—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज दमोह—
*नेशनल लोक अदालत में सुलह-समझौते से आपसी विवादों का हुआ अंत*
*जिला न्यायालय दमोह सहित चार स्थानों पर आयोजित लोक अदालत में 438 लंबित प्रकरणों का निराकरण*
*करोड़ों रुपये के अवार्ड पारित*


दमोह, 14 मार्च 2026।
मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार शनिवार 14 मार्च को त्वरित, सस्ता एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। यह लोक अदालत जिला न्यायालय दमोह के साथ-साथ तहसील न्यायालय हटा, पथरिया और तेंदूखेड़ा में भी आयोजित की गई। कार्यक्रम का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दमोह के अध्यक्ष श्री सुभाष सोलंकी के मार्गदर्शन में किया गया।
जिला मुख्यालय दमोह में नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ एडीआर भवन में मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश श्री उदय सिंह मरावी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री स्नेहा सिंह, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री कमलेश भारद्वाज, उपाध्यक्ष श्री सुरेश कुमार खत्री, चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल श्री मनीष नगाइच, प्रशासनिक अधिकारी श्री एस.एन. ओझा, तृतीय श्रेणी न्यायिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री दीपक सोनी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री विश्वनाथ बिल्थरे सहित न्यायालय के न्यायाधीश, अधिवक्ता, कर्मचारी और बड़ी संख्या में पक्षकार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री सुभाष सोलंकी ने कहा कि लोक अदालत न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके जरिए आपसी समझौते से विवादों का शीघ्र समाधान किया जाता है। उन्होंने बताया कि वर्ष की इस पहली नेशनल लोक अदालत को सफल बनाने के लिए मोटर दुर्घटना एवं चेक बाउंस के मामलों में पहले से ही प्री-सिटिंग आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे, जिसके तहत संबंधित पक्षकारों से चर्चा कर मामलों को सुलझाने का प्रयास किया गया। जिले भर में मामलों के निराकरण के लिए कुल 23 खंडपीठों का गठन किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से प्राप्त जानकारी के अनुसार लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित राजीनामा योग्य दांडिक, सिविल, चेक अनादरण, मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा, वैवाहिक विवाद तथा विद्युत संबंधी मामलों को सुनवाई के लिए रखा गया। इसके साथ ही बैंक, दूरसंचार, विद्युत विभाग और नगर पालिका से संबंधित प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को भी शामिल किया गया, ताकि अदालत में मामला दर्ज होने से पहले ही विवादों का समाधान हो सके।
लोक अदालत के दौरान मोटर दुर्घटना के 13 प्रकरणों में कुल 1 करोड़ 16 लाख 85 हजार रुपये के अवार्ड पारित किए गए। इसके अलावा न्यायालयों में लंबित विद्युत के 84, वैवाहिक के 18, चेक अनादरण के 40 तथा दांडिक के 43 मामलों सहित कुल 438 प्रकरणों का आपसी समझौते के आधार पर निराकरण किया गया। इन सभी मामलों में मिलाकर लगभग 34 करोड़ 95 लाख 26 हजार 973 रुपये के अवार्ड पारित किए गए।
इसी प्रकार बैंक, विद्युत विभाग और नगर पालिका से जुड़े 742 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का भी निराकरण किया गया, जिनमें 63 लाख 4 हजार 160 रुपये से अधिक की वसूली की गई। लोक अदालत के माध्यम से न केवल मामलों का शीघ्र समाधान हुआ बल्कि पक्षकारों का समय, धन और श्रम भी बचा।
लोक अदालत में बॉर्डर के सैनिक को मिला न्याय
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय में लंबित एक चेक बाउंस प्रकरण में लोक अदालत के माध्यम से आपसी समझौते से विवाद समाप्त हुआ। सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष ने बताया कि उनके पति सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में कार्यरत रहे हैं और कारगिल युद्ध के दौरान घायल होने के कारण उनके पैर में स्थायी विकलांगता आ गई थी। वहीं दूसरे पक्ष ने भी अपनी पारिवारिक परिस्थितियों और बीमारी की जानकारी न्यायालय को दी। न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों को समझाइश दी गई कि लोक अदालत में समझौते से प्रकरण का शीघ्र समाधान हो सकता है और अनावश्यक खर्च तथा समय की बचत होगी। न्यायालय और सुलहकर्ताओं की पहल पर दोनों पक्षों ने लिखित राजीनामा प्रस्तुत कर प्रकरण समाप्त किया। न्यायाधीशों द्वारा दोनों पक्षों को स्मृति स्वरूप फलदार पौधे भी भेंट किए गए।
कुटुंब न्यायालय ने बिछड़े दंपत्ति को मिलाया
कुटुंब न्यायालय में लंबित एक भरण-पोषण प्रकरण में भी लोक अदालत के माध्यम से सुखद समाधान हुआ। प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय श्री मोहम्मद अजहर एवं सुलहकर्ता अधिवक्ताओं की समझाइश पर पति-पत्नी के बीच समझौता हो गया। जानकारी के अनुसार दोनों का विवाह वर्ष 2022 में हुआ था, लेकिन प्लेटिना मोटरसाइकिल की मांग को लेकर विवाद बढ़ गया और अप्रैल 2025 से पत्नी अपने मायके में रहने लगी थी। मामले में भरण-पोषण की मांग को लेकर न्यायालय में प्रकरण चल रहा था। लोक अदालत में दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत कराई गई और बच्चे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए साथ रहने के लिए प्रेरित किया गया। अंततः दोनों ने एक-दूसरे के साथ रहने का निर्णय लिया और न्यायालय परिसर में एक-दूसरे को माला पहनाकर साथ विदा हुए। न्यायालय द्वारा दोनों को स्मृति स्वरूप फलदार पौधे, जिन्हें “न्याय वृक्ष” कहा गया, भेंट किए गए।
इस प्रकार नेशनल लोक अदालत का आयोजन सभी न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, जिला प्रशासन, पत्रकारों तथा जिला न्यायालय और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारियों के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंत में चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल श्री मनीष नगाइच ने सभी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।











































