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*दमोह जिले के बैंकों में दलालों का बोलबाला, बिना कमीशन नहीं होता काम – ग्राहकों के गंभीर आरोप*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज दमोह—

*दमोह जिले के बैंकों में दलालों का बोलबाला, बिना कमीशन नहीं होता काम – ग्राहकों के गंभीर आरोप*


दमोह। जिले के कई बैंकों में दलालों और कमीशनखोरी का खेल खुलकर चलने के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना कमीशन दिए बैंक से जुड़ा कोई भी काम आसानी से नहीं हो पाता। आरोप है कि कई बैंक शाखाओं में ब्रांच मैनेजरों ने अपने निजी एजेंट या दलाल बना रखे हैं,

जिनके माध्यम से ही ग्राहकों के काम कराए जाते हैं और इसके बदले उनसे मोटी रकम वसूली जाती है।

जानकारी के अनुसार स्टेट बैंक की हटा, पटेरा और दमोह की कई शाखाओं में इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं यूनियन बैंक की हटा, नोहटा और बांसा शाखाओं में भी अनधिकृत लोगों के बैंक परिसर के अंदर बैठकर दलाली करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ लोग रोज बैंक के अंदर बैठकर किसानों और ग्राहकों से संपर्क करते हैं और योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर कमीशन तय करते हैं।

किसानों का आरोप है कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाने के नाम पर उनसे करीब 10 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बैंक परिसर की सीसीटीवी या वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच की जाए तो अनधिकृत लोगों की मौजूदगी स्पष्ट दिखाई दे सकती है।

आरोप यह भी है कि इतनी शिकायतों के बावजूद प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। लोगों का कहना है कि लीड बैंक मैनेजर (LDM) तक भी शिकायतें पहुंच चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई के बजाय बैंक प्रबंधन का ही पक्ष लिया जाता है।

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि दलालों और उनके परिचितों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से दिलाया जा रहा है, जिससे यह अवैध व्यवस्था और मजबूत होती जा रही है l

इसी बीच हाल ही में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया दमोह के एक ब्रांच मैनेजर सहित कुछ लोगों को न्यायालय द्वारा जेल भेजे जाने की घटना के बाद बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो गए हैं। लोगों का कहना है कि अभी ऐसे कई मामले हैं जिनकी जांच होना बाकी है l

फरियादी वर्षा ने बताया कि उसका PMFME योजना के तहत ऋण 28 मार्च 2025 को स्वीकृत हो गया था, लेकिन कथित रूप से पैसे की मांग पूरी न करने पर रसीलपुर शाखा द्वारा उसे निरस्त कर दिया गया। करीब 11 महीने बाद बैंक ने यह कारण बताया कि उसका गांव शाखा से 20 किलोमीटर से अधिक दूर है, जबकि वास्तविक दूरी लगभग 10 किलोमीटर ही है l

कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि कई योजनाओं में ऋण स्वीकृत तो कर दिए जाते हैं, लेकिन वास्तविक यूनिट स्थापित ही नहीं होती। लाभार्थी को थोड़ी रकम देकर समझा दिया जाता है, जबकि बाकी राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है l

आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि PMFME और PMEGP जैसी प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं में भी बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है l

इतना ही नहीं आपको बता दें स्व सहायता समूह की महिलाओं को भी लोन के नाम पर ठगी की गई वह जल्दी खुलासा होगा पड़ताल जारी है पिक्चर अभी बाकी है l

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