*बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड मामले में 7 आरोपियों को आजीवन कारावास और 18 आरोपी बरी*
*लगभग पांच साल बाद सुनाया 150 पन्नों का ऐतिहासिक फैसला*
*हाई कोर्ट न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय*
*पथरिया पूर्व विधायक के परिजनों की अहम भूमिका* 
दमोह/जबलपुर। मध्यप्रदेश के सबसे चर्चित और रसूख की लड़ाई कहे जाने वाले देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में बुधवार को न्यायपालिका का सबसे बड़ा फैसला सामने आया।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे की युगलपीठ ने इस बहुचर्चित मामले में अपना अंतिम निर्णय सुनाते हुए सात दोषियों की आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा को यथावत रखा है।
वहीं, मामले में अन्य 18 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त (बरी) कर दिया गया है।
यह फैसला न केवल दमोह की राजनीति बल्कि प्रदेश की कानूनी नजीर के तौर पर देखा जा रहा है।
सात दोषियों के खिलाफ मिले सबूत अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सात आरोपियों के विरुद्ध पेश किए गए चश्मदीद गवाह, मेडिकल रिपोर्ट और घटनास्थल की परिस्थितियां एक-दूसरे से पूरी तरह मेल खाती हैं।
अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि इन सात लोगों ने सुनियोजित तरीके से घातक हथियारों से हमला किया था।
आजीवन कारावास भुगतने वाले दोषियों के नाम
* चंदू सिंह
* गोविंद सिंह
* श्रीराम शर्मा
* लोकेश सिंह
* इंद्रपाल सिंह
* गोलू सिंह
* अमजद खान
इन सभी की अपीलों को हाईकोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि निचली अदालत का फैसला इन सातों के संदर्भ में तर्कसंगत और साक्ष्यों पर आधारित है।
18 आरोपियों की रिहाई कानून से इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू 18 आरोपियों का एक साथ बरी होना हाईकोर्ट ने पाया कि दमोह की निचली अदालत ने सभी 25 आरोपियों को एक ही चश्मे से देखा था, जबकि उच्च न्यायालय ने प्रत्येक आरोपी की भूमिका का सूक्ष्म विश्लेषण किया।
बरी होने वाले 18 आरोपी जो न्यायालय के आदेशानुसार रामबाबू, प्रदीप, संदीप, यशपाल सिंह, नरेंद्र सिंह, धर्मेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, उपेंद्र सिंह, दिलीप सिंह, महेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, शैलेंद्र सिंह, विकास, आकाश, अंकित और शुभम को तत्काल रिहा करने या उनके बांड खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं।
बरी होने के तीन मुख्य कारण पहचान का अभाव कई गवाहों ने शिनाख्त परेड के दौरान इन 18 लोगों की सटीक पहचान नहीं की थी।
विरोधाभासी बयान के द्वारा चश्मदीदों ने पुलिस को दिए बयान और कोर्ट में दी गई गवाही में इन आरोपियों के नाम और हथियारों को लेकर अलग-अलग बातें कहीं।
तकनीकी साक्ष्य और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और टावर लोकेशन इन 18 आरोपियों की घटना में प्रत्यक्ष संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए।
दमोह के हटा से 15 मार्च 2019 वो खौफनाक दोपहर जिसने हटा को दहला दिया
तारीख थी 15 मार्च 2019, समय दोपहर के करीब 1:30 बजे।
हटा स्थित चौरसिया आयरन प्लांट में सन्नाटा था, जिसे अचानक चीखों और हथियारों की आवाज ने तोड़ दिया।
कांग्रेस के कद्दावर नेता और व्यवसायी देवेंद्र चौरसिया पर हमलावरों की एक बड़ी भीड़ ने हमला बोल दिया। लाठी, डंडे और धारदार हथियारों से हुए इस हमले में चौरसिया लहूलुहान होकर गिर पड़े।
उन्हें जबलपुर ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
यह केवल एक हत्या नहीं थी, बल्कि इसने तत्कालीन कमलनाथ सरकार और विपक्षी खेमे के बीच एक बड़ा राजनीतिक युद्ध छेड़ दिया था।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां सर्वोच्च अदालत ने मध्य प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के कड़े निर्देश दिए थे।
दमोह की विशेष अदालत ने साल 2022 में इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी 25 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद सभी आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। लगभग तीन साल तक चली सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अब हाईकोर्ट ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है।
दमोह के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष नागाइच ने कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा, न्याय में देरी हुई लेकिन सत्य की जीत हुई।
न्यायालय ने साक्ष्यों की कसौटी पर परखने के बाद ही यह निर्णय लिया है।
दमोह का सियासी पारा गरम मामले को लेकर गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है
फैसला आते ही दमोह और हटा के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
देवेंद्र चौरसिया के समर्थकों ने जहां 7 दोषियों की सजा बरकरार रहने को ‘आधा न्याय’ बताया है, वहीं बरी हुए 18 लोगों के समर्थकों ने इसे ‘सत्य की जीत’ करार दिया है।
सुरक्षा के लिहाज से हटा में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। एसपी दमोह ने जनता से अपील की है कि फैसले का सम्मान करें और शांति बनाए रखें।
सोशल मीडिया की सेल (IT Cell) हर पोस्ट पर नजर रख रही है।
**जय हिंद जय भारत जय संविधान**









