—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*समय पर उपचार और स्वास्थ्य विभाग की सतत निगरानी से हाई रिस्क गर्भवती महिला का Hb 4.6 से बढ़कर 11 हुआ*
*स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों से रेशमा अहिरवार को मिला बेहतर स्वास्थ्य, हाई रिस्क गर्भावस्था में पेश की सफलता की मिसाल*
दमोह/तेजगढ़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य एवं सुरक्षित मातृत्व को लेकर किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तेजगढ़ अंतर्गत ग्राम बाँधवपहाड़ की निवासी रेशमा अहिरवार की सफलता की कहानी सामने आई है। रेशमा अहिरवार को अत्यंत कम हीमोग्लोबिन (Hb) स्तर के कारण हाई रिस्क गर्भवती महिला के रूप में चिन्हित किया गया था। जांच के दौरान उनका हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 4.6 ग्राम प्रति डेसीलीटर पाया गया था, जो गर्भावस्था के दौरान गंभीर चिंता का विषय था।
इस चुनौतीपूर्ण स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए उनके स्वास्थ्य की देखभाल और उपचार की दिशा में प्रयास शुरू किए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तेजगढ़ की मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रियंका शर्मा के मार्गदर्शन में मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा रेशमा अहिरवार का नियमित फॉलोअप किया गया। उन्हें समय-समय पर आवश्यक परामर्श दिया गया तथा स्वास्थ्य विभाग की ओर से जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
स्वास्थ्य विभाग की सतत निगरानी, उचित आयरन उपचार, नियमित जांच और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के निरंतर प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया। लगातार देखभाल के बाद रेशमा अहिरवार का हीमोग्लोबिन स्तर 4.6 से बढ़कर 11.0 ग्राम प्रति डेसीलीटर तक पहुंच गया। यह सुधार स्वास्थ्य सेवाओं की समय पर उपलब्धता और समन्वित प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
इन स्वास्थ्य कर्मियों का रहा विशेष योगदान
रेशमा अहिरवार के स्वास्थ्य में सुधार लाने के इस प्रयास में मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रियंका शर्मा, सेक्टर सुपरवाइजर तेजपाल सिंह, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी तथा यूनिसेफ से जुड़े शिवम सोनी का विशेष योगदान रहा। सभी ने मिलकर नियमित निगरानी, परामर्श और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से गर्भवती महिला की देखभाल सुनिश्चित की।
समय पर पहचान और नियमित फॉलोअप से संभव है बेहतर स्वास्थ्य
रेशमा अहिरवार की यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, समय पर जोखिम की पहचान, उचित उपचार और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। विशेषकर हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को समय पर चिन्हित कर उन्हें आवश्यक उपचार एवं निरंतर निगरानी उपलब्ध कराई जाए तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के इन प्रयासों से यह संदेश भी मिलता है कि सुरक्षित मातृत्व के लिए गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ाव बेहद जरूरी है। रेशमा अहिरवार के हीमोग्लोबिन स्तर में आया यह उल्लेखनीय सुधार स्वास्थ्य विभाग की टीम भावना, समर्पण और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का प्रेरणादायक उदाहरण है।

















