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*लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाएँ, लोक निर्माण विभाग की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज़ दमोह—

*लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाएँ, लोक निर्माण विभाग की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल*

***तेंदूखेड़ा से मुकेश जैन की रिपोर्ट***

दमोह/तेंदूखेड़ा/झलौन नगर से लगभग 31 किलोमीटर दूर तारादेही–महाराजपुर मार्ग पर झमरा गांव के समीप स्थित जर्जर पुलिया एक बार फिर दुर्घटना का कारण बन गई। गुरुवार को क्षतिग्रस्त पुलिया से गुजरते समय एक ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे उसमें सवार कई लोग घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को बाहर निकाला और उन्हें उपचार हेतु नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।

गनीमत रही कि इस दुर्घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार उक्त पुलिया की हालत लंबे समय से अत्यंत खराब बनी हुई थी। पुलिया पर गहरे गड्ढे, टूटी हुई रेलिंग तथा किसी भी प्रकार के चेतावनी संकेतों का अभाव था। इसके बावजूद लोक निर्माण विभाग द्वारा न तो समय रहते मरम्मत कराई गई और न ही सुरक्षा के लिए आवश्यक संकेतक लगाए गए, जिससे यह दुर्घटना घटित हुई।

यह कोई पहली घटना नहीं है। लगभग एक माह पूर्व ग्राम सर्रा से करीब दो किलोमीटर पहले एक पुलिया का निर्माण कार्य चल रहा था। निर्माण स्थल पर मार्ग बंद होने अथवा आगे अवरोध होने संबंधी कोई सूचना बोर्ड या संकेतक नहीं लगाया गया था।

रात्रि के समय मोटरसाइकिल से गुजर रहे आदिवासी समुदाय के लोग आगे सड़क बाधित होने की जानकारी न होने के कारण सीधे निर्माण स्थल पर पहुंच गए और गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों की हालत नाजुक होने पर उन्हें जबलपुर रेफर करना पड़ा था।

इन घटनाओं से ठेकेदार और लोक निर्माण विभाग की स्पष्ट लापरवाही सामने आती है। नियमों के अनुसार निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन तथा सूचना संकेत लगाना अनिवार्य होता है, लेकिन संबंधित कार्यों में इन नियमों की अनदेखी की गई।

जब इस संबंध में लोक निर्माण विभाग की एसडीओ मनीषा मोगिया से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इससे विभागीय उदासीनता और जिम्मेदारी से बचने का रवैया और भी स्पष्ट हो गया।

लगातार हो रही दुर्घटनाओं से आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित मार्गों और पुलियों की तत्काल मरम्मत कराई जाए, निर्माण स्थलों पर स्पष्ट संकेतक लगाए जाएँ, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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