प्राचीन मठ, मंदिर और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जो वर्तमान में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। ऐसे स्थलों का संरक्षण और पुनरुद्धार अत्यंत आवश्यक है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षण पुरातत्वविद् शिवाकांत बाजपेयी ने बताया कि जिस भवन में कार्यालय स्थापित किया गया है वह ब्रिटिश काल की पुरानी इमारत है। पहले इसका उपयोग चर्च के रूप में किया जाता था, लेकिन पिछले कई वर्षों से यह परित्यक्त अवस्था में पड़ा हुआ था और इसका कोई उपयोग नहीं हो रहा था। स्थानीय स्तर पर इस भवन को ‘गिरजाघर’ के नाम से जाना जाता है।

उन्होंने बताया कि दमोह में एएसआई के उप-मंडल कार्यालय की स्थापना से जिले के राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारकों की देखरेख और संरक्षण कार्यों में काफी सुविधा मिलेगी। अभी तक इन स्मारकों का संचालन सागर उप-मंडल कार्यालय के माध्यम से किया जाता था, लेकिन अब दमोह में अलग कार्यालय होने से पुरातात्विक गतिविधियों को गति मिलेगी और स्मारकों की सुरक्षा व रखरखाव बेहतर ढंग से हो सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के 14 संरक्षित स्मारक स्थित हैं और नए कार्यालय के शुरू होने के बाद क्षेत्र में सर्वेक्षण कार्य भी तेज किए जाएंगे।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल, कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, डॉ. आलोक गोस्वामी, भरत यादव, हरिशचंद्र पटेल (गुड्डू पटेल), संतोष रोहित, कृष्णा पटेल, गौरव पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आलोक सोनवलकर ने किया।

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