—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*दमोह जिला पंजीयक कार्यालय में कलेक्टर का छापा टेबल पर मिले डेढ़ लाख रुपये नकद*
*उप पंजीयक और सेवा प्रदाता के नकदी को लेकर अलग-अलग दावे, कथित कमीशनखोरी, आधार कार्ड में गड़बड़ी और टोकन के नाम पर वसूली के आरोपों से मचा हड़कंप*
*जिले के पंजीयक कार्यालय में कई बरसों से चला रहा है लूट का खेल*
दमोह। जिला पंजीयक कार्यालय, दमोह में कलेक्टर द्वारा की गई छापेमार कार्रवाई के बाद पंजीयन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कार्रवाई के दौरान कार्यालय की एक टेबल पर करीब डेढ़ लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी सामने आई है। इस रकम को लेकर उप पंजीयक और संबंधित सेवा प्रदाता की ओर से अलग-अलग दावे किए जाने की बात कही जा रही है। वहीं, सूत्रों के हवाले से इस राशि को अधिकारियों के कथित कमीशन से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, नकदी के वास्तविक स्रोत और उसके उद्देश्य की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
इस घटनाक्रम के बाद जिला पंजीयक कार्यालय में होने वाली रजिस्ट्री की प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन, सेवा प्रदाताओं की भूमिका और पक्षकारों से कथित रूप से अतिरिक्त राशि वसूले जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।
डेढ़ लाख रुपये की नकदी मिलने से उठे सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कलेक्टर की कार्रवाई के दौरान कार्यालय में एक टेबल पर लगभग डेढ़ लाख रुपये नकद मिले। इस रकम को लेकर जब सवाल उठे तो उप पंजीयक की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि यह राशि सेवा प्रदाता की है।
दूसरी ओर, सेवा प्रदाता ने कथित रूप से बताया कि रकम किसी अन्य व्यक्ति को देने के लिए लाई गई थी। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि नकदी वास्तव में किसकी थी, इसे कार्यालय में किस उद्देश्य से रखा गया था और क्या इसका संबंध किसी पंजीयन कार्य या अन्य लेनदेन से था।
इसी बीच, सूत्रों के हवाले से यह दावा भी सामने आया है कि डेढ़ लाख रुपये की राशि कथित तौर पर एक सप्ताह के कमीशन के रूप में अधिकारियों को दी जानी थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहा जा सकता है कि किसी अधिकारी ने रिश्वत स्वीकार की थी।
नकदी के संबंध में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए राशि के स्रोत, संबंधित व्यक्तियों के बयान, लेनदेन के रिकॉर्ड और कार्रवाई के दौरान तैयार किए गए पंचनामे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
आधार कार्ड में कथित गड़बड़ी कर रजिस्ट्री कराने का आरोप
जिला पंजीयक कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर आधार कार्ड में कथित रूप से फर्जी उपनाम जोड़कर रजिस्ट्री कराए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। यदि इन आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो यह पहचान संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन और संपत्ति पंजीयन प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।
रजिस्ट्री के दौरान संबंधित पक्षकारों की पहचान, प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रामाणिकता और रिकॉर्ड में दर्ज विवरणों का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यह जांच आवश्यक होगी कि कथित गड़बड़ी किन दस्तावेजों में हुई, किस स्तर पर दस्तावेजों का परीक्षण किया गया और क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
हालांकि, फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी विशिष्ट रजिस्ट्री, संबंधित व्यक्ति या दस्तावेज में हुई कथित गड़बड़ी का प्रमाणित विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए इन आरोपों की पुष्टि संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
भवन की जगह भूखंड के रूप में रजिस्ट्री कराने की शिकायतें
कार्यालय में संपत्तियों के पंजीयन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में भवन मौजूद होने के बावजूद संपत्ति की रजिस्ट्री भूखंड के रूप में कराए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
यदि किसी संपत्ति का वास्तविक स्वरूप और दस्तावेजों में दर्ज विवरण अलग-अलग हैं, तो यह जांच का विषय बन सकता है कि संपत्ति का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया और निर्धारित स्टांप शुल्क तथा पंजीयन शुल्क की गणना सही तरीके से हुई या नहीं।
इस पहलू की जांच के लिए संबंधित रजिस्ट्रियों, संपत्ति के दस्तावेजों, उपलब्ध मूल्यांकन रिकॉर्ड और लागू नियमों का परीक्षण किया जाना आवश्यक होगा। यदि किसी मामले में जानबूझकर गलत जानकारी देकर शासन को राजस्व नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
टोकन और रजिस्टर के नाम पर 200 रुपये वसूली का आरोप
जिला पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री कराने पहुंचने वाले नागरिकों से टोकन और रजिस्टर के नाम पर 200 रुपये लिए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ सेवा प्रदाताओं पर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि लेने की शिकायतों की भी चर्चा है।
