—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
*सिंगौरगढ़ किले का वर्षों पुराना रास्ता बंद वैकल्पिक मार्ग का इंतजार*
*जबेरा से प्रवीण दुबे की रिपोर्ट*


*भू-स्वामी द्वारा गेट लगाए जाने से ऐतिहासिक धरोहर तक पहुंचना हुआ मुश्किल*
*ग्रामीणों ने प्रशासन से रास्ता खुलवाने या वैकल्पिक मार्ग की मांग की*
सिंग्रामपुर। दमोह जिले की ऐतिहासिक धरोहर सिंगौरगढ़ किला एवं जलाशय तक पहुंचने वाला वर्षों पुराना कच्चा रास्ता बंद होने से ग्रामीणों और पर्यटकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग करीब 100 वर्षों से आवागमन के लिए उपयोग में लिया जाता रहा है। मुख्य सड़क से लगभग चार किलोमीटर अंदर स्थित इस मार्ग से आसपास के जिलों सहित दूर-दराज से आने वाले लोग सिंगौरगढ़ किले तक पहुंचते थे।
बताया जा रहा है कि संबंधित भू-स्वामी द्वारा अपनी भूमि पर गेट लगाकर रास्ते को बंद कर दिया गया है। इसके बाद किले तक पहुंचने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के सामने आवागमन को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सिंगौरगढ़ जैसे ऐतिहासिक एवं पर्यटन महत्व वाले स्थल तक पहुंचने के लिए सुगम मार्ग होना जरूरी है।
जमीन की नाप-जोख के बाद बंद हुआ रास्ता
ग्रामीणों के अनुसार किले की ओर जाने वाला रास्ता जिस भूमि से होकर गुजरता है, वह वर्तमान राजस्व अभिलेखों में निजी भूमि के रूप में दर्ज है। राजस्व विभाग की टीम और पटवारी द्वारा भूमि की नाप-जोख किए जाने के बाद संबंधित भू-स्वामी द्वारा रास्ते पर गेट लगा दिया गया, जिसके चलते आम लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया।
पटवारी ने बताया राजस्व रिकॉर्ड का विवरण
सिंग्रामपुर पटवारी देवेंद्र जाटव के अनुसार वर्तमान नक्शे में दर्ज खसरा नंबर मूल खसरा नंबर 13 से संबंधित है। मूल खसरा नंबर 13 का वटांकन किए जाने के बाद इसे 13/1, 13/2, 13/3 और 13/4 के रूप में दर्ज किया गया है।
पटवारी के मुताबिक राजस्व अभिलेखों में इन वटांकित खसरों के अंतर्गत अलग-अलग भूमि स्वामियों के नाम दर्ज हैं। इनमें आदित्य सोलोमन, डिसएबल चर्च एवं इंदू पति योगी उदय के नाम भूमि स्वामी के रूप में दर्ज बताए गए हैं।
पुराना रास्ता बंद तो वैकल्पिक मार्ग की जरूरत
रास्ता बंद होने के बाद ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर उचित समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पुराना रास्ता निजी भूमि से संबंधित होने के कारण उपलब्ध नहीं कराया जा सकता, तो शासन-प्रशासन को सिंगौरगढ़ किले तक पहुंचने के लिए स्थायी और सुविधाजनक वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करनी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि सिंगौरगढ़ क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किए जाने के प्रयास चल रहे हैं। ऐसे में ऐतिहासिक धरोहर तक पहुंचने वाला मार्ग बाधित होना पर्यटन गतिविधियों के लिए भी चिंता का विषय है।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर ऐसा रास्ता उपलब्ध कराने की मांग की है, जिससे पर्यटकों और आम नागरिकों की सिंगौरगढ़ किले तक आवाजाही सुचारु रूप से बनी रहे।





















