—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*गरीबों का निवाला डकार गए राशन माफिया दमोह में 1581 क्विंटल अनाज की लूट बेनकाब 44 राशन दुकानों में बड़ा घोटाला*
दमोह। जिस सरकारी राशन पर गरीब, मजदूर, बुजुर्ग, विधवाएं और जरूरतमंद परिवार अपनी दो वक्त की रोटी के लिए निर्भर हैं, उसी राशन पर कुछ भ्रष्ट राशन दुकान संचालकों ने डाका डाल दिया। जनसुनवाई और सोशल मीडिया पर लगातार मिल रही शिकायतों ने आखिरकार उस काले खेल का पर्दाफाश कर दिया, जिसमें गरीबों के हिस्से का हजारों क्विंटल खाद्यान्न गायब कर दिया गया।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के निर्देश पर जिले की 120 सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) राशन दुकानों का एक साथ आकस्मिक निरीक्षण कराया गया। प्रशासन द्वारा गठित 120 टीमों ने एक ही समय पर कार्रवाई की।
जांच के नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे। 44 राशन दुकानों में गंभीर अनियमितताएं मिलीं और 1581 क्विंटल खाद्यान्न की हेराफेरी उजागर हुई। यह केवल रिकॉर्ड की गलती नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकारों के साथ गंभीर खिलवाड़ का मामला माना जा रहा है।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह रही कि 37 राशन दुकानों में 10 क्विंटल से अधिक खाद्यान्न गायब मिला।
कई दुकानों में तो इतनी बड़ी मात्रा में अनाज का अंतर मिला कि यह सवाल खड़ा हो गया कि आखिर गरीबों के हिस्से का यह राशन गया कहां?
जांच में मड़ियादो क्रमांक-2 में 185 क्विंटल गेहूं और 8 क्विंटल चावल, मोहरा में 140 क्विंटल गेहूं और 32 क्विंटल चावल, लरगुवां में 87 क्विंटल गेहूं और 27 क्विंटल चावल, सेवा सभा आंजनी में 63 क्विंटल गेहूं और 4 क्विंटल चावल, सहजपुर में 62 क्विंटल गेहूं और 15 क्विंटल चावल, सेवा सभा पोड़ी मानगढ़ में 56 क्विंटल गेहूं और 8 क्विंटल चावल, फुटेरा कला क्रमांक-1 में 45 क्विंटल गेहूं और 35 क्विंटल चावल, सुनकड़ में 42 क्विंटल गेहूं और 10 क्विंटल चावल, मराहार में 40 क्विंटल गेहूं और 10 क्विंटल चावल, किल्लाई में 33 क्विंटल गेहूं और 4 क्विंटल चावल तथा सतपारा में 32 क्विंटल गेहूं और 32 क्विंटल चावल का भारी अंतर मिला।
पूरे घोटाले का खुलासा पीओएस (POS) मशीन में दर्ज ऑनलाइन स्टॉक और मौके पर उपलब्ध वास्तविक खाद्यान्न के मिलान से हुआ। जहां मशीन में अनाज उपलब्ध दिखाया गया, वहीं गोदाम और दुकान में वह अनाज मौजूद नहीं मिला। इससे स्पष्ट हुआ कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर है, जिसकी जांच अब प्रशासनिक कार्रवाई का आधार बनेगी।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि संबंधित राशन दुकानों के संचालकों को आवश्यक वस्तु अधिनियम एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश के तहत नोटिस जारी कर कठोर कार्रवाई की जाए। यदि जांच में अनियमितताएं सिद्ध होती हैं, तो लाइसेंस निरस्त करने, एफआईआर दर्ज कराने और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
यह मामला केवल अनाज की हेराफेरी का नहीं है, बल्कि उन लाखों निवालों का है जो गरीब परिवारों की थाली तक पहुंचने चाहिए थे। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं होगा। यदि गरीबों के हिस्से का राशन बेचकर निजी लाभ कमाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा।
कलेक्टर ने जिले के नागरिकों से भी अपील की है कि यदि किसी भी राशन दुकान पर कम राशन दिया जाता है, राशन देने से मना किया जाता है, अंगूठा लगवाकर राशन नहीं दिया जाता या किसी अन्य प्रकार की गड़बड़ी होती है, तो उसकी शिकायत तुरंत जनसुनवाई, सोशल मीडिया या प्रशासन के माध्यम से दर्ज कराएं।
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।











































