स्मार्ट मीटर पर दमोह के नागरिकों की चिंताएँ और विद्युत विभाग का स्पष्टीकरण
दमोह में स्मार्ट मीटर को लेकर लगातार शिकायतें आ रही हैं, जिसके जवाब में कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर के निर्देश पर एक मीडिया कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण कंपनी, सुभाष कुमार नागेश्वर, और मुख्य अभियंता, एम.एल. साहू, उपस्थित थे ताकि स्मार्ट मीटर से जुड़ी आम जनता की भ्रांतियों को दूर किया जा सके।
स्मार्ट मीटर के फायदे:
अधीक्षण अभियंता नागेश्वर ने बताया कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को अपनी बिजली की खपत प्रतिदिन, साप्ताहिक और मासिक आधार पर देखने की सुविधा प्रदान करते हैं। इससे उपभोक्ता अपनी संभावित बिल का पूर्वानुमान लगा सकते हैं और अपनी खपत को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि स्मार्ट मीटर लगभग एक साल से लगे हुए हैं और शुरुआती 25-26 हजार मीटरों में कोई खास समस्या नहीं आई थी।
गलत रीडिंग और स्मार्ट मीटर का उद्देश्य:
नागेश्वर ने स्वीकार किया कि कुछ मीटर रीडरों द्वारा गलत रीडिंग या मनमानी रीडिंग नोट की जा रही थी। विभाग की जांच में लगभग 4500 ऐसे उपभोक्ता पाए गए जहाँ रीडिंग सही नहीं थी। ऐसे उपभोक्ताओं के मीटर बदले गए और स्मार्ट मीटर लगने के बाद ही सही खपत का पता चला, जिसका डेटा विद्युत विभाग के पास उपलब्ध है। उन्होंने जोर दिया कि स्मार्ट मीटर का उद्देश्य सही खपत का पता लगाना और उपभोक्ताओं को अपनी बिजली के उपयोग पर अधिक नियंत्रण देना है। उपभोक्ता अपने घर का लोड भी स्मार्ट मीटर पर ‘KW’ देखकर जांच सकते हैं।
ऊर्जा दक्षता और भविष्य की पहलें:
कार्यपालिक अभियंता एम.एल. साहू ने ऊर्जा-कुशल उपकरणों के उपयोग और प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना के लाभों पर भी प्रकाश डाला, जिससे उपभोक्ता स्वयं बिजली पैदा करके ग्रिड को दे सकते हैं और लाभ उठा सकते हैं।
मुख्य चिंताएँ जो अभी भी बनी हुई हैं:
* निरक्षर नागरिकों के लिए चुनौतियाँ: यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि अनपढ़ आम नागरिक स्मार्ट मीटर की रीडिंग या ‘दक्षता ऐप’ का उपयोग कैसे कर पाएंगे और किसी भी शिकायत के लिए उन्हें कहाँ जाना चाहिए।
* पुराने मीटरों की वैधता: यदि पुराने मीटर वैध नहीं थे, तो उन्हें पहले क्यों लगवाया गया था?
यह सवाल उठ रहा है कि क्या पुराने मीटरों से एकत्र की गई रीडिंग विश्वसनीय थी।
* मीटर रीडरों का भविष्य: हजारों मीटर रीडरों के रोजगार का क्या हुआ, जिन्होंने बरसों तक विभाग के लिए काम किया? उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर इसका क्या प्रभाव पड़ा है, और विभाग ने उन्हें वैकल्पिक रोजगार क्यों नहीं दिया?
* पारदर्शिता पर सवाल: मीडिया कार्यशाला आयोजित करने से पहले क्या विद्युत विभाग ने पत्रकारों के साथ इसके पहले कभी कोई बैठक क्यों नहीं की?
यह पारदर्शिता की कमी पर सवाल खड़े करता है।
कुछ प्रश्न जो इन चिंताओं को और स्पष्ट कर सकते हैं:
* निरक्षर उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर की जानकारी तक पहुँच और शिकायत निवारण प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए विद्युत विभाग क्या विशेष कदम उठा रहा है?
* पुराने मीटरों से एकत्र किए गए डेटा की सटीकता के बारे में विद्युत विभाग का क्या रुख है, और क्या उन अवधियों के बिलों की समीक्षा की जाएगी?
* विद्युत विभाग उन हजारों मीटर रीडरों के लिए क्या पुनर्वास योजना बना रहा है, जिन्होंने अपनी नौकरी खो दी है?
*साहब आप चाहे कितनी ही सफाई दें पर आम जनता पर जो बीत रही है उसका ध्यान सरकार शासन प्रशासन को रखना चाहिए
*आम लोगों के आ रहे अत्यधिक गलत बिजली के बिलों में क्या सुधार किया जाएगा आम नागरिक बिजली के बिलों से काफी परेशान है विगत दिनो पहले एक बुजुर्ग ने आत्महत्या कर ली थी बिल अधिक आने के कारण*
यह स्पष्ट है कि दमोह में स्मार्ट मीटर को लेकर अभी भी कई अनुत्तरित प्रश्न और चिंताएँ हैं, खासकर आम नागरिकों और विस्थापित मीटर रीडरों के संबंध में।













































