—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
कफ सिरप कांड: कोर्ट में ‘फांसी दो’ के लगे नारे — कंपनी मालिक बोला, “बीमार हूं, मुझे राहत दी जाए”

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप से हुई 22 मासूम बच्चों की मौत के बाद पूरे देश में गुस्सा उबाल पर है। इस मामले में गिरफ्तार श्रीसेन फार्मा कंपनी के मालिक रंगनाथन गोविंदन को एसआईटी ने चेन्नई से ट्रांजिट रिमांड पर लाकर शनिवार सुबह परासिया की एडीजे कोर्ट में पेश किया।
‘फांसी दो’ के नारों से गूंजा कोर्ट परिसर
भारी सुरक्षा के बीच जब पुलिस रंगनाथन को कोर्ट लेकर पहुंची, तो गेट के बाहर मौजूद भीड़ ने देखते ही जोरदार नारे लगाने शुरू कर दिए — “फांसी दो, फांसी दो”। लोगों में बच्चों की मौत को लेकर गहरा आक्रोश देखने को मिला।
इस दौरान अफरा-तफरी में आरोपी का चश्मा गिर गया, जिसे पुलिसकर्मियों ने उठाया और अदालत कक्ष में उसे वापस दिया गया।
आरोपी बोला – “मैं निर्दोष हूं, बीमार हूं”
कोर्ट में पेशी के दौरान आरोपी रंगनाथन ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा —
> “हमारी दवाइयां तीन राज्यों में सप्लाई होती हैं। मैं बीमार हूं, कृपया मुझे राहत दी जाए।”
जब न्यायाधीश ने पूछा कि क्या उसे वकील चाहिए, तो आरोपी ने जवाब दिया कि —
> “मैं चेन्नई से अपना वकील बुलवाऊंगा।”
एडीजे शैलेन्द्र उइके ने सुनवाई के बाद आरोपी को 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
चेन्नई से छिंदवाड़ा तक ट्रांजिट रिमांड यात्रा
एसआईटी प्रमुख जितेंद्र जाट के अनुसार, आरोपी को गुरुवार को चेन्नई से गिरफ्तार किया गया था।
उसे हवाई मार्ग से चेन्नई → बेंगलुरु → नागपुर होते हुए लाया गया, फिर सड़क मार्ग से परासिया थाने तक पहुंचाया गया।
थाने में करीब 5 घंटे तक पूछताछ के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया।
मृत बच्चों की त्रासदी — किडनी फेल्योर से जुड़ी आशंका
अब तक 22 बच्चों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की मौत किडनी फेल्योर के कारण हुई, जिसका सीधा संबंध विषाक्त कफ सिरप से हो सकता है।
कुछ बच्चे अब भी नागपुर (महाराष्ट्र) के अस्पतालों में भर्ती हैं।
सरकारी कार्रवाई — अधिकारी निलंबित, डॉक्टर गिरफ्तार
घटना के बाद राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए —
दो ड्रग इंस्पेक्टरों और एफडीए उपनिदेशक को निलंबित कर दिया,
राज्य ड्रग कंट्रोलर का तबादला किया गया,
वहीं डॉ. प्रवीण सोनी, जिन पर लापरवाही के आरोप हैं, को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
डॉ. सोनी की जमानत याचिका परासिया कोर्ट ने खारिज कर दी।
उनकी गिरफ्तारी के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने काली पट्टियां बांधकर विरोध दर्ज कराया।
पीड़ित परिवारों का दर्द और समाज का आक्रोश
पीड़ित परिवारों का कहना है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
मासूमों की मौत ने पूरे समाज को झकझोर दिया है — सोशल मीडिया और स्थानीय संगठनों में लोग “दवा कंपनियों पर सख्त नियंत्रण” की मांग उठा रहे हैं।
न्यायालय ने आरोपी को 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजते हुए एसआईटी को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
जांच एजेंसी अब कंपनी के प्रोडक्शन, सैंपल रिपोर्ट और सप्लाई चेन की गहराई से जांच कर रही है।












































