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*संत समागम के बीच सकोर में जगनिक महोत्सव का आग़ाज़ तीन दिवसीय आयोजन का शुभारंभ*

*सकोर में यह आयोजन बुंदेलखंड के लिए अद्भुत है, कवियों और साहित्यकारों के परिचय के लिए यह आयोजन है हम सभी को अपने बुजुर्गों और महापुरुषों को जानने का*

*अवसर है – पिछड़ा वर्ग अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया*

*बुंदेलखंड और म.प्र के लिए यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जगनिक जी ऐसे कवि थे सकोर में जन्म ‍लिया यह हमारे लिए गौरव की बात है- साहित्यकार डॉ. श्याम सुंदर दुबे*

*संत समागम के बीच सकोर में जगनिक महोत्सव का आग़ाज़ तीन दिवसीय आयोजन का शुभारंभ*

दमोह ऐतिहासिक महत्व के लिए पहचाने जाने वाले सकोर गांव में तीन दिवसीय जगनिक महोत्सव का आग़ाज़ हो गया। अजब धाम छोटे सरकार जी, प्रसिद्ध कथावाचक विपिन बिहारी जी महाराज, कुंडलपुर मठ प्रमुख गजेंद्रपुरी जी महाराज, आचार्य दीपक उपाध्याय, वरिष्ठ साहित्यकार पँडित श्याम सुंदर दुबे और आयोजन संरक्षक डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने दीप प्रज्वलन, माँ सरस्वती जी पूजन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

म.प्र संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन दमोह द्वारा आयोजित कार्यक्रम जगनिक महोत्सव 2026 के पहले दिन जगनिक और आल्हा ऊदल के इतिहास चित्रण का वर्णन किया गया। कार्यक्रम के संबोधन में पँडित विपिन बिहारी जी महाराज ने सकोर गांव की महिमा और ऐतिहासिक महत्व का वर्णन करते हुए भूमि को नमन कर आयोजन पर खुशी जताई।

म.प्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ रामकृष्ण कुसमरिया ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज प्रकृति अपने इतिहास को नया कर रही है, सकोर में यह आयोजन बुंदेलखंड के लिए अद्भुत है, कवियों और साहित्यकारों के परिचय के लिए यह आयोजन है हम सभी को अपने बुजुर्गों और महापुरुषों को जानने का अवसर है, यह आवश्यकता भी है, इस प्रकार के मंच से अच्छे विचार आते रहें जिससे हमारा देश और समाज उन्नति करे।

कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्याम सुंदर दुबे ने अपने सम्बोधन में कहा कि बुंदेलखंड और म.प्र के लिए यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जगनिक जी ऐसे कवि थे सकोर में जन्म ‍लिया यह हमारे लिए गौरव की बात है, जगनिक का जन्म सकोर में बताया कई विद्वानों ने इसका खंडन किया, सकोर में जगमिक की ननिहाल थी और पहले ननिहाल में बच्चा होना नियम था, सकोर में जन्म के बाद जगनिक जी अलग-अलग जगहों पर गए। यह कार्यक्रम प्रेरणा प्रसंग के रूप में रहेगी, सकोर का नाम सकोर क्यो पड़ा, यह अपभ्रंश शब्द है, जो प्राचीन शब्द का बिगड़ता स्वरूप था। सकोर का नाम श्री गौरपुर था यह डॉ. रायबहादुर जी ने लिखा है, इसकी ऐतिहासिकता महत्वपूर्ण वाला स्थान है जो इतिहास की धारणा को बदलता है।

हटा के युवा साहित्यकार पँडित अजित अवस्थी ने कवि जगनिक का परिचय दिया और कहा कि सकोर की धरती से निकलकर जगनिक ने आल्हा खण्ड लिखा जिसे हम वर्षो से गाकर सुनते आ रहे हैं। वीर रस कविताओं से ओतप्रोत आल्हा खंड ने जाग्रति लाने का काम किया, युद्ध और वीरता का वर्णन महाकवि जगनिक ने किया,उनका साहित्य बुंदेलखंड के साथ ही देश में मुगलों, अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने का जज्बा पैदा किया।

केंद्रीय विद्यालय हटा से आनंद कुसमरिया ने महाकवि जगनिक के विषय मे बताया कि 1500 वर्ष पूर्व गुप्त शासक के समय सकोर से गुजरे समुद्रगुप्त ने शिव मंदिर बनबाया था। 2026 में यूनेस्को ने सकोर को विश्व विरासत के रूप में चयन किया है, जिसमे सकोर का मढ़ा सम्मिलित हैं। बुंदेलखंड के महोबा के आल्हा ऊदल के सैनिक और कवि जगनिक ने सकोर में आल्हा ऊदल को प्रशिक्षित किया था सकोर आल्हा का निवास स्थान रहा है, आल्हा ऊदल मैहर में दीपक जलाते हैं और ओरछा में भी वास करते हैं।

जगनिक महोत्सव कार्यक्रम में हटा जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगाराम पटेल, विधायक प्रतिनिधि लालचंद खटीक, पूर्व विधायक पी.एल तंतुवाय, शिवचरण पटेल, लक्ष्मण तिवारी, गोपाल पटेल, डॉ. सी.एल नेमा सहित कई जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। कार्यक्रम में शिक्षक माधव पटेल द्वारा संचालन किया गया।

हटा जनपद सीईओ संजीव गोश्वामी, बीएमओ डॉ उमाशंकर पटेल,प्रभारी परियोजना अधिकारी मिनी अर्पिता नाथन, गैसाबाद थाना प्रभारी सौरभ शर्मा सहित सभी प्रमुख विभागों के अधिकारी कर्मचारी शामिल रहे।

**स्टेडियम में स्टॉल प्रदर्शनी भी लगाई गई**

जगनिक महोत्सव आयोजन के दौरान आल्हा ऊदल स्टेडियम में स्व रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से घरेलू उत्पाद,जैविक खेती आदि के स्टॉल लगाए गए। स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास विभाग द्वारा स्टॉल लगाकर पोषण स्वास्थ्य सम्बंधित जानकारिया भी लोगो को दी गई।

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