—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*एक बेगुनाह की मौत का गुनहगार कौन*

*अस्पताल की दुत्कार या सिस्टम की मार ने ली महेंद्र की जान*

*न्याय की उम्मीद का कत्ल*

दमोह जिले के रनेह का 27 वर्षीय महेंद्र सिंह लोधी आज हमारे बीच नहीं है। उसने 5 फरवरी को फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

लेकिन यह महज एक आत्महत्या नहीं ना ही एक फंदे की कहानी नहीं है यह कहानी है उस सिस्टम की, जिसने आठ महीनों तक एक युवक को तिल-तिल कर मरने पर मजबूर किया।

एक पिता, एक पति और एक लाचार नागरिक, जो सिर्फ अपनी गर्भवती पत्नी के लिए इलाज और अपने अपमान के लिए न्याय चाहता था।

आपको बता दें कि घटना की नींव 9 जून 2025 को रखी । महेंद्र की पत्नी सपना 9 माह की गर्भवती थी।

आधी रात को प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) शुरू हुई। महेंद्र बड़ी उम्मीदों के साथ उसे लेकर रनेह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचा।

आरोप है कि वहां मौजूद नीलिमा यादव नर्स ने मानवता की सारी हदें पार कर दीं। तड़पती हुई गर्भवती महिला को देखने के बजाय, नर्स ने महेंद्र को गंदी गालियां दीं और चिल्लाते हुए कहा कल सुबह आना, अभी भागो यहाँ से।

एक सरकारी अस्पताल की दहलीज से एक गर्भवती महिला को बिना इलाज के खदेड़ दिया गया। यह महेंद्र के आत्मसम्मान पर हुआ पहला प्रहार था।

अस्पताल से दुत्कारे जाने के बाद जब महेंद्र अपनी पत्नी को लेकर वापस लौट रहा था, तब रास्ते में बस के भीतर नर्स ने उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। महेंद्र का कसूर सिर्फ इतना था कि वह अपने हक के लिए आवाज उठा रहा था।

इस मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसे पूरे दमोह ने देखा, लेकिन प्रशासन ने अपनी आंखें मूंद लीं।

न्याय की अंतिम उम्मीद लेकर महेंद्र रनेह थाने पहुँचा। उसे लगा कि पुलिस उसकी व्यथा सुनेगी, अस्पताल की लापरवाही पर कार्रवाई करेगी और बस में मारने वालों को पकड़ेगी। लेकिन यहाँ की कहानी और भी रोंगटे खड़े कर देने वाली है।

परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने महेंद्र की शिकायत दर्ज करने के बजाय उसे ही कमरे में बंद कर पीटा। रसूखदारों के दबाव में आकर पुलिस ने उल्टा महेंद्र पर ही झूठा प्रकरण (FIR) दर्ज कर दिया। जो शख्स न्याय मांगने गया था, उसे अपराधी बनाकर थाने से निकाला गया।

अगले 8 महीने महेंद्र के लिए किसी नर्क से कम नहीं थे।
कर्ज लेकर कोर्ट की तारीखें भरना और वकीलों की फीस चुकाना उसकी मजबूरी बन गई।

गांव और समाज में ‘अपराधी’ कहलाने का बोझ वह सह नहीं पा रहा था।

कलेक्टर से लेकर एसपी दफ्तर तक, महेंद्र ने हर जगह अपनी बेगुनाही के सबूत (वीडियो) दिए, लेकिन भ्रष्ट सिस्टम ने उसकी एक न सुनी।

5 फरवरी 2026 को महेंद्र का धैर्य टूट गया। उसने अपने मासूम बच्चे और पत्नी सपना को बेसहारा छोड़कर मौत को गले लगा लिया।

आज रनेह की सड़कों पर मातम और गुस्सा है। लोग पूछ रहे हैं
उस नर्स पर कार्रवाई कब होगी जिसने एक गर्भवती महिला को इलाज नहीं दिया?

उन संबंधित पुलिसकर्मियों पर कब होगी कार्रवाई जिन्होंने बेगुनाह पर झूठा केस लादा?

क्या प्रशासन इस उजड़े हुए परिवार (पत्नी और मासूम बच्चे) की जिम्मेदारी उठाएगा?

यह केवल महेंद्र की आत्महत्या नहीं है, यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ, स्वास्थ्य व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र की सामूहिक विफलता है। अगर आज दोषियों को सजा नहीं मिली, तो कल कोई और महेंद्र न्याय की आस में फंदे पर झूल जाएगा।

एमपी अपडेट न्यूज़ की टीम महेंद्र लोधी के परिवार को गहन दुख सहने की क्षमता दे और मृत आत्मा को प्रभु श्री चरणों में स्थान दें ओम शांति ओम शांति ओम शांति

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