—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
—– धर्मेंद्र मिश्रा की रिपोर्ट —–
???? जबलपुर के शिवनगर में श्रीमद् भागवत कथा का तृतीय दिवस — माँ देवहुति और भगवान कपिल देव संवाद से गुंजायमान हुआ पंडाल
जबलपुर। शिवनगर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस पर भक्तिमय वातावरण छा गया, जहाँ धर्म, ज्ञान और भक्ति की गंगा एक साथ प्रवाहित हुई।


वृंदावन धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथा व्यास पंडित घनश्याम मिश्रा जी महाराज ने आज भागवत के तृतीय स्कंध का दिव्य प्रसंग सुनाया — जिसमें मनु महाराज की कन्या देवहुति और ब्रह्मा जी की छाया से उत्पन्न कर्दम मुनि के पावन जीवन का वर्णन किया गया।
पंडित जी ने कथा सुनाते हुए कहा कि जब मनु महाराज ने अपनी कन्या देवहुति का विवाह कर्दम मुनि से किया, तब दोनों ने दिव्य योगबल से नौ कन्याओं को जन्म दिया, और फिर दसवीं संतान के रूप में स्वयं भगवान विष्णु ने कपिल देव के रूप में अवतार लिया।
भगवान कपिल देव के जन्म के साथ ही कर्दम मुनि अपने वचन के अनुसार पुनः वन में तपस्या के लिए चले गए।
कथा में आगे बताया गया कि एक दिन माता देवहुति ने अपने पुत्र भगवान कपिल देव को स्नान आदि कराकर बड़े विनम्र भाव से प्रश्न किया —
हे प्रभु! यह बताइए कि मनुष्य संसार की भोग-वासनाओं से कैसे मुक्त हो सकता है?
क्या आत्मा मरती है या शरीर? और मुक्ति का सच्चा मार्ग क्या है?”
तब भगवान कपिल देव ने अपनी माता को सांख्य दर्शन का उपदेश दिया, जिसमें उन्होंने आत्मा और शरीर के भेद, प्रकृति और पुरुष के तत्व, तथा ज्ञान-वैराग्य से मुक्ति का मार्ग स्पष्ट किया।
पंडित घनश्याम मिश्रा जी ने भक्तों से कहा कि —
मनुष्य जब स्वयं को शरीर मानकर जीता है, तब वह मोह और दुःख में बँध जाता है
लेकिन जब वह स्वयं को आत्मा समझकर ईश्वर से जुड़ता है, तभी सच्चा आनंद और मुक्ति प्राप्त करता है।
कथा स्थल पर उपस्थित भक्तजन ‘जय श्री कपिल देव भगवान की जय’ के जयघोष के साथ भाव-विभोर हो उठे।
कथा के दौरान वातावरण मंत्रोच्चार, भजन और करुणा भरे संगीत से गूंजता रहा।
इस पावन कथा का आयोजन शिव शक्ति महिला मंडल, शिवनगर के तत्वावधान में किया जा रहा है।
हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार सहित कथा श्रवण के लिए पहुँच रहे हैं और भागवत की अमृतधारा में गोता लगा रहे हैं।
आयोजन समिति द्वारा भक्तों के लिए प्रसाद वितरण और भक्ति संगीत संध्या का भी विशेष प्रबंध किया गया है।












































