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*अवैध शराब पर दमोह पुलिस का बड़ा प्रहार लेकिन कार्रवाई की टाइमिंग पर उठे सवाल*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*अवैध शराब पर दमोह पुलिस का बड़ा प्रहार लेकिन कार्रवाई की टाइमिंग पर उठे सवाल*

*जिले के कई थाना क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी, कच्ची शराब जब्त, सैकड़ों लीटर लहान और भट्टियां नष्ट*

*सागर कांड के बाद पुलिस की सक्रियता पर उठ रहे सवाल*

दमोह। सागर जिले के सागर क्षेत्र में जहरीली शराब से नौ से अधिक लोगों की मौत और 15 से अधिक लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की घटना के बाद दमोह
पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ अचानक बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है।

जिले के कोतवाली, पथरिया, रनेह, मडियादो और हटा पटेरा थाना क्षेत्रों में पुलिस टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर बड़ी मात्रा में अवैध कच्ची एवं देशी शराब जब्त करने के साथ ही शराब बनाने की भट्टियां और सैकड़ों लीटर महुआ लहान नष्ट किया।

पुलिस की इस कार्रवाई से अवैध शराब के कारोबार में लिप्त लोगों के बीच हड़कंप की स्थिति है।
हालांकि, इसी कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर अब दमोह जिले के लोगों के बीच कई सवाल भी उठ रहे हैं।
लोगों का सवाल है कि यदि जिले के अलग-अलग इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध शराब बनाने की भट्टियां और भारी मात्रा में महुआ लहान मौजूद था, तो पुलिस को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली?

क्या हादसे के बाद ही जागा पुलिस विभाग?

पुलिस के अनुसार कोतवाली क्षेत्र के कुचबंदिया मोहल्ले में करीब 45 लीटर कच्ची शराब जब्त की गई और चार से पांच चालू शराब भट्टियां तथा करीब 150 लीटर महुआ लहान नष्ट किया गया। पथरिया में 13 आरोपियों के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 21 लीटर कच्ची और करीब 15 लीटर देशी शराब जब्त की गई तथा लगभग 350 लीटर महुआ लहान नष्ट किया गया।

रनेह, मडियादो और हटा पटेरा थाना क्षेत्रों में भी कार्रवाई कर बड़ी मात्रा में शराब और लहान जब्त किया गया। कई स्थानों पर शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाली भट्टियां भी नष्ट की गईं।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस को इन अवैध शराब के अड्डों की पहले से कोई जानकारी नहीं थी?

यदि जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि जानकारी नहीं थी तो इतने बड़े पैमाने पर अवैध शराब का निर्माण और भंडारण पुलिस की नजरों से कैसे बचता रहा?

क्या हादसे के बाद बढ़ा दबाव?

सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद दमोह पुलिस की यह कार्रवाई निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन जनता के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई करने का दबाव बढ़ने के बाद यह अभियान तेज किया गया है?

एक ही समय में जिले के कई थाना क्षेत्रों से अवैध शराब, लहान और भट्टियां मिलने से पुलिस की पूर्व निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।

आखिर इतने समय से चल रहे अवैध कारोबार पर नियमित कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

हालांकि, पुलिस पर किसी प्रकार की मिलीभगत या कमीशनखोरी का आरोप बिना ठोस प्रमाण के लगाना उचित नहीं होगा।

लेकिन यदि ऐसे आरोप या शिकायतें सामने आती हैं तो वरिष्ठ अधिकारियों को उनकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

जनता चाहती है स्थायी कार्रवाई

दमोह जिले के नागरिकों का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई केवल किसी बड़े हादसे के बाद अभियान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
पुलिस को उन क्षेत्रों की लगातार निगरानी करनी होगी, जहां लंबे समय से कच्ची शराब बनाए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जब्त की गई शराब कहां से आई, इसे कौन बना रहा था, इसके पीछे कौन लोग हैं और इसका नेटवर्क किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ है।

केवल छोटे स्तर पर शराब बनाने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे नेटवर्क की जांच होने पर ही अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

कई सवालों के जवाब अभी बाकी

दमोह पुलिस की ताजा कार्रवाई के बाद अब जनता की निगाहें पुलिस और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं।

सवाल यह हैं—

– क्या जिले में अवैध शराब के अड्डों की पहले से पुलिस को जानकारी थी?
– यदि जानकारी थी तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
– क्या पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग और मुखबिर तंत्र प्रभावी ढंग से काम कर रहा था?
– क्या अवैध शराब के कारोबार के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है?
– क्या पूर्व में मिली शिकायतों पर कार्रवाई हुई?
– क्या अब यह अभियान लगातार जारी रहेगा या कुछ दिनों बाद फिर स्थिति पहले जैसी हो जाएगी?
– क्या शराब के अवैध कारोबार से जुड़े बड़े आरोपियों और सप्लाई नेटवर्क तक पुलिस पहुंचेगी?

दमोह की जनता चाहती है कि पुलिस प्रशासन इन सवालों का जवाब केवल कार्रवाई के आंकड़ों से नहीं, बल्कि स्थायी और पारदर्शी कार्रवाई से दे।

अवैध और जहरीली शराब सीधे लोगों की जिंदगी से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसलिए कार्रवाई किसी हादसे के बाद नहीं, बल्कि हादसा होने से पहले होनी चाहिए l

एम पी अपडेट न्यूज़ के साथ बने रहिए अगली खबर बहुत जल्दी बिस्तर के साथ…?

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