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*बुंदेली महोत्सव में मडियादो छात्रावास की बालिकाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समाज को दिया सशक्त संदेश*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*बुंदेली महोत्सव में मडियादो छात्रावास की बालिकाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समाज को दिया सशक्त संदेश*

*कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास राजपुरा की छात्राओं ने नारी शक्ति, सामाजिक कुरीतियों और लोकसंस्कृति को किया जीवंत*

दमोह/मड़ियादो।
दमोह में आयोजित भव्य बुंदेली महोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर उस समय विशेष आकर्षण देखने को मिला, जब कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास, राजपुरा (मड़ियादो) की बालिकाओं ने अपनी सशक्त, अनुशासित एवं भावनात्मक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।

छात्राओं की प्रस्तुतियों ने केवल मनोरंजन ही नहीं किया, बल्कि समाज को नारी शक्ति, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन एवं लोकसंस्कृति के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण संदेश भी दिए।

कार्यक्रम स्थल देर शाम तक तालियों की गूंज, जयकारों और उत्साह से सराबोर रहा।

कार्यक्रम का आयोजन छात्रावास अधीक्षिका श्रीमती चंद्रकिरण खरे के कुशल मार्गदर्शन, सतत निगरानी एवं नेतृत्व में संपन्न हुआ। उन्होंने छात्राओं को मंच तक पहुँचाने के लिए निरंतर अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास पर विशेष ध्यान दिया।

आयोजन को सफल बनाने में श्रीमती आशा अठया एवं श्रीमती विनीता यादव का विशेष सहयोग रहा, जिनके मार्गदर्शन में छात्राओं ने अपनी प्रतिभा को निखारा।
कार्यक्रम में अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में नगरवासियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

*महाकाली–रक्तबीज नृत्य ने दिखाया नारी शक्ति का विराट स्वरूप*

कार्यक्रम की सर्वाधिक प्रभावशाली प्रस्तुति महाकाली–रक्तबीज पर आधारित समूह नृत्य रही।
छात्राओं ने सशक्त भाव-भंगिमाओं, अनुशासित नृत्य शैली और प्रभावपूर्ण अभिनय के माध्यम से यह संदेश दिया कि जब नारी शक्ति जागृत होती है, तब अन्याय, अत्याचार और असत्य का विनाश निश्चित होता है। प्रस्तुति के दौरान मंच पर जीवंत ऊर्जा देखने को मिली, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
नृत्य की समाप्ति पर पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

*दहेज प्रथा पर आधारित नाटक ने झकझोरा समाज*

छात्राओं द्वारा प्रस्तुत दहेज प्रथा पर आधारित सामाजिक नाटक ने उपस्थित दर्शकों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया।

नाटक के माध्यम से यह प्रभावी ढंग से दर्शाया गया कि किस प्रकार दहेज जैसी सामाजिक बुराई परिवारों को आर्थिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से तोड़ देती है तथा बेटियों के जीवन को पीड़ा और अपमान से भर देती है।

सशक्त संवाद, यथार्थपरक दृश्य और संवेदनशील अभिनय ने दर्शकों की आँखें नम कर दीं।

*झलिया लोकनृत्य में झलकी बुंदेली संस्कृति*

कार्यक्रम में छात्राओं द्वारा प्रस्तुत झलिया लोकनृत्य ने बुंदेली लोकसंस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत कर दिया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों की मधुर लय और सजीव प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। यह प्रस्तुति स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का सुंदर उदाहरण बनी।

*अतिथियों ने की छात्राओं की मुक्तकंठ से सराहना*

कार्यक्रम के समापन अवसर पर छात्रावास अधीक्षिका श्रीमती चंद्रकिरण खरे ने छात्राओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन बालिकाओं के आत्मविश्वास को सुदृढ़ करते हैं और उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ते हैं।

उन्होंने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास का उद्देश्य केवल शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि बालिकाओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और संस्कारित नागरिक बनाना है।

इस अवसर पर डीपीसीएम के. द्विवेदी ने भी छात्राओं की प्रस्तुतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखते हैं और ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम निरंतर आयोजित होते रहना चाहिए।

कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास, राजपुरा केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, संस्कृति, सामाजिक चेतना और नारी सशक्तिकरण का सशक्त मंच भी है।

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