कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय नरसिंहगढ़ में अव्यवस्थाओं के आरोप, कर्मचारी परेशान
जिनेश जैन की रिपोर्ट दमोह
दमोह, मध्य प्रदेश।
जनपद शिक्षा केंद्र पथरिया के अंतर्गत संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, नरसिंहगढ़ में व्यवस्थाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। छात्रावास कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की ओर से कई आरोप लगाए जा रहे हैं कि छात्रावास संचालन में गंभीर अनियमितताएँ हो रही हैं। सूत्रों की मानें तो मुख्य छात्रावास अधीक्षिका लंबे समय से मुख्यालय में उपस्थित नहीं रहतीं, जिससे विद्यालय में प्रशासनिक असंतुलन की स्थिति बनी हुई है।
विद्यालय में पदस्थ सहायक वार्डन श्रीमती पूजा ठाकुर, जिनके पति भारतीय सेना में सीमा पर तैनात हैं, बच्चियों की देखरेख की ज़िम्मेदारी निभा रही हैं। बताया जाता है कि अधीक्षिका की अनुपस्थिति के कारण अधिकांश कार्यभार उन्हीं पर आ जाता है, जिसका असर उनके दिनचर्या व कार्यस्थितियों पर दिखाई दे रहा है।
सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, सहायक वार्डन कई बार अपने वरिष्ठ अधिकारियों से सहायता और व्यवस्था सुधार के लिए प्रयास कर चुकी हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि छात्रावास में पदस्थ अधीक्षिका का संचालन उनके पति करते हैं। कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि—
विद्यार्थियों, कर्मचारियों और आगंतुकों से मिलने-जुलने के मामलों में अधीक्षिका की ओर से प्रतिस्थापन में उनके पति ही सामने आते हैं।
फोन कॉल्स भी कई बार अधीक्षिका की जगह उनके पति द्वारा उठाए जाने की बात कही जाती है।
छात्रावास के प्रशासनिक निर्णयों में भी कथित तौर पर उन्हीं की भूमिका अधिक होती है।
हालाँकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ कर्मचारियों एवं अन्य लोगों ने यह दावा किया है कि अधीक्षिका के पति स्थानीय राजनीतिक प्रभाव और मंत्री-स्तर के संपर्कों का उपयोग करते हैं, जिससे छात्रावास के कर्मचारियों में भय और दमन की स्थिति बनी हुई है। कई कर्मचारियों का कहना है कि—
“मंत्री महोदय के नाम का भय दिखाकर दबाव बनाया जाता है।”
“विरोध करने पर कार्रवाई की धमकी दी जाती है।”
“इतना दबदबा है कि कोई शिकायत करने का साहस नहीं करता।”
सूत्रों का यह भी कहना है कि डीपीसी कार्यालय से जारी आधिकारिक संचार में अधीक्षिका के पति को ‘माननीय’ संबोधन किया गया, जिससे कर्मचारी अपने को असहज महसूस करते हैं।
छात्रावास के चौकीदार ने भी अव्यवस्थाओं और दबाव के चलते मानसिक तनाव की बात कही। बताया जाता है कि उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा है कि वह जनवरी तक नौकरी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।
उनके अनुसार छात्रावास में अनुशासनहीनता और असुविधाजनक वातावरण ने उनका काम करना मुश्किल कर दिया है।
यह भी स्पष्ट है कि अभी तक इन मामलों में किसी भी कर्मचारी द्वारा औपचारिक लिखित शिकायत प्रस्तुत नहीं की गई है। अधिकतर बातें अनौपचारिक चर्चाओं और स्थानीय स्तर पर उठाई जा रही समस्याओं के रूप में सामने आई हैं।
अधिकारी स्तर पर जाँच के बिना अंतिम निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है, लेकिन घटनाक्रम ने स्थानीय जनाक्रोश और चर्चा को बढ़ा दिया है।
जिम्मेदार विभागों—जनपद शिक्षा केंद्र, डीपीसी कार्यालय, जिला प्रशासन—की ओर से यदि तुरंत तथ्यात्मक जाँच की शुरुआत नहीं की जाती, तो इससे आवासीय विद्यालय के संचालन और छात्राओं की सुरक्षा पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।














































