—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—
दमोह देहात में अंधे कत्ल का 72 घंटे में पर्दाफाश
फसल विवाद से उपजी रंजिश में की गई थी मुकेश यादव की हत्या
दमोह देहात पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए मात्र 72 घंटों के भीतर अंधे कत्ल (Blind Murder) की जटिल गुत्थी सुलझा ली। बिना किसी प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह और बिना प्रारंभिक सुरागों के, पुलिस ने वैज्ञानिक जांच, तकनीकी विश्लेषण और सूक्ष्म पूछताछ के आधार पर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या के कारणों और घटनाक्रम का खुलासा किया।
घटना की गंभीरता, ग्रामीण क्षेत्र में हत्या का होना, और आरोपियों द्वारा घटना को छुपाने की कोशिश को देखते हुए यह उपलब्धि पुलिस की सतर्कता और कुशलता को दर्शाती है।
दिनांक 12 नवंबर 2025 की सुबह लगभग 7:00 बजे दमोह देहात के लाडन बाग क्षेत्र में स्थित बरिया वाले खेत के समीप एक व्यक्ति का रक्तरंजित शव मिलने की सूचना स्थानीय ग्रामीणों द्वारा पुलिस को दी गई।
पुलिस मौके पर पहुँची और पाया कि मृतक की पहचान मुकेश यादव (उम्र 52 वर्ष) निवासी पुराना आरटीओ के पास दमोह के रूप में हुई। मृतक को कुल्हाड़ी से कई वार कर निर्ममता से हत्या की गई थी।
हत्या की प्रकृति, शरीर पर लगे गहरे घाव, और आसपास संघर्ष के निशान यह संकेत दे रहे थे कि हत्या योजनाबद्ध थी और अपराधी मृतक को भली-भाँति जानते थे।
प्रथमदृष्टया कोई भी प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिला और न ही मृतक का कोई मोबाइल या अन्य वस्तु गायब थी।
यह मामला पूर्णत: अंधा कत्ल प्रतीत हो रहा था।
उपस्थित तथ्यों के आधार पर जबलपुर नाका चौकी व थाना दमोह देहात ने धारा 103(1) बीएनएस के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया।
हत्या की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने तत्काल विशेष टीमें गठित कीं।
जांच को तीन मुख्य हिस्सों में विभाजित किया गया
1. घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण
खेत में पैरों के निशान, वाहन के टायर मार्क, रक्त के छींटे और संघर्ष स्थल का विश्लेषण किया गया।
मृतक के कपड़ों और शरीर से मिले साक्ष्यों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया।
खेत के किनारे से कुल्हाड़ी जैसी तेजधार हथियार के चलने और शरीर को घसीटे जाने के संकेत मिले।
2. तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण
मृतक और स्थानीय संदिग्धों के मोबाइल फोन की सीडीआर (Call Detail Record) और लोकेशन ट्रेसिंग की गई।
पुलिस ने ग्रामीण क्षेत्र में लगे CCTV और हाइवे के कैमरों के फुटेज खंगाले।
तकनीकी टीम ने घटना के आसपास के घंटों में मौजूद मोबाइल नंबरों का डंप डेटा एनालिसिस किया।
3. मानवीय सूचना और पड़ताल
मृतक के परिवार, परिचितों और खेती से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई।
यह पता लगाया गया कि किसी के साथ कोई पुराना विवाद, आर्थिक तनाव या साझेदारी का झगड़ा तो नहीं था।
मृतक के खेत और फसल से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया।
सुराग कैसे मिला – विवाद की कड़ी से खुला मामला
जांच में खुलासा हुआ कि मृतक मुकेश यादव और आरोपी राजा उर्फ बाबा निवासी पिपरिया अहीर के बीच खेती की फसल को लेकर लंबे समय से तनाव चल रहा था।
दोनों ने मिलकर जमीन ली थी और मक्का (मका) की फसल बोई थी।
फसल में हुए नुकसान के बाद हिस्से का भुगतान और घाटा किसके हिस्से में आएगा, इस बात को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा था।
कुछ दिन पहले आरोपी राजा मक्का से भरी ट्रॉली लेकर जा रहा था, जिसे मृतक ने:
रास्ते में रोका,ट्रॉली वापस खेत में उतरवाई,और राजा को डांटते हुए फसल के बंटवारे पर सवाल उठाए।
यह घटना आरोपी के लिए अपमानजनक और आर्थिक नुकसान की वजह भी बनी।
यही रंजिश हत्या का मूल कारण बनी।
*गिरफ्तारी और आरोपियों का खुलासा*
पुलिस ने तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया।
लंबी पूछताछ के बाद अपराध स्वीकारते हुए उन्होंने पूरा घटनाक्रम बताया:
तीनों ने मिलकर हत्या की योजना बनाई
घटना वाले दिन सुबह-सुबह मृतक मुकेश यादव खेत की ओर जा रहा था आरोपियों ने मौका पाकर उसे रोक लिया पूर्व विवाद को लेकर बहस हुई
झगड़े के दौरान मुख्य आरोपी राजा उर्फ बाबा ने मुकेश पर कुल्हाड़ी से कई वार किए मुकेश मौके पर ही गिरकर मृत हो गया
घटना को दुर्घटना जैसा दिखाने और छुपाने की कोशिश भी की गई, परंतु पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने उनके इरादे नाकाम कर दिए।
मामले का सफल पर्दाफाश—इनकी मेहनत से संभव हुआ
इस सफलता के पीछे पुलिस टीम की कड़ी मेहनत रही। प्रमुख रूप से शामिल अधिकारी-कर्मचारी:
अधिकारी
निरीक्षक रचना मिश्रा
उप-निरीक्षक सुनीता कुर्मी
स.उ.नि. अकरम खान
स.उ.नि. अभय सिंह
आरक्षक व अन्य टीम सदस्य
सचिन, सुमन, आलोक, नंदलाल, जालम, रामकुमार, रूपेश, दीपक, प्रताप, गौरव, हेतराज, कमल, शुभम, अभिषेक, सुरेन्द्र, कमल, महेन्द्र, निकिता, नितिन, यादवेंद्र, राहुल सैनिक महफूज़
बबलू
*महिला आरक्षक रेखा प्रभा*
*साइबर तकनीकी टीम*
आर. सौरव राकेश मयंक
इन सभी की सामूहिक मेहनत से यह कठिन केस कम समय में सुलझा।
दमोह देहात में हुए इस अंधे कत्ल का 72 घंटे में खुलासा किया
पुलिस की इस उपलब्धि से क्षेत्र में सुरक्षा की भावना और विश्वास दोनों मजबूत हुए हैं।













































