—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*मोदी के जन्मदिन पर दीप प्रज्ज्वलन को लेकर उठे सवाल पं. मनोज देवलिया ने आयोजन और सरकारी खर्च पर जताई आपत्ति*
*सरकारी अमले की ड्यूटी, तेल की खपत और यातायात व्यवस्था पर उठाए सवाल*
*कार्यक्रम समाप्त होते ही दीयों से तेल निकालने का काम शुरू होने का दावा*
दमोह। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आयोजन को लेकर पं. देवलिया ने आपत्ति जताते हुए कार्यक्रम में सरकारी अमले की ड्यूटी लगाए जाने, बड़ी संख्या में दीयों के लिए तेल की खपत तथा यातायात व्यवस्था में लगाए गए संसाधनों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
पं. देवलिया का कहना है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर इस तरह के आयोजन किए जाने को लेकर उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि किसी कार्यक्रम में सरकारी कर्मचारियों, प्रशासनिक संसाधनों और सार्वजनिक धन का इस्तेमाल होता है, तो उसकी आवश्यकता और औचित्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान सरकारी अमले की तैनाती और यातायात व्यवस्था में लगाए गए कर्मचारियों को लेकर भी सवाल उठाए।
तेल की खपत को लेकर भी सवाल
आयोजन में बड़ी संख्या में दीप जलाए जाने के कारण इस्तेमाल हुए तेल को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। पं. देवलिया ने सवाल उठाया कि इतने बड़े स्तर पर दीप प्रज्ज्वलन के लिए तेल की व्यवस्था किस स्तर पर और किस मद से की गई। उनका कहना है कि यदि इसमें सरकारी धन या किसी शासकीय संसाधन का इस्तेमाल हुआ है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
कार्यक्रम के बाद दीयों से तेल निकालने का दावा
वहीं, कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दीयों से तेल निकालने का काम शुरू होने की बात भी सामने आई है। इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आयोजन में इस्तेमाल किए गए तेल का बाद में किस प्रकार उपयोग किया गया और इसकी व्यवस्था किसके द्वारा की गई। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभाग या आयोजन से जुड़े अधिकारियों की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।
सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर मांगा जवाब
पं. देवलिया ने पूरे मामले में प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि कार्यक्रम में कितने सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई, यातायात व्यवस्था पर कितना सरकारी अमला लगाया गया तथा दीप प्रज्ज्वलन के लिए तेल सहित अन्य व्यवस्थाओं पर कितना खर्च हुआ। उनका कहना है कि यदि सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल हुआ है तो खर्च और व्यवस्था का विवरण सामने आना चाहिए।
फिलहाल यह मामला आयोजन के उद्देश्य से ज्यादा सरकारी संसाधनों और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर चर्चा में है।
अब देखना होगा कि प्रशासन या आयोजन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं।

















