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*स्कूलों में शिक्षकों की कमी, DEO कार्यालय में अटैचमेंट से बढ़ी परेशानी आखिर किसके आदेश पर!*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*स्कूलों में शिक्षकों की कमी, DEO कार्यालय में अटैचमेंट से बढ़ी परेशानी आखिर किसके आदेश पर!*

*काँटी के अंग्रेजी शिक्षक को मडियादो का प्रभारी प्राचार्य बनाने से 11वीं-12वीं की पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप शिक्षकों के संलग्नीकरण पर भी सवाल*

दमोह। जिले की शासकीय शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों के पदस्थापन, संलग्नीकरण और प्रभारी प्राचार्य बनाए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

सामने आए मामलों में आरोप है कि एक ओर शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को विषयवार शिक्षकों की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर कुछ शिक्षकों को उनकी मूल शाला से हटाकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कार्य कराया जा रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

*काँटी के अंग्रेजी शिक्षक को मडियादो का प्रभारी प्राचार्य बनाने पर सवाल*

जानकारी के अनुसार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय काँटी में पदस्थ उच्चतर माध्यमिक शिक्षक रवि दुबे, जो अंग्रेजी विषय का अध्यापन कराते हैं, को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मडियादो में संकुल प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी दी गई है।

बताया जा रहा है कि मडियादो विद्यालय में पहले से ही कई उच्चतर माध्यमिक शिक्षक पदस्थ हैं। ऐसे में काँटी विद्यालय के अंग्रेजी शिक्षक को मडियादो में प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद काँटी में कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों की अंग्रेजी विषय की पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप लगाया जा रहा है।

सवाल यह है कि यदि रवि दुबे को प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी दी गई है तो काँटी विद्यालय में अंग्रेजी विषय के अध्यापन की वैकल्पिक व्यवस्था किस शिक्षक के माध्यम से की गई है?

खासतौर पर बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों के हित में विभाग ने क्या व्यवस्था की है, यह स्पष्ट होना चाहिए।

*पेपर लीक प्रकरण से जुड़े आरोपों की भी चर्चा*

इसी मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि संबंधित शिक्षक का नाम पूर्व में बोर्ड परीक्षा के पेपर लीक प्रकरण से जोड़कर चर्चा में रहा है। हालांकि इस संबंध में वास्तविक तथ्य, जांच की स्थिति अथवा किसी विभागीय कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी स्पष्ट होना आवश्यक है।

ऐसे में शिक्षा विभाग से अपेक्षा है कि वह स्पष्ट करे कि संबंधित मामले में कोई प्राथमिकी, विभागीय जांच, आरोप-पत्र अथवा अन्य कार्रवाई हुई है या नहीं और यदि कोई प्रकरण लंबित है तो प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी दिए जाने का आधार क्या रहा।

*पदोन्नति के बाद भी DEO कार्यालय में काम कराने का आरोप*
दूसरा मामला जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय दमोह में कार्यरत लिपिक संवर्ग से जुड़ा बताया जा रहा है।

आरोप है कि कुछ कर्मचारियों की पदोन्नति होने के बाद भी उन्हें उनके नए पदस्थापन वाले कार्यालय में कार्यभार ग्रहण कराने के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ही कार्य कराया जा रहा है।

यदि पदोन्नति के बाद नवीन पदस्थापन आदेश जारी हुए हैं तो संबंधित कर्मचारियों को किस आदेश अथवा नियम के तहत वर्तमान कार्यालय में कार्य कराया जा रहा है, यह भी विभागीय स्तर पर स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

इसी क्रम में प्राथमिक शिक्षक हिमांशु पांडे को उनकी मूल शाला में अध्यापन कार्य कराने के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संलग्न कर कार्य कराए जाने का आरोप है।

सवाल यह है कि जब शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए शिक्षकों की आवश्यकता है, तो शिक्षकों को उनके मूल शैक्षणिक दायित्व से हटाकर कार्यालयीन कार्य में लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?

इसके अलावा मनीष नेमा सहित अन्य उच्चतर माध्यमिक शिक्षकों के भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संलग्नीकरण की चर्चा है। यदि ये शिक्षक विद्यालयों में नियमित विषयवार अध्यापन के लिए पदस्थ हैं, तो उनके कार्यालय में संलग्नीकरण से संबंधित विद्यालयों में विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ने वाले प्रभाव का विभागीय स्तर पर परीक्षण किया जाना जरूरी है।

*संभाग सागर के अधिकारी ने कार्रवाई का दिया आश्वासन*
इन मामलों को लेकर जब संभाग सागर से आए जेड विशेन से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि वे मुख्य रूप से 181 सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का मूल्यांकन करने के लिए दमोह आए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरान मीडिया के माध्यम से सामने आई अन्य जानकारियां भी उनके संज्ञान में आई हैं, जिन पर विभागीय स्तर पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी के अनुसार, सामने आए मामलों की जानकारी लेकर आवश्यक परीक्षण किया जाएगा और संबंधित शिकायतों एवं बिंदुओं पर बहुत जल्द कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारी का यह आश्वासन ऐसे समय आया है जब शिक्षकों के संलग्नीकरण, पदस्थापन और प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

इन मामलों के सामने आने के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या शिक्षकों के संलग्नीकरण और पदस्थापन की पूरी प्रक्रिया विभागीय नियमों के अनुरूप है और क्या इससे किसी विद्यालय में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

अब संभागीय अधिकारियों द्वारा इन मामलों की जांच और प्रस्तावित कार्रवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

शिक्षा विभाग से अपेक्षा है कि वह शिक्षकों के संलग्नीकरण, पदस्थापन आदेश, वैकल्पिक अध्यापन व्यवस्था तथा संबंधित शिकायतों की स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और विभागीय प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान हो सके।

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