—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*“श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी” के जयघोष से गूंजा सिंग्रामपुर, विमान देवता की भक्ति भाव से हुई पूजा-अर्चना*
*जबेरा से प्रवीण दुबे की रिपोर्ट*
दमोह/सिंग्रामपुर। धार्मिक आस्था और भक्ति से सराबोर वातावरण में सिंग्रामपुर नगर में विमान देवता की विधि-विधान एवं श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान “श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव”, “राधे-राधे” और “जय श्री कृष्ण” के जयघोष से पूरा नगर भक्तिमय हो उठा। हवन-पूजन के पश्चात विमान देवता की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
विमान देवता की स्थापना सूरज प्रसाद राय, पुत्र रज्जू राय एवं मुकेश राय के घर पर विराजमान थी। यहां ग्राम आचार्य पंडित श्री नारायण प्रसाद दुबे जी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं हवन कराया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ हवन कुंड में आहुतियां अर्पित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की।
पूजन के बाद विमान देवता को श्रद्धापूर्वक शोभायात्रा के रूप में नगर भ्रमण कराया गया। शोभायात्रा में महिला, पुरुष, बच्चे और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए। धार्मिक भजनों, कीर्तन और जयकारों के बीच श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ शोभायात्रा में चलते नजर आए।
शोभायात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों द्वारा स्वागत किया गया। लोगों ने विमान देवता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और परिवार एवं क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। भक्ति गीतों और लगातार गूंजते जयकारों से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक और भक्तिमय बना रहा।
सामाजिक एकता और सनातन संस्कृति का संदेश
आयोजकों ने बताया कि ऐसे धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव को मजबूत करना तथा सनातन संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ाना है। समस्त ग्रामवासियों के विशेष सहयोग से आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर आयोजन को सफल बनाया।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन नजर आए। शोभायात्रा के समापन के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया गया।
पूरे आयोजन के दौरान “जय श्री कृष्ण”, “राधे-राधे” और “श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव” के जयघोष से सिंग्रामपुर का वातावरण भक्तिमय बना रहा।



















