—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*पटवारियों की भूमिका को लेकर मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने उठाए सवाल, कार्य-विभाजन और Farmer ID व्यवस्था में सुधार की मांग*
*पंचायत विभाग के कार्यों में पटवारियों को “निष्पादक” बनाए जाने पर आपत्ति, व्यक्तिगत कानूनी दायित्व बढ़ने की आशंका*
दमोह। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े विभिन्न कार्यों में पटवारियों की भूमिका को लेकर मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने सवाल उठाते हुए शासन का ध्यान कार्य-विभाजन, जिम्मेदारी और डिजिटल व्यवस्था से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं की ओर आकर्षित किया है। संघ की ओर से प्रस्तुत पत्र/अभ्यावेदन में विशेष रूप से पटवारियों को पंचायत स्तर के कुछ कार्यों में “निष्पादक” के रूप में जिम्मेदारी दिए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई गई है।
संघ का कहना है कि पटवारी का मूल दायित्व राजस्व अभिलेखों के संधारण, भूमि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने और आवश्यक मैदानी कार्यों से जुड़ा है। ऐसे में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यों में पटवारी की भूमिका निर्धारित करते समय यह स्पष्ट होना चाहिए कि वह केवल आवश्यक सहयोग एवं अभिलेखीय/मैदानी जानकारी उपलब्ध कराएगा या उसे किसी कार्य का निष्पादक अथवा निर्णयकर्ता बनाया जाएगा।
पंचायत और राजस्व विभाग के कार्यों का हो स्पष्ट विभाजन
अभ्यावेदन में कहा गया है कि ग्राम पंचायत एवं जनपद पंचायत स्तर पर संचालित विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारियां निर्धारित हैं। ऐसे में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित कार्यों में पटवारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दिए जाने से विभागीय कार्य-विभाजन प्रभावित होने की आशंका है।
संघ ने मांग की है कि राजस्व विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के बीच कार्यों और जवाबदेही का स्पष्ट निर्धारण किया जाए, ताकि भविष्य में किसी कार्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर यह तय करने में कठिनाई न हो कि संबंधित कार्य के लिए कौन अधिकारी अथवा कर्मचारी जिम्मेदार है।
पटवारी को “निष्पादक” बनाने पर सबसे बड़ी आपत्ति
अभ्यावेदन में पटवारी को डिजिटल पोर्टल अथवा किसी प्रशासनिक प्रक्रिया में “निष्पादक” के रूप में दर्ज किए जाने को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया है। संघ का तर्क है कि यदि किसी व्यवस्था में पटवारी का नाम, पद और पहचान एक निष्पादक के रूप में दर्ज होती है तो भविष्य में संबंधित भूमि, रिकॉर्ड अथवा हितग्राही से जुड़ा विवाद सामने आने पर व्यक्तिगत स्तर पर पटवारी की जवाबदेही तय किए जाने की स्थिति बन सकती है।
भूमि के क्षेत्रफल, नामांतरण, वारिसान, सीमांकन, बंटवारा, हस्तांतरण, कब्जे अथवा राजस्व अभिलेखों में किसी त्रुटि को लेकर विवाद उत्पन्न होने पर पटवारी से रिपोर्ट अथवा जानकारी ली जाती है। लेकिन संघ का कहना है कि ऐसी स्थिति में अंतिम निर्णय सक्षम राजस्व अथवा प्रशासनिक अधिकारी द्वारा नियमानुसार किया जाना चाहिए।
संघ ने इसी आधार पर पटवारी की भूमिका को सहयोगी एवं अभिलेखीय प्रकृति तक स्पष्ट रखने की मांग की है, ताकि उसे ऐसे अधिकार अथवा दायित्व का वहन न करना पड़े जो उसके निर्धारित अधिकार क्षेत्र से बाहर हो।
ग्राम आबादी से जुड़े कार्यों को लेकर भी उठे सवाल
पत्र में ग्राम आबादी क्षेत्र से संबंधित कार्यों का भी उल्लेख किया गया है। संघ के अनुसार ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत स्तर पर आबादी भूमि से जुड़े विभिन्न कार्यों, वितरण एवं संधारण की व्यवस्थाएं पूर्व से संचालित होती रही हैं।
ऐसे में संघ का मानना है कि पंचायत से संबंधित क्रियान्वयन एवं प्रशासनिक गतिविधियों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की भूमिका स्पष्ट रहनी चाहिए। इससे एक ही कार्य के लिए अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों के बीच जिम्मेदारी को लेकर भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी।
Farmer ID योजना में बढ़ते दायित्व पर भी चिंता
मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने किसान हितैषी Farmer ID योजना के क्रियान्वयन को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की है। अभ्यावेदन में कहा गया है कि Farmer ID तैयार करने की प्रक्रिया में पटवारियों की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है और मैदानी स्तर पर किसानों से संबंधित जानकारी जुटाने, उसका सत्यापन करने तथा डिजिटल प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है।
संघ का कहना है कि बड़ी संख्या में किसानों की जानकारी कम समय में तैयार करने की जिम्मेदारी के कारण पटवारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ रहा है। ऐसे में Farmer ID से संबंधित तकनीकी व्यवस्था, पोर्टल की कार्यप्रणाली, जिम्मेदारी और दायित्वों को स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
तकनीकी खामियों को दूर करने की मांग
अभ्यावेदन में नई डिजिटल एवं प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने से पहले मैदानी स्तर पर सामने आ रही तकनीकी समस्याओं का निराकरण करने की मांग की गई है।
संघ का कहना है कि पोर्टल या डिजिटल सिस्टम में तकनीकी त्रुटि के कारण यदि गलत जानकारी दर्ज होती है अथवा रिकॉर्ड में कोई समस्या उत्पन्न होती है तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी, यह पहले से स्पष्ट होना चाहिए।
मैदानी कर्मचारियों की व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखकर व्यवस्था तैयार करने तथा आवश्यक सुधारों के बाद ही उसे प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की गई है।
अनावश्यक अतिरिक्त दायित्व से मूल राजस्व कार्य प्रभावित होने की आशंका
पटवारी संघ ने यह भी मुद्दा उठाया है कि पटवारियों को लगातार अतिरिक्त विभागीय कार्य सौंपे जाने से उनके मूल राजस्व संबंधी दायित्व प्रभावित हो सकते हैं। पटवारी स्तर पर पहले से ही भूमि रिकॉर्ड, नामांतरण, सीमांकन, फसल एवं राजस्व संबंधी विभिन्न कार्य किए जाते हैं।
ऐसे में यदि पंचायत विभाग और अन्य योजनाओं से जुड़े अतिरिक्त कार्य भी बड़ी मात्रा में सौंपे जाते हैं तो कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता पर असर पड़ने की आशंका है। संघ ने शासन से इस पूरे विषय पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है।
जिम्मेदारी तय करने की स्पष्ट व्यवस्था की मांग
संघ की ओर से मूल रूप से मांग की गई है कि प्रत्येक योजना और प्रशासनिक प्रक्रिया में यह स्पष्ट किया जाए कि कौन अधिकारी निर्णय लेगा, कौन कार्य का निष्पादन करेगा और पटवारी की भूमिका किस स्तर तक रहेगी।
विशेष रूप से भूमि विवाद अथवा रिकॉर्ड संबंधी त्रुटि सामने आने पर व्यक्तिगत रूप से पटवारी को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अधिकार एवं दायित्व के अनुसार जिम्मेदारी निर्धारित करने की व्यवस्था बनाए जाने की मांग की गई है।
संघ की प्रमुख मांगें
– पटवारियों की भूमिका एवं अधिकार क्षेत्र स्पष्ट किया जाए।
– पंचायत एवं राजस्व विभाग के कार्यों का स्पष्ट विभाजन किया जाए।
– पटवारी को अनावश्यक रूप से “निष्पादक” अथवा अंतिम निर्णयकर्ता की भूमिका न दी जाए।
– डिजिटल पोर्टल की तकनीकी खामियों का निराकरण किया जाए।
– भूमि संबंधी विवादों में जिम्मेदारी निर्धारित करने की स्पष्ट प्रक्रिया बनाई जाए।
– Farmer ID प्रक्रिया में पटवारियों के कार्य एवं उत्तरदायित्व स्पष्ट किए जाएं।
– अतिरिक्त कार्यभार के कारण मूल राजस्व कार्य प्रभावित न हों।
– नई व्यवस्था लागू करने से पहले मैदानी कर्मचारियों की व्यावहारिक कठिनाइयों का समाधान किया जाए।
उल्लेखनीय है कि उपलब्ध पत्र के शीर्ष पर “मध्यप्रदेश पटवारी संघ” तथा “जिला अध्यक्ष, म.प्र. पटवारी संघ दमोह” का उल्लेख है। उपलब्ध प्रति में हस्ताक्षरकर्ता का व्यक्तिगत नाम स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा रहा है। इसलिए नाम की आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी व्यक्ति का नाम जोड़ना उचित नहीं होगा।
अब देखना होगा कि संघ की इन मांगों पर संबंधित विभाग शासन स्तर पर क्या दिशा-निर्देश जारी करता है और पंचायत तथा राजस्व विभाग के बीच कार्य-विभाजन को किस प्रकार स्पष्ट किया जाता है।





















