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*निषादराज जयंती पर दमोह में माझी समाज ने दिखाई एकता की ताकत, निकली भव्य शोभायात्रा*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज दमोह—

*निषादराज जयंती पर दमोह में माझी समाज ने दिखाई एकता की ताकत, निकली भव्य शोभायात्रा*

दमोह। भगवान श्री राम के सखा और माझी समाज के आराध्य निषादराज महाराज की जयंती पर दमोह में माझी समाज द्वारा विशाल और भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस आयोजन में रैकवार, केवट, बर्मन, धुरिया, कहार, कश्यप, निषाद, बाथम, भोई, मल्लाह और ढीमर समाज के हजारों लोग शामिल हुए और पूरे नगर में एकता की मिसाल पेश की।

शोभायात्रा की शुरुआत महाराणा प्रताप स्कूल मैदान से हुई, जो शहर के प्रमुख मार्गों—फुटेरा मुहल्ला, शोभा नगर, फिल्टर कॉलोनी, पलंदी चौराहा, पुराना थाना, घंटाघर, बस स्टैंड और डॉ. भीमराव अंबेडकर चौराहा सहित विभिन्न स्थानों से होती हुई पुनः मैदान में पहुंचकर संपन्न हुई। जगह-जगह समाजजनों और नगरवासियों द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।

शोभायात्रा में भगवान श्रीराम, माता सीता और निषादराज महाराज की आकर्षक झांकियां विशेष रूप से लोगों का ध्यान खींचती रहीं। डीजे और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर युवा नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे, जिससे पूरा शहर भक्तिमय माहौल में डूब गया।

इस अवसर पर रैकवार, केवट, बर्मन और धुरिया समाज द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक ढिमरयाई नृत्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। जगह-जगह इस लोकनृत्य की प्रस्तुति ने आयोजन को और भी जीवंत बना दिया।

कार्यक्रम में दमोह विधायक जयंत मलैया ने कहा कि माझी समाज बचन की पक्की है और मित्रता निभाने में हमेशा आगे रहती है।

वहीं मध्यप्रदेश माझी आदिवासी महासंघ के प्रदेश महामंत्री रामकृष्ण रैकवार ने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि यदि माझी समाज को पुनः आरक्षण का लाभ मिलता है, तो समाज की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल सकती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस दिशा में पहल करने की अपील की।

कार्यक्रम में मोंटी रैकवार सहित कई वक्ताओं ने कहा कि निषादराज केवल एक समाज के नहीं बल्कि पूरे हिंदू समाज के आराध्य हैं। वक्ताओं ने समाज की एकता को सबसे बड़ी ताकत बताते हुए आगे भी इसी तरह संगठित रहने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान उभरते हुए गायक ऋषभ नायक के नवरात्रि गीत का विमोचन भी किया गया। समाजजनों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

निषादराज जयंती पर आयोजित इस भव्य शोभायात्रा में हजारों की संख्या में समाज के लोगों की उपस्थिति ने इसे एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में स्थापित किया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि संगठित समाज ही अपनी आवाज मजबूती से उठा सकता है।

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