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*शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप, निलंबित कर्मचारी ने अपने ही विभाग के खिलाफ खोला मोर्चा*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप, निलंबित कर्मचारी ने अपने ही विभाग के खिलाफ खोला मोर्चा*


दमोह/हटा मुख्यालय विकासखंड स्रोत समन्वयक जन शिक्षा केंद्र हटा में निलंबित भृत्य राजेंद्र कुमार अवस्थी द्वारा शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर शिकायत किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायत में दमोह जिले के 137 हाईस्कूल/हायर सेकेंडरी स्कूलों में भवनों के मरम्मत कार्य से संबंधित करोड़ों रुपये की राशि में कथित हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं।

शिकायतकर्ता राजेंद्र कुमार अवस्थी के अनुसार, उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत दमोह जिले के 137 हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के भवनों में किए गए मरम्मत कार्यों से संबंधित जानकारी प्राप्त की। शिकायत में बताया गया है कि इन विद्यालयों के अनुरक्षण कार्य के लिए वर्ष 2022 में लगभग तीन-तीन लाख रुपये की राशि का बजट जारी किया गया था।

शिकायत में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) दमोह एस. के. मिश्रा पर अनुरक्षण कार्यों में वित्तीय अनियमितता होने की बात कही गई है। राजेंद्र कुमार अवस्थी ने इस संबंध में दस्तावेज संलग्न करते हुए 28 मार्च 2024 को कमिश्नर, सागर संभाग, सागर के समक्ष चार शिकायत आवेदन प्रस्तुत किए।

शिकायत प्राप्त होने के बाद कमिश्नर, सागर संभाग द्वारा मामले की जांच के लिए जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। इसके बाद संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण सागर संभाग द्वारा तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया गया। जांच दल ने मामले की जांच कर अपना प्रतिवेदन तैयार किया और उसे संयुक्त संचालक लोक शिक्षण सागर संभाग को सौंपा।

इसके बाद संयुक्त संचालक लोक शिक्षण सागर संभाग द्वारा जांच प्रतिवेदन को अभिमत सहित दिनांक 29 जुलाई 2024 को अग्रिम दंडात्मक कार्रवाई के लिए कार्यालय कमिश्नर, सागर संभाग, सागर में जमा कराया गया।

11 माह बाद भी कार्रवाई पर सवाल

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच प्रतिवेदन जमा होने के बावजूद लंबे समय तक मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। समाचार में उल्लेख है कि लगभग 11 माह बाद तत्कालीन कमिश्नर सागर संभाग वीरेंद्र सिंह रावत द्वारा सेवानिवृत्ति की तारीख 30 जून 2025 से पहले संयुक्त संचालक लोक शिक्षण सागर संभाग की जांच प्रतिवेदन पर दोषमुक्त आदेश जारी किया गया।

शिकायतकर्ता राजेंद्र कुमार अवस्थी ने इस आदेश पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि तत्कालीन कमिश्नर वीरेंद्र सिंह रावत द्वारा अपने ही अधीनस्थ अधिकारीगण के संबंध में संभागीय पेंशन अधिकारी के अभिमत का उल्लेख किया गया, जिसके आधार पर आदेश जारी किया गया।

अब राजेंद्र कुमार अवस्थी ने कमिश्नर सागर के उक्त आदेश के विरुद्ध माननीय लोकायुक्त संगठन के समक्ष दस्तावेजों सहित शिकायत/प्रकरण प्रस्तुत किए जाने की जानकारी दी है।

कई अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आने का दावा

पूरे मामले में शिकायतकर्ता द्वारा तत्कालीन DEO दमोह एस. के. मिश्रा, जांच से जुड़े अधिकारियों, संयुक्त संचालक लोक शिक्षण सागर संभाग तथा तत्कालीन कमिश्नर वीरेंद्र सिंह रावत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के अंतिम निष्कर्षों से ही हो सकेगी।

मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि 137 विद्यालयों के अनुरक्षण कार्य के लिए जारी बजट, वास्तविक निर्माण/मरम्मत कार्य, भुगतान, संबंधित एजेंसियों और उपयोगिता प्रमाण-पत्रों की जांच यदि निष्पक्ष एवं विस्तृत रूप से होती है तो वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

अब लोकायुक्त कार्रवाई पर टिकी निगाहें

शिकायतकर्ता द्वारा लोकायुक्त संगठन के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बाद मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, यह महत्वपूर्ण होगा। यदि लोकायुक्त स्तर पर प्रकरण की जांच स्वीकार की जाती है तो जांच प्रतिवेदन, आरटीआई से प्राप्त दस्तावेज, विद्यालयवार खर्च, भुगतान संबंधी अभिलेख और अधिकारियों के निर्णयों की जांच की जा सकती है।

अगर विस्तृत तरीके से जांच हो जाए और भी संबंधित अधिकारी यो के नाम आ सकते हैं…?

फिलहाल पिक्चर अभी बाकी है

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