दमोह जिले के पटेरा क्षेत्र में सामने आए घोटालों में, पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों पर मिलकर सरकारी फंड में हेराफेरी करने का आरोप लगा है।
इन मामलों में, कागजों पर तालाबों का निर्माण दिखाकर और फर्जी मजदूरों के नाम पर लाखों रुपये निकाले गए हैं।
फर्जी तालाब और 3.88 लाख का गबन
पटेरा जनपद पंचायत की एक ग्राम पंचायत में तीन तालाब कागजों में बना दिए गए।
हैरानी की बात यह है कि मौके पर कोई तालाब मौजूद ही नहीं है। इस फर्जीवाड़े में, कथित तौर पर सरपंच, सचिव और उप-सरपंच की मिलीभगत से 3,88,629 रुपये की राशि निकाल ली गई।
इसमें से 1,77,480 रुपये फर्जी मजदूरों के नाम पर निकाले गए, जबकि बाकी की राशि फर्जी बिलों के जरिए गबन की गई।
इस घोटाले में उपयंत्री और सहायक इंजीनियर पर भी आरोप लगे हैं।
फर्जी आईडी से 3.88 लाख की मजदूरी हड़पी
एक अन्य मामले में, एक पंचायत पर फर्जी आईडी और दस्तावेजों का उपयोग करके मजदूरों के नाम पर 3.88 लाख रुपये की मजदूरी हड़पने का आरोप है।
जब जांच की गई, तो पता चला कि जिन जगहों पर तालाब बनने थे, वहां कोई काम नहीं हुआ था।
इस मामले में भी पंचायत के तत्कालीन सचिव और उप-इंजीनियर की मिलीभगत की बात सामने आई है।
इन दोनों मामलों के सामने आने के बाद, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने जांच के आदेश दिए हैं।
दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए नोटिस भी जारी किया गया है। यह घटनाएं दिखाती हैं
कि कैसे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है,
जिससे आम लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ये खबरें भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करती हैं। क्या आप जानना चाहेंगे कि ऐसी धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार ने कौन से कदम उठाए हैं?












































