—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*दमोह जिले की एक बहुत ही अनोखी और भावनात्मक घटना*
*दमोह जिला न्यायालय परिसर में गूंजी किलकारी परिजनों ने कहा बच्चे का नाम रखेंगे वकील*
दमोह जिला न्यायालय की है, जहाँ एक महिला अपने पति से मिलने की उम्मीद में आई थी, लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी बनीं कि उसे वहीं अपने बच्चे को जन्म देना पड़ा।
महिला का नाम निशा वंशकार है। निशा के पति, कैलाश, पिछले तीन महीनों से जेल में बंद हैं।
मंगलवार को कैलाश की न्यायालय में पेशी (सुनवाई) थी। निशा अपने पति से मिलने और कार्यवाही देखने के लिए जिला न्यायालय पहुँची थी।
तभी अचानक शुरू हुई प्रसव पीड़ा न्यायालय परिसर में इंतज़ार के दौरान ही निशा को अचानक तीव्र प्रसव पीड़ा (Labor Pain) शुरू हो गई। अस्पताल जाने का समय न मिलने के कारण स्थिति काफी गंभीर हो गई थी।
*दमोह जिला न्यायालय अधिवक्ताओं (वकीलों) ने मानवता पेश की*
परिसर में मौजूद वकीलों ने जब महिला की हालत देखी, तो उन्होंने तुरंत संवेदनशीलता दिखाई वकीलों ने मौके पर मदद जुटाई और प्रसव में सहायता की।
परिसर में ही महिला ने एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया।
इसके तुरंत बाद, वकीलों ने एम्बुलेंस बुलाकर जच्चा-बच्चा को सुरक्षित जिला अस्पताल पहुँचाया।
वकीलों द्वारा की गई इस निस्वार्थ मदद से महिला का परिवार इतना प्रभावित हुआ कि उन्होंने एक यादगार फैसला लिया महिला की भाभी, रजनी वंशकार ने बताया कि वकीलों की मदद के सम्मान में उन्होंने बच्चे का नाम ‘वकील’ रखने का निर्णय लिया है।
परिजनों का कहना है कि न्यायालय में बच्चे का जन्म होना एक ऐतिहासिक और दुर्लभ घटना है, इसलिए वे इस नाम के जरिए इस दिन को याद रखना चाहते हैं।
जब परिजनों से पूछा गया कि क्या वे बच्चे को बड़ा होकर वकील ही बनाएंगे, तो उन्होंने बहुत ही परिपक्व जवाब दिया। उन्होंने कहा कि— “बच्चा बड़ा होकर क्या बनेगा, इसका फैसला उसके माता-पिता ही करेंगे।”
येयह खबर न्याय के मंदिर में मानवता की एक सुंदर मिसाल पेश करती है, जहाँ कानून के जानकारों ने एक परिवार की संकट के समय में मदद की।
वर्तमान में माँ और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं।
परिजनों ने वकीलों की खूब की सराहना और वकीलों ने भी बच्चे को आशीर्वाद प्रदान किया l









