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*गुणवत्ता-विहीन सामग्री खरीद का मामला गंभीर, संभाग आयुक्त ने दमोह डिप्टी कलेक्टर को किया निलंबित*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*गुणवत्ता-विहीन सामग्री खरीद का मामला गंभीर, संभाग आयुक्त ने दमोह डिप्टी कलेक्टर को किया निलंबित*

*जिले के डिप्टी कलेक्टर सामग्री खरीद फरोख्त मामले में दोषी*

*कितने और कर्मचारी सामग्री खरीद फरोख्त में लिफ्त है क्या उन पर होगी कार्रवाई*

दमोह।
जनजातीय कार्य विभाग में सामग्री खरीद से जुड़े कथित घोटाले और गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए संभाग आयुक्त अनिल सुचारी ने कड़े कदम उठाते हुए डिप्टी कलेक्टर एवं तत्कालीन प्रभारी जिला संयोजक, जनजातीय कार्य विभाग दमोह, ब्रजेश सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

यह कार्रवाई कलेक्टर दमोह द्वारा भेजे गए विस्तृत निलंबन प्रस्ताव के आधार पर की गई है।

कैसे सामने आया मामला?

वित्तीय वर्ष 2024-25 में संचालित अनुसूचित जाति छात्रावासों में उपयोग हेतु विभिन्न सामग्री का क्रय किया गया था। यह सामग्री अधीक्षकों द्वारा भेजे गए मांग पत्रों के आधार पर खरीदी गई थी। जांच के दौरान पाया गया कि—

खरीदी गई सामग्री मानकों के विपरीत और गुणवत्ता-विहीन थी।

कई वस्तुओं की क्वालिटी अनुमानित या निर्धारित स्तर की नहीं थी, जिससे छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

सामग्री क्रय में पारदर्शिता और गुणवत्ता की पुष्टि हेतु आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए।

प्रमुख नियमों का उल्लंघन

आदेश में कहा गया है कि इस प्रक्रिया में म.प्र. भण्डार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 (संशोधित 2022) के महत्वपूर्ण प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। विशेष रूप से—

नियम 17.4 का उल्लंघन

क्रय की गई सामग्री की गुणवत्ता संबंधी रिपोर्ट

उपार्जनकर्ता अभिकरण को

7 दिनों के भीतर ई-मेल या ई-पोर्टल के माध्यम से भेजना अनिवार्य था।

लेकिन जाँच में पाया गया कि यह रिपोर्ट समय पर नहीं भेजी गई, जिससे सामग्री की गुणवत्ता का सत्यापन नहीं हो सका।

जैम पोर्टल संचालन में भी अनियमितताएँ

जाँच में एक और महत्वपूर्ण लापरवाही उजागर हुई—

जैम (GEM) पोर्टल पर क्रय से जुड़े तीनों महत्वपूर्ण रोल
सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों को सौंप दिए गए थे,

जबकि इन प्रक्रियाओं में अनुभवी और उच्च अधिकारी की प्रत्यक्ष निगरानी अनिवार्य होती है।

इससे क्रय प्रक्रिया में पारदर्शिता, गुणवत्ता जांच और नियंत्रण की मूल प्रणाली प्रभावित हुई।

पर्यवेक्षण में लापरवाही

जाँच में स्पष्ट उल्लेख है कि—

क्रय प्रक्रिया का समुचित निरीक्षण नहीं किया गया,

कई महत्वपूर्ण अनुमोदनों और निरीक्षण बिंदुओं का पालन नहीं हुआ,

जिसके कारण यह संपूर्ण कार्रवाई नियमों के विरुद्ध तथा वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में पाई गई।

सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि ब्रजेश सिंह का यह कृत्य

म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965

एवं म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 का उल्लंघन है।

नियम 09 के अंतर्गत उन्हें निलंबित किया गया है।

निलंबन अवधि में नियम

निलंबन अवधि में—

ब्रजेश सिंह का मुख्यालय कमिश्नर कार्यालय/कलेक्टर कार्यालय (निर्धारित स्थान) में रहेगा,

उन्हें नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा,

वे बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।

प्रशासन में हलचल

इस कार्रवाई के बाद जिले के प्रशासनिक व जनजातीय कार्य विभाग में बड़ी हलचल देखी जा रही है।

छात्रावासों में रहने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों ने राहत की भावना व्यक्त की है।

सूत्रों के अनुसार अन्य स्तरों पर भी जांच जारी है और और भी संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

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