—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*ईमलाई विद्यालय में बुंदेली उत्सव का आयोजन, लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने मोहा मन*
*बुंदेली विरासत और संस्कृति के संरक्षण का संदेश, लोकगायन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाया हुनर*


दमोह। बुंदेली भाषा, लोककला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से दमोह केयर फाउंडेशन समिति के संयोजन में तथा मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग से ‘बुंदेली विरासत, अपनी संस्कृति अपनी पहचान’ कार्यक्रम के अंतर्गत ईमलाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बुंदेली उत्सव का आयोजन किया गया। ‘बुंदेली माटी के रंग, बुंदेली समाज के संग’ की भावना के साथ आयोजित इस उत्सव में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बुंदेली लोकगीतों की शानदार प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में बुंदेली भाषा एवं संस्कृति के प्रति समझ, सम्मान और जुड़ाव बढ़ाना तथा पारंपरिक लोककलाओं को मंच प्रदान कर स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करना रहा। उत्सव के दौरान बुंदेली लोकगायन, लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विभिन्न विषयों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिला।
सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन के साथ हुआ। विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती सीमा दुबे ने बुंदेली भाषा में सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उनकी वंदना ‘अम्बे सभा में पधारो, वाणी पे विराजो, वीणावादिनी’ ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इसके बाद अतिथियों का स्वागत बुंदेली परंपरा के अनुरूप किया गया। इस अवसर पर श्रीमती सीमा दुबे ने ‘जगे भाग्य मोरे, हरि-हरि आई बहार’ गीत की शानदार प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति ने बुंदेली लोकसंगीत की मिठास और क्षेत्रीय संस्कृति की सुंदरता को सामने रखा।
सामूहिक लोकगायन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
उत्सव के अंतर्गत आयोजित सामूहिक लोकगायन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बुंदेली लोकगीतों के माध्यम से सामाजिक संदेशों और पारंपरिक जीवनशैली को प्रस्तुत किया।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर लक्ष्मी पटेल, सौम्या पटेल, हीरा पटेल, उमा, नीता एवं गजेन्द्र पटेल की टोली रही। इस समूह ने ‘नशा मुक्त हो देश हमारो’ गीत प्रस्तुत कर नशामुक्त समाज का संदेश दिया।
द्वितीय स्थान पर मुस्कान पटेल, दमयंती अहिरवार, परी रजक, उत्तरा अहिरवार एवं नंदनी अहिरवार की टोली रही। समूह ने ‘आगड़ दम बागड़ दम’ गीत के माध्यम से अपनी गायन प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
वहीं तृतीय स्थान पर तमन्ना नट, प्रियंका नट, खुशबू नट एवं मुस्कान पटेल की टोली रही। इस समूह ने ‘भटा को भर्ता, चना की भांजी’ गीत प्रस्तुत कर बुंदेली खानपान और लोकजीवन से जुड़े पारंपरिक रंगों को दर्शाया।
एकल गायन में अशोक नट ने मारी बाजी
एकल लोकगायन प्रतियोगिता में अशोक नट ने अपनी प्रस्तुति से बाजी मारी। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में बुंदेली भाषा की सहजता, लोकजीवन की झलक और पारंपरिक गीत-संगीत के प्रति उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान बुंदेली कला, लोकगायन, बुंदेली सांस्कृतिक विरासत, लोकनृत्य एवं वाद्ययंत्रों से संबंधित प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया गया। इसमें सत्यम रजक ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को बुंदेलखंड की सांस्कृतिक परंपराओं, लोककलाओं और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के बारे में अपनी जानकारी प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
शिक्षिकाओं ने भी दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
बुंदेली उत्सव में विद्यालय की शिक्षिकाओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। शिक्षिका श्रीमती अभिलाषा प्रसाद ने ‘दगाबाजी ने कलियों’ लोकगीत की प्रस्तुति देकर बुंदेली लोकसंगीत के प्रति अपनी रुचि प्रदर्शित की।
वहीं वाद्ययंत्र से जुड़ी प्रस्तुति में गजेन्द्र पटेल एवं विनय अहिरवार ने सहभागिता की। विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों की भागीदारी ने कार्यक्रम को सामूहिक सांस्कृतिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।
बुंदेली संस्कृति हमारी पहचान : नर्मदा सिंह
कार्यक्रम में अतिथि के रूप में ज्ञान गंगा पब्लिक स्कूल से प्रतिभा सिंह उपस्थित रहीं। दमोह केयर फाउंडेशन समिति की अध्यक्ष श्रीमती नर्मदा सिंह ने बुंदेली भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि बुंदेलखंड हमारी पहचान है और इस पहचान को सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने बुंदेली भाषा में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “हमायो बुन्देलखण्ड हमारी पहचान आय। जा पहचान हम सबको बचाकर रखने है। इते लोकगीत, लोकनृत्य की कला हमारी विरासत आये। ईको हमें संभाल के रखने है।”
उनके संदेश का आशय था कि बुंदेली लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक कलाएं बुंदेलखंड की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं। इन्हें संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी भाषा, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी रहें।
विद्यार्थियों पर है संस्कृति संरक्षण की जिम्मेदारी : प्राचार्य
विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती अनीता जैन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे देश और समाज का भविष्य हैं। बुंदेली लोकगीतों और बुंदेली संस्कृति को संरक्षित करने की जिम्मेदारी विद्यार्थियों की भी है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी मातृभाषा और स्थानीय संस्कृति को समझने का अवसर देते हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपनी पारंपरिक विरासत पर गर्व करें तथा लोकगीतों, लोकनृत्यों और क्षेत्रीय परंपराओं को आगे बढ़ाने में योगदान दें।
विजेताओं को प्रमाणपत्र एवं उपहार देकर किया सम्मानित
कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षिका श्रीमती सीमा दुबे ने किया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता रहे छात्र-छात्राओं को प्रमाणपत्र एवं उपहार प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ बुंदेली संस्कृति और लोककलाओं के प्रति जागरूक होने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में विद्यालय परिवार की ओर से श्रीमती अभिलाषा प्रसाद, ममता खरे, रेनू खरे, वीनम तिवारी, आरती सेन, प्रीति सोनी, मेघा चौबे, कुं. गुलप्सा खान, आर.पी. पटेल, मनीष शर्मा, सतीश ठक्कर, अतुल प्यासी एवं भरत सेन सहित गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
लोकपरंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल
ईमलाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित बुंदेली उत्सव ने यह संदेश दिया कि स्थानीय भाषा, लोकगीत और पारंपरिक कलाएं किसी भी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। विद्यालयों में इस तरह के आयोजन बच्चों को अपनी विरासत से जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने में भी सहायक हैं।
दमोह केयर फाउंडेशन समिति के संयोजन और मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में बुंदेली माटी की खुशबू, लोकगीतों की मिठास और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान की झलक देखने को मिली। उत्सव ने बुंदेली संस्कृति को सहेजने और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रेरक संदेश दिया।



















