—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*घर में घुसकर हमला और कब्जे का प्रयास*
*पुलिस की शिथिलता पर भड़का हिंदू संगठनों का गुस्सा*
दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में कानून व्यवस्था को लेकर उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब एक स्थानीय भाजपा नेता के घर पर दबंगों द्वारा जानलेवा हमला और संपत्ति पर कब्जे की कोशिश की गई।
पुलिस द्वारा मामले में तत्काल कार्रवाई न किए जाने से आक्रोशित ब्राह्मण समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों ने सड़कों पर उतरकर भारी विरोध प्रदर्शन किया।
मिली जानकारी के अनुसार, शहर के टंडन बगीचा क्षेत्र के निवासी और भाजपा नेता चंद्रशेखर उपाध्याय रविवार को अपने घर पर थे। तभी टंडन पेट्रोल पंप पर कार्यरत कासिम खान अपने 8 से 10 साथियों के साथ उनके घर में जबरन घुस आया।
आरोपियों ने घर में जमकर तोड़फोड़ की और परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट करते हुए घर खाली करने की धमकी दी।
***परिवार जनों ने घटना की वीडियो बनाई और सोशल मीडिया पर वायरल भी की उसके बाद भी कारवाही नहीं गज़ब***
घटना के दौरान किसी ने डायल 112 को सूचना दी, लेकिन आरोप है कि पुलिस के जाते ही हमलावरों ने दोबारा घर पर धावा बोल दिया और उत्पात मचाया।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब वे शिकायत दर्ज कराने दमोह कोतवाली पहुँचे, तो पुलिस ने घंटों तक मामले को टाला और प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की। हालांकि पुलिस ने दो संदेहियों को हिरासत में लिया था, लेकिन उन पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही थी।
पुलिस के इसी ढुलमुल रवैये को देख ब्राह्मण समाज और हिंदू संगठनों का धैर्य जवाब दे गया।
नाराज प्रदर्शनकारियों ने सोमवार शाम पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय के सामने जुटना शुरू किया और सड़क जाम कर दी। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आरोपियों के खिलाफ तुरंत सख्त धाराओं में मामला दर्ज हो।
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस प्रशासन ने आनन-फानन में एफआईआर दर्ज करने का लिखित आश्वासन दिया, तब जाकर प्रदर्शन खत्म हुआ।
सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, इस विवाद की दो मुख्य वजहें सामने आ रही हैं कि मकान का मामला वर्तमान में सिविल कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन आरोप है कि पेट्रोल पंप संचालक इसे जबरन कब्जाना चाहता है।
बताया जा रहा है कि चंद्रशेखर उपाध्याय ने ‘सीता नगर बड़ी शाला’ में हुए करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की शिकायत उच्च जांच एजेंसियों से की थी।
शिकायत वापस लेने के लिए उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही थीं और यह हमला उसी दबाव की राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कोतवाली में फिर हुई झड़प मामला तब और गरमा गया जब कोतवाली में मौजूद भीड़ ने उन दो आरोपियों को देख लिया जिन्हें पुलिस ने हिरासत में नहीं लिया था।
आक्रोशित लोगों ने वहीं पर आरोपियों की धुनाई कर दी, जिसके बाद पुलिस कर्मियों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें भीड़ से बचाकर अंदर किया।
फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।