इन आरोपों के मद्देनजर यह स्पष्ट होना जरूरी है कि टोकन अथवा रजिस्टर के नाम पर कोई अधिकृत शुल्क निर्धारित है या नहीं। यदि ऐसा कोई शुल्क निर्धारित नहीं है, तो नागरिकों से राशि लेने का आधार क्या था और प्राप्त रकम की रसीद दी जाती थी या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए।
यह भी जांच का विषय है कि कथित वसूली किसी एक व्यक्ति तक सीमित थी या कार्यालय में आने वाले कई पक्षकारों से इसी प्रकार राशि ली जा रही थी।
रजिस्ट्री कराने आने वाले नागरिकों को निर्धारित शुल्क की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनधिकृत वसूली की आशंका न रहे।
सेवा प्रदाताओं की भूमिका भी जांच के दायरे में
पंजीयन कार्यालयों में दस्तावेज तैयार करने और ऑनलाइन प्रक्रिया में सहायता देने वाले सेवा प्रदाताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में नकदी मिलने की घटना और अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने के आरोपों के बीच यह जांच जरूरी है कि संबंधित सेवा प्रदाता किस कार्य के लिए अधिकृत थे और उनके द्वारा नागरिकों से कितनी राशि ली जाती थी।
यदि किसी सेवा प्रदाता द्वारा निर्धारित दरों से अधिक रकम लेने की शिकायतें प्रमाणित होती हैं, तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सेवा प्रदाताओं और विभागीय अधिकारियों के बीच किसी प्रकार का अनधिकृत वित्तीय लेनदेन हुआ था या नहीं।
हालांकि, केवल नकदी मिलने या आरोप लगाए जाने के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। इसके लिए दस्तावेजी साक्ष्य, बयान और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
शासन के राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका
संपत्ति के वास्तविक स्वरूप, मूल्यांकन अथवा दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी का असर शासन को मिलने वाले राजस्व पर पड़ सकता है। यदि किसी संपत्ति का पंजीयन गलत विवरण के आधार पर कराया गया हो और उससे निर्धारित शुल्क प्रभावित हुआ हो, तो संबंधित मामले में राजस्व की गणना की जांच आवश्यक होगी।
इसलिए जिला पंजीयक कार्यालय में हाल के पंजीयन रिकॉर्ड, संदिग्ध दस्तावेजों, शुल्क की रसीदों और संपत्ति मूल्यांकन से जुड़े अभिलेखों का परीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदारी तय करने के साथ शासन को हुए संभावित नुकसान का आकलन भी किया जा सकता है।
कलेक्टर की कार्रवाई के बाद इन सवालों के जवाब जरूरी
जिला पंजीयक कार्यालय में हुई कार्रवाई के बाद कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं।
– टेबल पर मिली डेढ़ लाख रुपये की नकदी किसकी थी?
– उप पंजीयक और सेवा प्रदाता के अलग-अलग दावों में से वास्तविक स्थिति क्या है?
– क्या नकदी का संबंध किसी पंजीयन कार्य या अनधिकृत लेनदेन से था?
– आधार कार्ड में कथित गड़बड़ी कर रजिस्ट्री कराने के आरोपों में कितनी सच्चाई है?
– भवनों के स्थान पर भूखंड के रूप में रजिस्ट्री कराने की शिकायतों की जांच हुई है या नहीं?
– टोकन और रजिस्टर के नाम पर 200 रुपये लेने के आरोपों का आधार क्या है?
– क्या पक्षकारों से निर्धारित शुल्क से अधिक राशि लिए जाने की शिकायतों पर कार्रवाई की जाएगी?
– क्या प्रशासन संबंधित रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित करेगा?
इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
आधिकारिक पक्ष और जांच के निष्कर्ष का इंतजार
फिलहाल, जिला पंजीयक कार्यालय में नकदी मिलने, कथित कमीशनखोरी, दस्तावेजों में गड़बड़ी और अतिरिक्त शुल्क वसूली से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र तथा आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती है। संबंधित अधिकारियों के नाम, सेवा प्रदाता की पहचान, कार्रवाई की तारीख और प्रशासन के आधिकारिक बयान का विवरण भी उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण है। यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो संबंधित पक्षों का स्पष्टीकरण भी सार्वजनिक होना चाहिए।
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। डेढ़ लाख रुपये की नकदी का वास्तविक स्रोत, रजिस्ट्री प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की सच्चाई और नागरिकों से शुल्क वसूली के आरोपों पर जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।खबर में नाम सहित जानकारी जोड़ने के लिए
आपने नाम सहित विस्तृत खबर मांगी है। अभी उपलब्ध विवरण में केवल कलेक्टर, उप पंजीयक और सेवा प्रदाता के पदनाम हैं, लेकिन उनके नाम नहीं दिए गए हैं।
आप मुझे निम्नलिखित जानकारी उपलब्ध करा दें, ताकि खबर को सही नामों और तथ्यों के साथ अंतिम रूप दिया जा सके:
1. दमोह कलेक्टर का नाम — क्या कार्रवाई कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने की थी?
2. जिला पंजीयक या उप पंजीयक का नाम।
3. संबंधित सेवा प्रदाता का नाम।
4. छापे की तारीख और कार्रवाई के दौरान सामने आए आधिकारिक तथ्य।
5. क्या डेढ़ लाख रुपये की जब्ती का पंचनामा बनाया गया या किसी अधिकारी का बयान जारी हुआ?
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