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*हरियाली तीज उत्सव में दिखी भारत की सांस्कृतिक विविधता महिलाओं ने रैंप वॉक से बिखेरी संस्कृति की मनमोहक छटा*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*हरियाली तीज उत्सव में दिखी भारत की सांस्कृतिक विविधता महिलाओं ने रैंप वॉक से बिखेरी संस्कृति की मनमोहक छटा*

दमोह। विश्वकर्मा महिला मंडल, दमोह द्वारा हरियाली तीज के पावन अवसर पर आयोजित भव्य हरियाली तीज उत्सव एवं सावन मेला ने महिला प्रतिभा, भारतीय संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भरता का शानदार संगम प्रस्तुत किया। आयोजन में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और देश के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा धारण कर भारत की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर बेहद खूबसूरत अंदाज में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं के उत्साह और आत्मविश्वास ने पूरे आयोजन में नई ऊर्जा भर दी। सावन की उमंग, हरियाली तीज की परंपरा और भारतीय संस्कृति के रंगों से सजा यह आयोजन उपस्थित लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।

*अतिथियों की गरिमामयी मौजूदगी ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा*

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रंजिता गौरव पटेल, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रीति ठाकुर, श्रीमती संगीता श्रीधर, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रजनी ठाकुर, एडवोकेट श्रीमती निधि श्रीवास्तव, पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष श्रीमती शिखा जैन, समाजसेविका श्रीमती नर्मदा सिंह, खुशी ब्यूटी पार्लर की संचालिका श्रीमती सपना राजपूत, ऐश्वर्या ब्यूटी पार्लर की संचालिका श्रीमती दीप्ति खरे, क्वीन्स ब्यूटी पार्लर की संचालिका श्रीमती अलका मिश्रा तथा स्वदेशी जागरण मंच की प्रांत महिला प्रमुख डॉ. सोनल राय अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

इन सभी अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। अतिथियों ने महिलाओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों, रैंप वॉक और महिला उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

*‘क्वीन ऑफ कल्चर’ प्रतियोगिता बनी कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण*

कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण ‘क्वीन ऑफ कल्चर’ प्रतियोगिता रही। प्रतियोगिता में महिलाओं ने भारत के अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा पहनकर रैंप वॉक किया।

महिलाओं ने अपनी वेशभूषा के माध्यम से कश्मीर, राजस्थान सहित विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति और परंपराओं को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। रैंप पर महिलाओं का आत्मविश्वास, प्रस्तुति का अंदाज और पारंपरिक परिधान देखकर उपस्थित दर्शकों ने तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।

प्रतियोगिता में कश्मीर की पारंपरिक वेशभूषा का प्रतिनिधित्व करने वाली श्रीमती निशा शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया और उन्हें ‘क्वीन ऑफ कल्चर’ चुना गया। वहीं राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा में श्रीमती रूपा शर्मा ने उपविजेता का स्थान हासिल किया।

निशा शर्मा और रूपा शर्मा की प्रस्तुतियों सहित सभी प्रतिभागी महिलाओं के प्रयासों की अतिथियों और उपस्थित लोगों ने जमकर सराहना की।

*महिलाओं की प्रतिभा और आत्मनिर्भरता को मिला शानदार मंच*

कार्यक्रम की एक और विशेषता महिलाओं द्वारा लगाए गए विभिन्न हस्तनिर्मित एवं घरेलू उत्पादों के स्टॉल रहे। इन स्टॉलों में महिलाओं ने अपने घरों में तैयार किए गए पोटली बैग, रेजिन आर्ट की आकर्षक वस्तुएं, भगवान जी की सुंदर पोशाकें, हस्तनिर्मित साबुन, घर में तैयार किए गए पापड़ सहित अनेक उत्पाद प्रदर्शित किए।

इन स्टॉलों के माध्यम से महिलाओं ने यह संदेश दिया कि प्रतिभा और हुनर को अवसर मिले तो महिलाएं अपने घर से ही स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा सकती हैं।

महिला उद्यमियों के इन प्रयासों की अतिथियों ने विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन महिलाओं को केवल मनोरंजन का मंच नहीं देते, बल्कि उनके हुनर को पहचान दिलाने और उसे बाजार तक पहुंचाने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

*श्रीमती एकता विश्वकर्मा के प्रयासों की हुई सराहना*

कार्यक्रम का सफल संयोजन सार्थी विश्वकर्मा कल्याण सेवा संगठन महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती एकता विश्वकर्मा द्वारा किया गया।

श्रीमती एकता विश्वकर्मा ने आयोजन के माध्यम से महिलाओं को सांस्कृतिक प्रस्तुति, रैंप वॉक और महिला उद्यमिता के लिए मंच उपलब्ध कराया। उनके इस प्रयास की कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं महिलाओं ने सराहना की।

श्रीमती एकता विश्वकर्मा ने कहा कि महिलाओं को केवल दर्शक बनाकर नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और हुनर दिखाने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। ऐसे आयोजन महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनते हैं।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य है कि समाज की प्रत्येक महिला को अपनी प्रतिभा पहचानने, उसे मंच पर प्रदर्शित करने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिले। महिलाओं को जब उचित मंच और प्रोत्साहन मिलता है तो वे परिवार के साथ-साथ समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

*भारतीय संस्कृति और महिला सशक्तिकरण का सुंदर संगम*

हरियाली तीज उत्सव में महिलाओं ने जिस तरह विभिन्न राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रस्तुत किया, वह विशेष रूप से सराहनीय रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है।

सावन की हरियाली, तीज की परंपरा, रंग-बिरंगी वेशभूषा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, रैंप वॉक और महिला उद्यमियों के स्टॉलों ने पूरे आयोजन को आकर्षक बना दिया।

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने उत्साह, आत्मविश्वास और रचनात्मकता का शानदार परिचय दिया।

अतिथियों ने आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, उनकी प्रतिभा को मंच देने, आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने और भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं को संरक्षित रखने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण हैं।

विश्वकर्मा महिला मंडल एवं आयोजन से जुड़े सभी पदाधिकारियों, अतिथियों, प्रतिभागी महिलाओं और महिला उद्यमियों का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है।

ऐसे आयोजन दमोह में सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को नई दिशा देने के साथ महिला सशक्तिकरण की मजबूत मिसाल प्रस्तुत करते हैं।

“एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह”

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