—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*सागर नाका शराब दुकान पर उठे सवाल, अवैध बिक्री के वीडियो वायरल*
*आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप*

दमोह। शहर में अवैध शराब बिक्री को रोकने की जिम्मेदारी निभा रहे आबकारी विभाग की कार्यशैली एक बार फिर कटघरे में है। सागर नाका कृषि मंडी गेट के पास स्थित शराब दुकान का एक वीडियो बुधवार शाम सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें दुकान के बाहर विभागीय पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद थैलों में अवैध रूप से शराब बेचे जाने की तस्वीरें साफ दिखाई दे रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग का अमला केवल “औपचारिकता” निभाता दिख रहा है, जबकि दुकान के आसपास अवैध गतिविधियाँ लगातार जारी हैं।
*सबसे कम रेट पर शराब बेचने के आरोप*
शहर में यह दुकान सबसे कम कीमत पर शराब बेचने के लिए फेमस हो चुकी है। आरोप है कि यहाँ सरकारी दरों से आधी कीमत पर शराब बेची जाती है, जिससे खरीदारों की भारी भीड़ लगती है।
*वायरल रेट लिस्ट (स्थानीय सूत्रों के अनुसार)*
लाल मसाला: ₹60 (सरकारी मूल्य ₹92–100)
सफेद मसाला: ₹60 (सरकारी मूल्य ₹70–80)
एमडी व्हिस्की: ₹300–400 (मूल्य ₹700–800)
ब्लेंडर प्रीमियम: ₹600 (मूल्य ₹1400)
एमडी रम: ₹400 (मूल्य ₹700)
इतने सस्ते दामों पर शराब उपलब्ध होने से यहाँ रोज भारी भीड़ जमा होती है, जिससे ट्रैफिक अव्यवस्था और सुरक्षा संबंधी समस्याएँ बढ़ गई हैं।
*क्षेत्र बना शराबियों का अड्डा, महिलाओं-बच्चों में दहशत*
स्थानीय निवासियों ने बताया—कि
दुकान के सामने ही रेलवे लाइन पर लोग खुलेआम बैठकर शराब पीते हैं
क्षेत्र में देर रात तक नशेड़ियों का जमघट लगा रहता है
सड़क और रेलवे लाइन दोनों पर अवैध सेवन आम बात हो गई है
*लगातार ट्रैफिक जाम की समस्या गंभीर बनी हुई है*
नागरिकों का दावा है कि शहर में हाल ही में बढ़ी चाकूबाजी और आपराधिक घटनाओं के पीछे नशे की आसान उपलब्धता एक बड़ा कारण है।
*विभागीय लापरवाही या मिलीभगत?*
सबसे गंभीर सवाल यह है कि वायरल वीडियो में विभागीय कर्मचारियों की मौजूदगी के बावजूद अवैध शराब कैसे बिकती रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि—कई शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई
सोशल मीडिया पर बार-बार वीडियो वायरल होने पर भी विभाग चुप है
*जिला प्रशासन ने भी अभी तक स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया*
लोगों का कहना है कि या तो विभाग में गंभीर लापरवाही है या फिर किसी स्तर पर मिलीभगत से यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
आबकारी अधिकारी रविंद्र खरे को फोन लगाया गया उनका कहना है कि अभी मैं एक माह की छुट्टी पर हूं फिलहाल इस संदर्भ में कुछ नहीं कह सकता लेकिन गांधी जी अभी चार्ज पर हैं आप उनसे बात कर लीजिए गांधी जी को फोन लगाया गया गांधी जी ने फोन रिसीव नहीं किया
*अब प्रशासन की ओर टिकी निगाहें*
शहर में बिगड़ते माहौल, अपराधों में वृद्धि और अवैध शराब कारोबार की बढ़ती शिकायतों के बीच अब लोगों को जिला प्रशासन और आबकारी विभाग से ठोस कदमों की उम्मीद है।
देखना यह होगा कि—क्या वायरल वीडियो और बढ़ती शिकायतों के आधार पर कठोर कार्रवाई होती है
या फिर यह मामला भी सिर्फ फाइलों और बयानबाज़ी में दबकर रह जाएगा l












































