तथाकथित पत्रकार की वायरल ऑडियो मैं पत्रकारों की छवि हो रही धूमिल
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विस्तृत खबर (दमोह से)
दमोह जिले में सीएम हेल्पलाइन (181) और आरटीआई के दुरुपयोग के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।
जनता की समस्याओं के समाधान और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के उद्देश्य से शुरू हुई सीएम हेल्पलाइन अब कई जगहों पर कमाई का साधन बनती नज़र आ रही है। शिकायत दर्ज करने के बाद पैसों का लेन-देन होना और फिर आवेदन को वापस लेना जिले में आम बात बन गई है।
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अधिकारियों पर दबाव मोटी रकम लेकर शिकायत वापस लेना
दमोह जिले के कई अधिकारी और कर्मचारी बताते हैं कि कुछ लोग पत्रकार या सामाजिक कार्यकर्ता का रूप लेकर बार-बार हेल्पलाइन (181) और आरटीआई लगाते हैं। बाद में मोटी रकम लेकर शिकायत वापस कर दी जाती है। कई बार तो शिकायतकर्ता अपने परिवार के सदस्यों और परिचितों के नाम से भी अलग-अलग शिकायतें दर्ज कर देते हैं, जिससे कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनता है।
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दमोह में बहुत से आरटीआई कार्यकर्ता और तथाकथित पत्रकार ऐसी हरकतें करते रहते है ब्लैकमेलिंग के ऐसे लोगों पर लगे आरोप
सूत्रों के अनुसार, ऐसे कई लोग सक्रिय हैं जो शिकायत लगाकर अधिकारियों को ब्लैकमेल करते हैं। अधिकारी न तो काम पर ध्यान दे पाते हैं और न ही मानसिक शांति से रह पाते हैं। परिणामस्वरूप, कई बार वे तनाव और अवसाद का शिकार हो जाते हैं।
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*शिक्षक की आत्महत्या ने उठाए थे गंभीर सवाल दो व्यक्ति बने आरोपी*
दमोह जिले के हटा में एक शिक्षक ने आत्महत्या कर ली थी। पुलिस जांच में सामने आया कि शिक्षक पर बार-बार की गई आरटीआई और शिकायतों के चलते मानसिक दबाव बढ़ गया था। शिक्षक ने लाखों रुपए का लेनदेन भी किया उसके बावजूद भी आईटीआई कार्यकर्ता नहीं माने शिक्षक को डराते धमकाते रहे शिक्षक परेशान होकर शिक्षक ने आत्महत्या कर ली इस मामले में एक आरटीआई कार्यकर्ता और वकील की भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद यह मुद्दा और गरम हो गया। और दोनों व्यक्तियों को पुलिस ने कस्टडी में लेकर आरोपी बनाया और जेल भेज दिया गया l
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वायरल ऑडियो से मचा बवाल अन्य पत्रकारों की छवि हो रही धूमिल
इसी बीच हाल ही में एक तथाकथित पत्रकार की ऑडियो वायरल हुई है। आरोप है कि शिकायत वापस लेने के लिए पैसों का लेन-देन तय हुआ था, लेकिन तय रकम लेने के बावजूद शिकायत वापस नहीं ली गई। इस विवाद के बाद संबंधित व्यक्ति ने कथित ऑडियो को वायरल कर दिया।
इस घटना ने न केवल प्रशासन बल्कि पत्रकारिता की साख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के कई वरिष्ठ पत्रकारों ने इस पर आक्रोश जताते हुए कहा है कि ऐसे लोग पूरे पत्रकार समुदाय की छवि धूमिल कर रहे हैं।
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*असली पीड़ितों की आवाज दब रही और बिचोलिया पैसा कमा रहे*
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि हेल्पलाइन और आरटीआई का मकसद जनता को न्याय दिलाना है। लेकिन यदि शिकायतें सौदेबाजी और पैसों के लेन-देन का जरिया बनेंगी, तो वास्तविक पीड़ितों की आवाज दब जाएगी और भ्रष्टाचार रोकने की बजाय यह व्यवस्था भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगी।
समाधान की ज़रूरत ही नहीं बल्कि झूठी शिकायत कर्ता के ऊपर सख्त कार्रवाई
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैकमेलिंग करने वाले व्यक्ति पर मामला दर्ज हो
शिकायत वापस लेने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
बार-बार झूठी या निराधार शिकायत करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
अधिकारियों को ब्लैकमेल करने वाले तथाकथित पत्रकारों और शिकायतकर्ताओं पर कानूनी कार्यवाही जरूरी है।
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दमोह जिले का यह मामला केवल स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। जनता की मदद के लिए शुरू हुई हेल्पलाइन यदि ब्लैकमेलिंग और वसूली का साधन बन जाएगी, तो न केवल अधिकारियों का मनोबल टूटेगा बल्कि आम जनता का भरोसा भी इस व्यवस्था से उठ जाएगा।
वायरल ऑडियो ने यह भी साबित कर दिया है कि व्यवस्था में सुधार और कड़ी निगरानी की तत्काल ज़रूरत है, ताकि ईमानदार अधिकारी और सच्चे पत्रकार दोनों की छवि सुरक्षित रह सके।














































