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*पूर्व CSP नेहा पच्चीसिया की FIR निरस्तीकरण याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई, क्षितिज राज बारापात्रे को लेकर अभियोजन का बड़ा दावा*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*पूर्व CSP नेहा पच्चीसिया की FIR निरस्तीकरण याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई, क्षितिज राज बारापात्रे को लेकर अभियोजन का बड़ा दावा*

जबलपुर मप्र। पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया की ओर से दर्ज FIR को निरस्त कराने के लिए दायर याचिका पर बुधवार को जबलपुर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सह आरोपी क्षितिज राज बारापात्रे को लेकर जांच में सामने आई कथित जानकारी का उल्लेख किया गया, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया।

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के समक्ष दावा किया कि जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनके मुताबिक क्षितिज राज बारापात्रे कथित तौर पर नेहा पच्चीसिया के घर में उनके पति के रूप में रहता था। अभियोजन के अनुसार, जांच के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के बयान भी दर्ज किए गए, जिनमें क्षितिज को नेहा का पति बताया गया है।

घर का सामान पहुंचाने वाले कांस्टेबल की पेमेंट का भी दावा

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कथित तौर पर यह भी कहा कि नेहा के घर का सामान पहुंचाने वाले कांस्टेबल मोंटू की पेमेंट भी क्षितिज द्वारा की जाती थी। अभियोजन ने इन तथ्यों को जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों और बयानों के संदर्भ में कोर्ट के समक्ष रखा।

यह दावा उस समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया, जब नेहा पच्चीसिया की ओर से अदालत में कहा गया कि उनका क्षितिज राज बारापात्रे से कोई संबंध नहीं है।

अग्रिम जमानत के दौरान दोनों ने एक-दूसरे को पहचानने से किया था इनकार

मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह बताया जा रहा है कि जिला अदालत में अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज बारापात्रे दोनों की ओर से एक-दूसरे को पहचानने से इनकार किया गया था। वहीं, उस दौरान नेहा की ओर से अपनी टूटी हुई शादी और दो बच्चियों के पालन-पोषण की परिस्थितियों का भी हवाला दिया गया था।

अब हाई कोर्ट में अभियोजन की ओर से जांच के दौरान सामने आए कथित बयानों और तथ्यों का उल्लेख किए जाने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

नेहा की ओर से FIR को बताया गया आधारहीन

दूसरी ओर, हाई कोर्ट में नेहा पच्चीसिया की ओर से दलील दी गई कि FIR में उनकी भूमिका को साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है और उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है। उनकी ओर से FIR निरस्त करने की मांग करते हुए कहा गया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पर्याप्त आधार पर टिके नहीं हैं।

फिलहाल मामले में अदालत के समक्ष अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें महत्वपूर्ण हैं। अभियोजन द्वारा किए गए दावे जांच में सामने आए कथित बयानों एवं तथ्यों पर आधारित बताए गए हैं, जबकि नेहा पच्चीसिया की ओर से इन आरोपों और अपनी कथित भूमिका से इनकार किया गया है। मामले में हाई कोर्ट की आगे की कार्यवाही और आदेश पर नजर बनी हुई है।

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