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*एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रन सिंह परमार का आकस्मिक निधन, दमोह जिला संगठन ने दी श्रद्धांजलि*

—प्रधान संपादक पंडित संदीप शर्मा एमपी अपडेट न्यूज दमोह—

*एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रन सिंह परमार का आकस्मिक निधन, दमोह जिला संगठन ने दी श्रद्धांजलि*

**हिंडोरिया से सुजात खान की रिपोर्ट**

हिण्डोरिया (दमोह)। वरिष्ठ गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता एवं अंतरराष्ट्रीय जन संगठन एकता परिषद के संस्थापक सदस्य तथा वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रन सिंह परमार का 72 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ के सासा होली–तिल्दा में आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम के पश्चात अचानक हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। उनके निधन से सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है।

डॉ. परमार के पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से अंतिम दर्शन के लिए पहले महात्मा गांधी सेवा आश्रम, जौरा (ग्वालियर) लाया गया। इसके बाद शनिवार को परिजनों, एकता परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पी.वी. राजगोपाल, जिल बहिन सहित देशभर से पहुंचे सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव मृगपुरा, जिला मुरैना (मध्यप्रदेश) में किया गया।

मध्यप्रदेश एकता परिषद के पूर्व राज्य समन्वयक एवं वर्तमान दमोह जिला अध्यक्ष सुजात खान ने बताया कि डॉ. रन सिंह परमार विख्यात गांधीवादी विचारक डॉ. एस.एन. सुव्वा राव के शिष्य थे। वे नेशनल यूथ प्रोजेक्ट के राष्ट्रीय सचिव, महात्मा गांधी सेवा आश्रम जौरा के सचिव तथा गांधी भवन भोपाल के ट्रस्टी भी रहे। उन्होंने चंबल घाटी के लगभग 600 बागियों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो उनके साहस और सामाजिक समर्पण का उदाहरण है।

डॉ. परमार एकता परिषद के बैनर तले देश-दुनिया में आयोजित इस सदी के प्रमुख अहिंसात्मक आंदोलनों—जनादेश 2007, जन सत्याग्रह 2012 और जन आंदोलन 2018—के सफल संयोजक और सूत्रधार भी रहे। पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से वे समाज परिवर्तन की दिशा में कार्य करते हुए देश के वंचित और कमजोर वर्गों को जागरूक कर उन्हें सम्मान और अधिकार दिलाने के लिए सक्रिय रहे।

डॉ. रन सिंह परमार के आकस्मिक निधन पर सामाजिक कार्यकर्ता संतोष भारती, नरेंद्र दुबे, पं. मनु मिश्रा, प्रदीप खटीक, नंदलाल सिंह, के.एल. विश्वकर्मा, संदेश बंसल, ओ.पी. तिवारी, देवेंद्र दुबे, रजनी सिंह, अयोध्या प्रसाद, घनश्याम प्रसाद रैकवार, भूपेंद्र सिंह, बलराम पटेल, शिवलाल आदिवासी, रक्कू आदिवासी, मानसिंह यादव, सहाबुद्दीन खान सहित संतोष कला मंच के मलखान सिंह तथा जिले भर के ग्रामीण संगठनों के पदाधिकारियों और साथियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

उनके निधन को सामाजिक आंदोलनों और गांधीवादी विचारधारा के लिए अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है।

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