—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज दमोह—
*लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सवाल पत्रकार अरुण मिश्रा से कथित अभद्रता के मामले ने पकड़ा तूल*
*प्रभारी मंत्री ने दिया पत्रकार अरुण मिश्रा को धक्का लोकतंत्र खतरे में*
*दमोह के प्रभारी मंत्री इंद्र सिंह परमार एक बार नहीं बल्कि दो दो बार एक पत्रकार को दिया धक्का और कहते हैं आपका दिमाग खराब है*
*गजब मंत्री जी प्रेस वार्ता में आपने बुलाया कैमरे चालू थे और अपने अभद्रता कर दी पूछता है दमोह*
दमोह। मध्यप्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार से जुड़ा एक मामला इन दिनों दमोह जिले में चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है। 14 मई 2026 को दमोह सर्किट हाउस में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकार अरुण मिश्रा के साथ कथित अभद्र व्यवहार किए जाने के आरोप के बाद जिले के पत्रकारों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकार अरुण मिश्रा ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की उस अपील को लेकर सवाल पूछा था, जिसमें डीजल-पेट्रोल की बचत और कम से कम वाहनों के उपयोग की बात कही गई थी।
आरोप है कि सवाल पूछे जाने पर प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार नाराज हो गए और उन्होंने पत्रकार को धक्का दे दिया। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच कुछ देर के लिए असहज स्थिति निर्मित हो गई।
इस घटना के बाद जिले के पत्रकारों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में आक्रोश व्याप्त है।
लोगों का कहना है कि यदि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी पत्रकारिता के साथ सार्वजनिक मंच पर इस प्रकार का व्यवहार होता है, तो इससे निष्पक्ष पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि जनप्रतिनिधियों के ऐसे व्यवहार से समाज और युवाओं के बीच क्या संदेश जाएगा।
पीड़ित पत्रकार अरुण मिश्रा ने कहा कि घटना के
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब तक प्रशासनिक स्तर पर उन्हें कोई ठोस समर्थन या कार्रवाई का भरोसा नहीं मिला है।
अरुण मिश्रा ने कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेकर न्याय की मांग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे भय के माहौल में जीवन यापन कर रहे हैं और उनके परिवार में तीन बेटियां हैं, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि भविष्य में उनके साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की होगी।
यह मामला अब केवल एक पत्रकार से जुड़े विवाद तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, पत्रकारों की सुरक्षा और पत्रकारिता की गरिमा से जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल जिलेभर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है।
विगत दिनों पहले तेंदूखेड़ा के एक स्कूल में एक बच्चे को पनिशमेंट दिया और एक हफ्ते बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ गई 3 महीने इलाज के दौरान बच्चों की मृत्यु हो गई परिजन आरोप लगा रहे हैं l
यह सब स्कूल के शिक्षक के द्वारा ऐसा हुआ फिलहाल मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है l
आगामी दिनों में sit जांच के द्वारा जो भी निर्णय लिए जाएंगे संबंधित संस्था युक्त अधिकारी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई होगी l
अगर प्रभारी मंत्री मामले में पत्रकार आहत हो कर किसी प्रकार का ग़लत कदम उठा ले तो इसकी जवाब देही प्रभारी मंत्री और जिले के जनप्रतिनिधियों की होगी l
**लोकतंत्र खतरे में ऐसा पत्रकार अरुण मिश्रा ने कहा है***















































