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*एक12 लाख का आंगनबाड़ी भवन निर्माण कछुआ गति से ग्रामीणों में नाराजगी*

*एक12 लाख का आंगनबाड़ी भवन निर्माण कछुआ गति से ग्रामीणों में नाराजगी*

*निर्माण में अनियमितता बिना तराई बन रही दीवारें कमजोर होगा भवन — एक साल में भी अधूरा आंगनबाड़ी*

मुकेश जैन की रिपोर्ट झलौन

तेंदूखेड़ा। जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत झलौन के वार्ड क्रमांक 12 में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 73 का भवन इन दिनों अपनी धीमी प्रगति और निर्माण गुणवत्ता को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब 12 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत यह भवन लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी अधूरा पड़ा है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

जानकारी के अनुसार, पंचायत दर्पण के रिकॉर्ड में 25 जुलाई को करीब 2 लाख 82 हजार रुपये की राशि ग्राम पंचायत द्वारा आहरित की जा चुकी है। इसके बावजूद निर्माण कार्य की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। स्थिति यह है कि कभी एक-दो दिन काम होता है, तो कई दिनों तक निर्माण पूरी तरह बंद रहता है।

गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल

निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। फाउंडेशन से लेकर अब तक करीब 3 से 4 फीट ऊंची दीवार का निर्माण किया जा चुका है, लेकिन उसमें नियमित रूप से पानी की तराई (क्योरिंग) नहीं की जा रही है। निर्माण के दौरान और कार्य बंद रहने के समय भी दीवारों व नींव की उचित देखभाल नहीं की जा रही, जिससे भवन की मजबूती पर संदेह गहराता जा रहा है।

इसके अलावा, फाउंडेशन में डाली गई 4 से 5 फीट ऊंची काली-पीली मिट्टी और मुरम में न तो पर्याप्त पानी डाला गया है और न ही उसकी ठीक से दबाई (कम्पेक्शन) की गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की लापरवाही से भवन भविष्य में कमजोर साबित हो सकता है और जल्द ही क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहेगा।

ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और कार्य को निर्धारित मापदंडों के अनुसार जल्द पूरा कराया जाए। उनका कहना है कि बच्चों के लिए बन रहा आंगनबाड़ी भवन सुरक्षित और टिकाऊ होना चाहिए।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि निर्माण में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लग सके।

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